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भारत बंद का असर: पंजाब के उद्योगों को लगा 500 करोड़ का झटका, कारोबारी बोले- प्रदर्शन की एक जगह हो तय
Mon, 27 Sep 2021 08:08 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 27 Sep 2021 08:08 PM IST
सार
सोमवार को पूरे पंजाब में किसानों के भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला। बंद की वजह से पंजाब के उद्योगों को 500 करोड़ रुपये के नुकसान का भी दावा किया गया। कारोबारियों का कहना है कि रास्ते बंद होने से नुकसान का सामना करना पड़ता है।
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लुधियाना में टोल पर धरने पर बैठे किसान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आए दिन होने वाले बंद से अब कारोबारियों में आक्रोश बढ़ने लगा है। सोमवार को भारत बंद के चलते पंजाब के कारोबारियों को लगभग 500 करोड़ रुपये झटका लगा है। क्योंकि भारत बंद के चलते सभी रोड जाम थे। ऐसे में फैक्टरी में काम करने वाले मजदूर अपने काम पर नहीं पहुंचे। वहीं जिन फैक्टरी मालिकों को अपना तैयार माल बाहर भेजना था, वह भी काम नहीं कर सके। आए दिन होने वाले बंद को लेकर अब कारोबारियों का साफ कहना है कि सरकार को चाहिए कि प्रदर्शन करने वालों के लिए एक जगह निश्चित कर दें, जहां बैठकर वे अपना विरोध जताएं।
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सीआईसीयू महासचिव पंकज शर्मा कहते हैं कि बंद के दौरान एक भय का माहौल रहता है। सोमवार के बंद से पंजाब की इडस्ट्री को 500 करोड़ का नुकसान हुआ है। फैक्टरी में काम करने वाले वर्कर काम पर नहीं पहुंचे, अगर कोई आना भी चाह रहा था तो उन्हें रास्ते में रोक दिया गया। ऐसे में दिन भर कारोबारियों को अपनी फैक्टरी बंद रखनी पड़ी। इस बात का भी डर रहता है कि उनकी फैक्टरी में तोड़फोड़ न हो जाए। जहां फैक्टरी का उत्पादन प्रभावित हुआ है, वहीं बंद के चलते वे तैयार माल भी कहीं भेज नहीं सके। सरकार को चाहिए कि वह बंद को शांतमय तरीके से करवाए ताकि कोई व्यक्ति इससे प्रभावित न हो सके। इसके लिए सरकार एक जगह तय करे, जहां शांतमय तरीके से प्रदर्शन हो सके।
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सीआईआई के उपाध्यक्ष अमित थापर कहते हैं कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करना हर व्यक्ति का हक है लेकिन आम लोगों के हक भी ध्यान रखना जरूरी है। किसान आंदोलन किसानों और सरकार के बीच का एक विवाद है। भारत बंद करके इसमें आम लोगों को क्यों पीसा जा रहा है। इससे उनके कारोबार पर भी सीधा असर पड़ रहा है। बंद आम लोगों की सहमति से होना चाहिए किसी पर थोपा नहीं जाना चाहिए। अगर आम लोग इस बंद में शामिल होना चाहते हैं तो उनका स्वागत होना चाहिए। किसी के व्यापारिक या फिर फैक्टरी को जबरदस्ती बंद करवाना ठीक नहीं है।