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दस करोड़ की नशीली दवाएं पकड़ीं
अमर उजाला, लुधियाना
Updated Tue, 15 Oct 2013 10:25 PM IST
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लुधियाना पुलिस ने दवा की आड़ में नशे का धंधा कर पंजाब की जवानी को बर्बाद करने वाले गिरोह का परदाफाश किया है। पुलिस ने इस धंधे में पहले से काबू किए गए आरोपी परवीन कुमार की निशानदेही पर सेहत विभाग की टीम के साथ मिल कर बद्दी (हिमाचल प्रदेश) के गांव पंजेरा के नजदीक जीबीएस फार्मेटिकल इकाई में छापामारी करके करीब दस करोड़ रुपये मूल्य की नशे की खेप बरामद की है।
इस केस में पुलिस ने सात और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनकी पहचान सुखदेव सिंह, सलीम मोहम्मद, सुखराज, नरेश कुमार, पुनीत गर्ग, हरविंदर सिंह एवं जतिंदर के तौर पर हुई है। इस केस में पवन कुमार भी पहले से ही पुलिस की गिरफ्त में है।
पुलिस ने इस इकाई से 25 किलो नशीला पाउडर, 1.05 लाख इंजेक्शन, डेढ़ लाख शीशियां, आठ लाख रेपर के अलावा 500 ग्राम डाइजापाम एवं 277 ग्राम बुफरी नारफाइना बरामद किया है। अकेले 277 ग्राम बुफरी नारफाइना की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत सवा नौ करोड़ रुपये है।
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इससे नौ लाख से अधिक नशे के कैप्सूल तैयार किए जा सकते थे। डाइजापाम से पचास हजार नींद के इंजेक्शन तैयार किए जा सकते थे। पुलिस कमिश्नर परमजीत सिंह गिल ने इसकी पुष्टि की है।
कमिश्नर का कहना है कि पुलिस ने दवा की आढ़ में नशे का धंधा करने वाले इस गिरोह का सितंबर में 1.43 करोड़ रुपये का माल बरामद किया था। इस गिरोह के किंगपिन (बाप-बेटा) पवन गोयल एवं नितिन गोयल, मोगा के अलावा दीपक सोनी फरार हैं। उनकी तलाश में छापामारी की जा रही है।
बाप-बेटा ने अपनी कई दवा की फर्जी फर्में बना रखी हैं, उन्हीं फर्मों के नाम पर ट्रांसपोर्टरों से मिल कर यह धंधा चलाया जा रहा था। पिछले दिनों पुलिस ने इनके रिहायशी, व्यवसायिक ठिकानों पर दबिश देकर बड़ी संख्या में नशीली दवाएं बरामद की थीं।
इनमें 1.12 लाख कैप्सूल, 2.98 लाख गोलियां एवं 2380 शीशियां बरामद की गईं। बद्दी मेें स्थित फैक्ट्री में रोजाना काम नहीं होता था, खेप भेजने वाले दिन ही मजदूरों को बुला कर काम कराया जा रहा था। कमिश्नर का कहना है कि इस मामले में और भी कई खुलासे होने की संभावना है। पुलिस नशे के इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने में लगी है।
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इस केस में पुलिस ने सात और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनकी पहचान सुखदेव सिंह, सलीम मोहम्मद, सुखराज, नरेश कुमार, पुनीत गर्ग, हरविंदर सिंह एवं जतिंदर के तौर पर हुई है। इस केस में पवन कुमार भी पहले से ही पुलिस की गिरफ्त में है।
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पुलिस ने इस इकाई से 25 किलो नशीला पाउडर, 1.05 लाख इंजेक्शन, डेढ़ लाख शीशियां, आठ लाख रेपर के अलावा 500 ग्राम डाइजापाम एवं 277 ग्राम बुफरी नारफाइना बरामद किया है। अकेले 277 ग्राम बुफरी नारफाइना की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत सवा नौ करोड़ रुपये है।
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इससे नौ लाख से अधिक नशे के कैप्सूल तैयार किए जा सकते थे। डाइजापाम से पचास हजार नींद के इंजेक्शन तैयार किए जा सकते थे। पुलिस कमिश्नर परमजीत सिंह गिल ने इसकी पुष्टि की है।
कमिश्नर का कहना है कि पुलिस ने दवा की आढ़ में नशे का धंधा करने वाले इस गिरोह का सितंबर में 1.43 करोड़ रुपये का माल बरामद किया था। इस गिरोह के किंगपिन (बाप-बेटा) पवन गोयल एवं नितिन गोयल, मोगा के अलावा दीपक सोनी फरार हैं। उनकी तलाश में छापामारी की जा रही है।
बाप-बेटा ने अपनी कई दवा की फर्जी फर्में बना रखी हैं, उन्हीं फर्मों के नाम पर ट्रांसपोर्टरों से मिल कर यह धंधा चलाया जा रहा था। पिछले दिनों पुलिस ने इनके रिहायशी, व्यवसायिक ठिकानों पर दबिश देकर बड़ी संख्या में नशीली दवाएं बरामद की थीं।
इनमें 1.12 लाख कैप्सूल, 2.98 लाख गोलियां एवं 2380 शीशियां बरामद की गईं। बद्दी मेें स्थित फैक्ट्री में रोजाना काम नहीं होता था, खेप भेजने वाले दिन ही मजदूरों को बुला कर काम कराया जा रहा था। कमिश्नर का कहना है कि इस मामले में और भी कई खुलासे होने की संभावना है। पुलिस नशे के इस पूरे नेटवर्क को तोड़ने में लगी है।