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Ludhiana News: केंद्रीय बजट से उम्मीदें... ऑटो पार्ट्स पर जीएसटी की दर कम करना, मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर समय की जरूरत
Fri, 12 Jul 2024 08:12 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
Updated Fri, 12 Jul 2024 08:12 PM IST
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-ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के साथ कदमताल नहीं मिला पा रहा पंजाब का ऑटो पार्ट्स उद्योग
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राजीव शर्मा
लुधियाना। कोविड के बाद देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने तेज रफ्तार पकड़ी है। अप्रैल 2022 में देश का ऑटो उद्योग करीब सौ बिलियन डाॅलर का था और वर्ष 2024 में इसके 126.67 बिलियन डाॅलर एवं वर्ष 2029 तक 187.85 बिलियन डाॅलर तक पहुंचने की उम्मीद है। आंकड़ों से साफ है कि ऑटोमोबाइल उद्योग टाॅप गियर में है, लेकिन पंजाब का ऑटो पार्ट्स उद्योग इसके साथ कदमताल नहीं मिला पा रहा। कभी सूबे के ऑटो पार्ट्स उद्योग का देश में दबदबा था, लेकिन अब उद्यमी बाजार की चुनौतियों का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। सूबे में बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों के अभाव में इस उद्योग की ग्रोथ पर असर हो रहा है। इसके अलावा कम हो रही रिप्लेसमेंट मार्केट और ई वाहनों की बढ़ रही मांग ने भी ऑटो पार्ट्स उद्योग को झटका दिया है। उद्यमियों की मांग है कि बजट में ऑटो पार्ट्स उद्योग को दिशा देने के लिए विशेष क्लस्टर बनाया जाए और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को मजबूत करने के साथ साथ इस सेक्टर से जीएसटी की दर को 28 प्रतिशत से कम किया जाए।
उद्यमियों का कहना है कि देश में सालाना चालीस लाख से अधिक कारों की बिक्री हो रही है। कंपनियां पांच साल की गारंटी वारंटी दे रही हैं। इसके अलावा लगातार नई तकनीक आ रही है, नतीजतन रिप्लेसमेंट मार्केट सिकुड़ रहा है और यह आधे से भी कम रह गया है। सूबे के ऑटो पार्ट्स उद्योग का मार्केट पहले रिप्लेसमेंट पर ही आधारित था, उसे झटका लगा है। इसके अलावा ई-वाहनों की बढ़ती मांग ने भी पार्ट्स उद्योग की रफ्तार को सुस्त कर दिया है। थ्री व्हीलर मार्केट सत्तर फीसदी तक इलेक्टि्रक में तबदील हो चुकी है और अब दोपहिया वाहन एवं कारों के सेगमेंट में भी इलेक्टि्रक की मांग तेजी से बढ़ रही है।
लुधियाना में ऑटो पार्ट्स बनाने वाली एक हजार से अधिक इकाइयां
लुधियाना में ऑटो पार्ट्स बनाने वाली एक हजार से अधिक इकाइयां हैं और ज्यादातर एमएसएमई सेक्टर में स्थापित हैं। इस उद्योग का सालाना कारोबार करीब आठ से दस हजार करोड़ का है। सूबे में यात्री, व्यावसायिक, ट्रैक्टर्स, कंबाइन इत्यादि उपकरणों के पुर्जे बनाए जा रहे हैं। सूबे से विदेशों को निर्यात भी किया जा रहा है। कुल उत्पादन का 25 फीसदी निर्यात और बाकी 75 फीसदी घरेलू बाजार एवं ऑटो मोबाइल कंपनियों को आपूर्ति किया जा रहा है।
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पंजाब में कारें बनाने का एक भी प्लांट नहीं
पंजाब में नवांशहर में एसएमएल ईस्जू कंपनी का प्लांट है। इसके अलावा मोहाली में स्वराज ट्रैक्टर, होशियारपुर में सोनालिका ट्रैक्टर्स, नाभा में प्रीत ट्रैक्टर्स और बरनाला में स्टैंडर्ड ट्रैक्टर का उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा पंजाब में कारें बनाने का एक भी प्लांट नहीं है। ऐसे में यहां पर पार्ट्स उद्योग को ओईएम से ऑर्डर भरपूर मात्रा में नहीं मिल पा रहे। ऑटोमोबाइल निर्माता अपने प्लांट के करीब ही पार्ट्स निर्माता इकाइयों को स्थापित कराते हैं, ताकि लागत प्रतिस्पर्धात्मक रहे।
उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष उपाय करें
ऑटो पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रधान गुरपरगट सिंह काहलों कहते हैं कि बजट में इस उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष उपाय किए जाएं। इसके अलावा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए फ्रेट सब्सिडी दी जाए, ताकि ओवरसीज मार्केट में उद्यमी अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकें। ई वाहन सेगमेंट से आ रही चुनौती से निपटने के लिए सरकार को इस उद्योग का सहयोग करना होगा।
जीएसटी की दर 12 फीसदी किया जाए
अपेक्स चैंबर ऑफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रधान एवं प्रमुख ऑटो पार्ट्स निर्माता रजनीश आहूजा का कहना है कि ऑटोमाेबाइल सेक्टर पर जीएसटी की दर 28 फीसदी है, जबकि कच्चे माल पर अठारह फीसदी। इससे समस्याएं बढ़ रही हैं। ऑटो पार्ट्स एवं कच्चे माल पर जीएसटी की दर को कम करके 12 फीसदी किया जाए। इससे इंडस्ट्री में ग्रोथ आएगी। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर की रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए सरकार को बजट में प्रयास करने होंगे।
