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सामाजिक बुराइयों पर आयोजित नाटकों ने बटोरीं तालियां
ब्यूरो, अमर उजाला/लुधियाना
Updated Fri, 15 Jan 2016 09:46 PM IST
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पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) में चल रहे अंतर विश्वविद्यालय उत्तरी जोन यूथ फेस्टिवल के दूसरे दिन युवाओं ने गीत, संगीत, कार्टून, कोलाज के अलावा सामाजिक बुराइयों पर आधारित नाटक पेश किए। ओपन एयर थिएटर में पीएयू के वाइस चांसलर डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों ने भी नाटकों का आनंद उठाया।
इस अवसर पर वाइस चांसलर ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ गीत संगीत और अपनी परंपराओं से भी युवा ऐसे आयोजनों के जरिए रूबरू होते हैं। युवाओं को अपने विरसे और जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है और हर तरह के कल्चर का अनुभव होता है।
दूसरे दिन क्लासिकल संगीत, वाद्य संगीत और थिएटर मुकाबले कराए गए। युवाओं ने क्लासिकल संगीत में अपनी प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया। जबकि वाद्य यंत्रों पर संगीत की धुनें छेड़ कर माहौल को संगीतमय बना दिया। कोलाज मेकिंग मुकाबलों के अधिकतर प्रतिभागियों ने स्थिर जीवन, लैंड स्केप और ग्रामीण जीवन की झलक पेश की। क्ले माडलिंग में मां की ममता, रिदम और मेहनत थीम के तहत अपनी पेशकारी का हुनर पेश किया।
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कार्टून मुकाबलों ने युवाओं ने ज्वलंत मुद्दों भ्रष्टाचार और स्वच्छ भारत जैसे विषयों को चुना। नाटकों में सामाजिक, राजनीतिक बुराइयों के अलावा विभिन्न सभ्यताओं को दर्शाने का प्रयास किया। नाटकों में दुराचार, एसिड अटैक, महिलाओं के सम्मान की स्थिति पर कटाक्ष किया गया। नाटकों के जरिए यह बताने का प्रयास किया गया कि बदलते दौर में स्त्री भी बराबर के सम्मान की हकदार है और वह किसी से भी पीछे नहीं है। इस अवसर पर एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के डॉ. वीके शर्मा और डॉ. अरुण पाटिल मौजूद रहे।
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इस अवसर पर वाइस चांसलर ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ गीत संगीत और अपनी परंपराओं से भी युवा ऐसे आयोजनों के जरिए रूबरू होते हैं। युवाओं को अपने विरसे और जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है और हर तरह के कल्चर का अनुभव होता है।
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दूसरे दिन क्लासिकल संगीत, वाद्य संगीत और थिएटर मुकाबले कराए गए। युवाओं ने क्लासिकल संगीत में अपनी प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया। जबकि वाद्य यंत्रों पर संगीत की धुनें छेड़ कर माहौल को संगीतमय बना दिया। कोलाज मेकिंग मुकाबलों के अधिकतर प्रतिभागियों ने स्थिर जीवन, लैंड स्केप और ग्रामीण जीवन की झलक पेश की। क्ले माडलिंग में मां की ममता, रिदम और मेहनत थीम के तहत अपनी पेशकारी का हुनर पेश किया।
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कार्टून मुकाबलों ने युवाओं ने ज्वलंत मुद्दों भ्रष्टाचार और स्वच्छ भारत जैसे विषयों को चुना। नाटकों में सामाजिक, राजनीतिक बुराइयों के अलावा विभिन्न सभ्यताओं को दर्शाने का प्रयास किया। नाटकों में दुराचार, एसिड अटैक, महिलाओं के सम्मान की स्थिति पर कटाक्ष किया गया। नाटकों के जरिए यह बताने का प्रयास किया गया कि बदलते दौर में स्त्री भी बराबर के सम्मान की हकदार है और वह किसी से भी पीछे नहीं है। इस अवसर पर एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के डॉ. वीके शर्मा और डॉ. अरुण पाटिल मौजूद रहे।