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कृषि विभिन्नता में मछली पालन फायदेमंद धंधा : रणिके
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Sun, 24 Apr 2016 10:27 PM IST
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लुधियाना के पीएयू में आयोजित पंजाब मछली पालन मेले में लगी प्रर्दशनी को देखते व किसानों को सम्मानित करते पशु पालन मंत्री गुलजार सिंह राणिके।
- फोटो : अमर उजाला
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पशु पालन एवं मछली पालन मंत्री गुलजार सिंह रणिके ने कहा है कि सूबे के किसानों को मौजूदा फसली चक्र से निकल कर सहायक धंधों को अपनाना होगा। इससे जहां किसान की आमदनी बढ़ेगी, वहीं पर्यावरण सुधार की दिशा में भी काम हो सकेगा। जमीनी पानी के गिर रहे स्तर को थामा जा सकेगा। रणिके रविवार को पीएयू के पाल आडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय मछली पालन मेले के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे।
रणिके ने कहा कि पंजाब की किसानी बड़े संकट से गुजर रही है। कृषि लागत बढ़ रही है और आमदनी कम हो रही है। अब कृषि धंधा फायदेमंद नहीं रहा। किसानी को संकट से निकालने और आमदनी बढ़ाने के लिए सहायक धंधे अपनाना जरूरी होगा। सहायक धंधों में मछली पालन ऐसा धंधा है, जो पूरे विश्व में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने सूबे के शिक्षित बेरोजगारों को आह्वान किया कि वे नीली क्रांति लाने में अग्रणी भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि पंजाब में 38 हजार एकड़ रकबे में मछली पालन किया जा रहा है। इस धंधे में पंजाब देश में नंबर वन है। देश में औसत मछली उत्पादन प्रति हेक्टेयर प्रति साल तीन टन है, जबकि पंजाब में यह औसत साढ़े छह टन है। इस धंधे को बढ़ावा देने के लिए सरकार नब्बे फीसदी तक सब्सिडी दे रही है। हर जिले में मछली फार्म बनाए जा रहे हैं।
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इस अवसर पर मछली पालन को लेकर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसमें लोगों को हर तरह की जानकारी दी गई। समारोह में अतिरिक्त मुख्य सचिव मनदीप सिंह संधू, डॉ. अमरजीत सिंह नंदा, डॉ. मदन मोहन और एचएस संघा समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
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रणिके ने कहा कि पंजाब की किसानी बड़े संकट से गुजर रही है। कृषि लागत बढ़ रही है और आमदनी कम हो रही है। अब कृषि धंधा फायदेमंद नहीं रहा। किसानी को संकट से निकालने और आमदनी बढ़ाने के लिए सहायक धंधे अपनाना जरूरी होगा। सहायक धंधों में मछली पालन ऐसा धंधा है, जो पूरे विश्व में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने सूबे के शिक्षित बेरोजगारों को आह्वान किया कि वे नीली क्रांति लाने में अग्रणी भूमिका निभाएं।
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उन्होंने कहा कि पंजाब में 38 हजार एकड़ रकबे में मछली पालन किया जा रहा है। इस धंधे में पंजाब देश में नंबर वन है। देश में औसत मछली उत्पादन प्रति हेक्टेयर प्रति साल तीन टन है, जबकि पंजाब में यह औसत साढ़े छह टन है। इस धंधे को बढ़ावा देने के लिए सरकार नब्बे फीसदी तक सब्सिडी दे रही है। हर जिले में मछली फार्म बनाए जा रहे हैं।
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इस अवसर पर मछली पालन को लेकर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसमें लोगों को हर तरह की जानकारी दी गई। समारोह में अतिरिक्त मुख्य सचिव मनदीप सिंह संधू, डॉ. अमरजीत सिंह नंदा, डॉ. मदन मोहन और एचएस संघा समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।