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राजीव शर्मा
लुधियाना। कोविड के बाद देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने तेज रफ्तार पकड़ी है। अप्रैल 2022 में देश का ऑटो उद्योग करीब सौ बिलियन डाॅलर का था और वर्ष 2024 में इसके 126.67 बिलियन डाॅलर एवं वर्ष 2029 तक 187.85 बिलियन डाॅलर तक पहुंचने की उम्मीद है। आंकड़ों से साफ है कि ऑटोमोबाइल उद्योग टाॅप गियर में है, लेकिन पंजाब का ऑटो पार्ट्स उद्योग इसके साथ कदमताल नहीं मिला पा रहा। कभी सूबे के ऑटो पार्ट्स उद्योग का देश में दबदबा था, लेकिन अब उद्यमी बाजार की चुनौतियों का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। सूबे में बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों के अभाव में इस उद्योग की ग्रोथ पर असर हो रहा है। इसके अलावा कम हो रही रिप्लेसमेंट मार्केट और ई वाहनों की बढ़ रही मांग ने भी ऑटो पार्ट्स उद्योग को झटका दिया है। उद्यमियों की मांग है कि बजट में ऑटो पार्ट्स उद्योग को दिशा देने के लिए विशेष क्लस्टर बनाया जाए और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को मजबूत करने के साथ साथ इस सेक्टर से जीएसटी की दर को 28 प्रतिशत से कम किया जाए।
उद्यमियों का कहना है कि देश में सालाना चालीस लाख से अधिक कारों की बिक्री हो रही है। कंपनियां पांच साल की गारंटी वारंटी दे रही हैं। इसके अलावा लगातार नई तकनीक आ रही है, नतीजतन रिप्लेसमेंट मार्केट सिकुड़ रहा है और यह आधे से भी कम रह गया है। सूबे के ऑटो पार्ट्स उद्योग का मार्केट पहले रिप्लेसमेंट पर ही आधारित था, उसे झटका लगा है। इसके अलावा ई-वाहनों की बढ़ती मांग ने भी पार्ट्स उद्योग की रफ्तार को सुस्त कर दिया है। थ्री व्हीलर मार्केट सत्तर फीसदी तक इलेक्टि्रक में तबदील हो चुकी है और अब दोपहिया वाहन एवं कारों के सेगमेंट में भी इलेक्टि्रक की मांग तेजी से बढ़ रही है।
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लुधियाना में ऑटो पार्ट्स बनाने वाली एक हजार से अधिक इकाइयां
लुधियाना में ऑटो पार्ट्स बनाने वाली एक हजार से अधिक इकाइयां हैं और ज्यादातर एमएसएमई सेक्टर में स्थापित हैं। इस उद्योग का सालाना कारोबार करीब आठ से दस हजार करोड़ का है। सूबे में यात्री, व्यावसायिक, ट्रैक्टर्स, कंबाइन इत्यादि उपकरणों के पुर्जे बनाए जा रहे हैं। सूबे से विदेशों को निर्यात भी किया जा रहा है। कुल उत्पादन का 25 फीसदी निर्यात और बाकी 75 फीसदी घरेलू बाजार एवं ऑटो मोबाइल कंपनियों को आपूर्ति किया जा रहा है।
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पंजाब में कारें बनाने का एक भी प्लांट नहीं
पंजाब में नवांशहर में एसएमएल ईस्जू कंपनी का प्लांट है। इसके अलावा मोहाली में स्वराज ट्रैक्टर, होशियारपुर में सोनालिका ट्रैक्टर्स, नाभा में प्रीत ट्रैक्टर्स और बरनाला में स्टैंडर्ड ट्रैक्टर का उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा पंजाब में कारें बनाने का एक भी प्लांट नहीं है। ऐसे में यहां पर पार्ट्स उद्योग को ओईएम से ऑर्डर भरपूर मात्रा में नहीं मिल पा रहे। ऑटोमोबाइल निर्माता अपने प्लांट के करीब ही पार्ट्स निर्माता इकाइयों को स्थापित कराते हैं, ताकि लागत प्रतिस्पर्धात्मक रहे।
उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष उपाय करें
ऑटो पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रधान गुरपरगट सिंह काहलों कहते हैं कि बजट में इस उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष उपाय किए जाएं। इसके अलावा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए फ्रेट सब्सिडी दी जाए, ताकि ओवरसीज मार्केट में उद्यमी अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकें। ई वाहन सेगमेंट से आ रही चुनौती से निपटने के लिए सरकार को इस उद्योग का सहयोग करना होगा।
जीएसटी की दर 12 फीसदी किया जाए
अपेक्स चैंबर ऑफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रधान एवं प्रमुख ऑटो पार्ट्स निर्माता रजनीश आहूजा का कहना है कि ऑटोमाेबाइल सेक्टर पर जीएसटी की दर 28 फीसदी है, जबकि कच्चे माल पर अठारह फीसदी। इससे समस्याएं बढ़ रही हैं। ऑटो पार्ट्स एवं कच्चे माल पर जीएसटी की दर को कम करके 12 फीसदी किया जाए। इससे इंडस्ट्री में ग्रोथ आएगी। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर की रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए सरकार को बजट में प्रयास करने होंगे।