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भूमि अधिग्रहण के नोटिस का किया विरोध
अमर उजाला, लुधियाना
Updated Mon, 25 Nov 2013 10:37 PM IST
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लुधियाना में पंजाब सरकार द्वारा 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत भेजे गए नोटिसों के खिलाफ सोमवार को नौ गांवों के सैकड़ों किसानों ने विरोध किया। नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू होने के बाद रद्द हो चुका है।
यहां तक कि नया भूमि अधिग्रहण कानून 2011 में पहली बार संसद में पेश किए जाने के दिन से ही लागू हो गया था। बावजूद इसके केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री व स्थानीय सांसद मनीष तिवारी ने ग्रेटर लुधियाना डेवलपमेंट अथॉरिटी के अतिरिक्त प्रशासक के साथ बात करके उनको बताया कि राज्य सरकार पुराने कानून के तहत नोटिस नहीं जारी कर सकती।
नौ गांवों जसपाल बांगड़, लोहारा, गरीब नगरी, ब्राह्मण माजरा, संगोवाल, नत्त, पवा, धरोड़ और हरनामपुरा के किसान विरोध जाहिर करने के लिए ग्लाडा के कार्यालय में एकत्रित हुए।
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किसानों ने कहा कि 1894 के पुराने भूमि अधिग्रहण कानून के तहत वह किसी भी स्थिति में अपनी जमीनों को नहीं देना चाहते। इस कानून को अंग्रेजों ने लोगों की जमीन छीनने के लिए बनाया था।
किसान उजागर सिंह ने कहा कि बड़े स्तर पर विरोध जाहिर करने के अलावा जरूरत पड़ने पर वह पंजाब सरकार के खिलाफ कानूनी रास्ता भी अपनाएंगे।
पंजाब सरकार नया किसान हितैषी कानून लागू होने के बावजूद पुराने कानून के तहत उनसे धक्के से जमीन प्राप्त करना चाहती है। जिला कांग्रेस लुधियाना देहाती, शहरी के प्रधान मलकीत सिंह दाखा और पवन दीवान ने भी किसानों को संबोधित किया।
उन्होंने किसानों को भरोसा दिया कि वह किसी भी कीमत पर राज्य सरकार को किसानों की जमीन नहीं छीनने देंगे। अकाली-भाजपा सरकार की इस तानाशाही के खिलाफ कांग्रेस जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरने से गुरेज नहीं करेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के इस कदम ने खुद को किसानों के हितों का रक्षक होने का दावा करने वालों के चेहरों से नकाब उतार दिया है, जो किसानों को फायदा नहीं देना चाहते।
कांग्रेस नेतृत्व वाली केन्द्र की यूपीए सरकार द्वारा किसान हितैषी कानून लागू किए जाने के बावजूद 120 साल पुराने कानून के तहत नोटिस क्यों जारी किए गए? इस अवसर पर सरपंच अमरीक सिंह, हरविंदर सिंह घोला, नाहर सिंह, रणजीत सिंह, डोगर सिंह, लाभ सिंह, हरदीप सिंह, जरनैल सिंह और जगतार सिंह आदि मौजूद रहे।
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यहां तक कि नया भूमि अधिग्रहण कानून 2011 में पहली बार संसद में पेश किए जाने के दिन से ही लागू हो गया था। बावजूद इसके केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री व स्थानीय सांसद मनीष तिवारी ने ग्रेटर लुधियाना डेवलपमेंट अथॉरिटी के अतिरिक्त प्रशासक के साथ बात करके उनको बताया कि राज्य सरकार पुराने कानून के तहत नोटिस नहीं जारी कर सकती।
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नौ गांवों जसपाल बांगड़, लोहारा, गरीब नगरी, ब्राह्मण माजरा, संगोवाल, नत्त, पवा, धरोड़ और हरनामपुरा के किसान विरोध जाहिर करने के लिए ग्लाडा के कार्यालय में एकत्रित हुए।
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किसानों ने कहा कि 1894 के पुराने भूमि अधिग्रहण कानून के तहत वह किसी भी स्थिति में अपनी जमीनों को नहीं देना चाहते। इस कानून को अंग्रेजों ने लोगों की जमीन छीनने के लिए बनाया था।
किसान उजागर सिंह ने कहा कि बड़े स्तर पर विरोध जाहिर करने के अलावा जरूरत पड़ने पर वह पंजाब सरकार के खिलाफ कानूनी रास्ता भी अपनाएंगे।
पंजाब सरकार नया किसान हितैषी कानून लागू होने के बावजूद पुराने कानून के तहत उनसे धक्के से जमीन प्राप्त करना चाहती है। जिला कांग्रेस लुधियाना देहाती, शहरी के प्रधान मलकीत सिंह दाखा और पवन दीवान ने भी किसानों को संबोधित किया।
उन्होंने किसानों को भरोसा दिया कि वह किसी भी कीमत पर राज्य सरकार को किसानों की जमीन नहीं छीनने देंगे। अकाली-भाजपा सरकार की इस तानाशाही के खिलाफ कांग्रेस जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरने से गुरेज नहीं करेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के इस कदम ने खुद को किसानों के हितों का रक्षक होने का दावा करने वालों के चेहरों से नकाब उतार दिया है, जो किसानों को फायदा नहीं देना चाहते।
कांग्रेस नेतृत्व वाली केन्द्र की यूपीए सरकार द्वारा किसान हितैषी कानून लागू किए जाने के बावजूद 120 साल पुराने कानून के तहत नोटिस क्यों जारी किए गए? इस अवसर पर सरपंच अमरीक सिंह, हरविंदर सिंह घोला, नाहर सिंह, रणजीत सिंह, डोगर सिंह, लाभ सिंह, हरदीप सिंह, जरनैल सिंह और जगतार सिंह आदि मौजूद रहे।