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बढ़ रही रार : किसी हाल में फसल अदायगी सीधे किसानों को देना संभव नहीं, किसान नेता बोले-केंद्र परेशान कर रहा

Sat, 03 Apr 2021 05:49 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 03 Apr 2021 05:49 PM IST
सार

  • पीएयू में संयुक्त मोर्चा की बैठक आयोजित
  • किसान नेता बोले, पांच अप्रैल को एफसीआई दफ्तरों का करेंगे घेराव

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Meeting of Sanyukt Kisan Morcha is Held at Punjab agricultural university of Ludhiana
लुधियाना में बैठक करते किसान नेता। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन में तेजी लाने के लिए शनिवार को लुधियाना की पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू) में संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में प्रदेश भर से मुलाजिम, ट्रेड यूनियन, मजदूर यूनियन समेत अन्य संगठनों को बुलाया गया था। संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से बलबीर सिंह राजेवाल, डॉक्टर दर्शन पाल सिंह इस बैठक में मौजूद रहे। बैठक में जितने भी यूनियन नेता पहुंचे उन्होंने किसान आंदोलन को समर्थन देने की बात कही। 

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किसान नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने कहा कि केंद्र सरकार फसल का दाम सीधे किसानों के खातों में डालने की बात कह रही है। ऐसा किसी हालत में संभव नहीं है क्योंकि किसानों को पैसा जमीन की जमाबंदी के हिसाब से दिया जाएगा। पंजाब में कई स्थानों पर तीन पुश्तों से जमीन का बंटवारा नहीं हुआ है। 30 फीसदी जमीन मालिक इस समय विदेशों में रहते हैं। वहीं जितने भी मुलाजिम हैं वह खुद खेती नहीं करते हैं। वह अपनी जमीन ठेके पर देकर काम करवाते हैं। ऐसे में कैसे संभव है कि सरकार सीधे किसानों को पैसा देगी। 
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उन्होंने कहा कि इस समय केंद्र सरकार गेहूं की खरीद में जानबूझ कर नए-नए पेंच फंसा रही है ताकि आंदोलन किसी तरह कमजोर किया जा सके। उन्होंने कहा कि फसल की कटाई के समय आंदोलन में कोई कमी नहीं आएगी। ज्यादातर गांव फैसला कर चुके हैं कि फसल की कटाई के समय आधे किसान मोर्चे पर रहेंगे। अब केंद्र सरकार चावल में प्रोटीन को लेकर नया पेंच डाल रही है। ज्यादातर शैलर में मिलिंग बंद हो चुकी है। किसान सरकार के ऐसे फैसलों के खिलाफ अपना विरोध हर हाल में जारी रखेंगे। 
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केंद्र सरकार की तरफ से पंजाब के सीमा एरिया में प्रवासी मजदूरों को नशा देकर बंधुआ मजदूर बनाने के सवाल पर राजेवाल ने कहा कि यह सरासर गलत है। किसान आंदोलन के बाद ही केंद्र सरकार को यह क्यों दिखाई दिया, इससे पहले क्यों नहीं। यह सिर्फ पंजाब के किसानों को बदनाम करने की साजिश है। किसान नेता टिकैत पर राजस्थान में हमले पर राजेवाल ने कहा कि उनकी कार पर केवल पत्थर नहीं मारे गए बल्कि गोली भी चली है। जब वह ओडिशा गए थे तो उनकी यूनियन के लगे पोस्टरों को फाड़ा गया था। केंद्र सरकार एक बात समझ ले, जब तक कृषि कानून वापस नहीं होंगे उनका संघर्ष इसी तरह जारी रहेगा। अब पांच अप्रैल को वह देश भर में एफसीआई दफ्तर के बाहर धरना देंगे। 

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