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श्री कीरतपुर साहिब में आयोजित होला-मोहल्ला में खली संगत की कमी
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श्री कीरतपुर साहिब। धार्मिक नगरी कीरतपुर साहिब में राष्ट्रीय त्योहार होला-मोहल्ला के दूसरे दिन संगत की संख्या में कमी देखी गई। श्रद्धालुओं के मुताबिक दिल्ली किसान संघर्ष और कोरोना वायरस के कारण श्रद्धालु कम संख्या में पहुंचे। ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री पातालपुरी साहिब, गुरुद्वारा श्री चरण कंवल साहिब, गुरुद्वारा बाबा गुरदिता जी, दरगाह पीर साईं बुढन शाह जी, गुरुद्वारा श्री बिबानगढ़ साहिब, गुरुद्वारा शीश महल साहिब, डेरा बाबा श्री चंद जी के अलावा अन्य धार्मिक स्थलों पर संगत की कम संख्या रही, जबकि इससे पहले होला-मोहल्ला के दूसरे दिन आने वाली संगत की संख्या हजारों में रहती थी।
श्रद्धालुओं की संख्या बेशक कम है लेकिन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अलावा विभिन्न धार्मिक संगठनों और समाजसेवी लोगों की ओर से लंगर सेवा लगातार जारी है। बड़ी श्रद्धा भावना से गुरुद्वारा श्री पतालपुरी साहिब, गुरुद्वारा बाबा गुरदिता जी के अलावा अन्य धार्मिक स्थलों पर विभिन्न व्यंजनों के लंगर लगाए गए, जिनमें कढ़ी चावल, हरी सब्जियां, आलू की टिक्की, खीर, जलेबियां इत्यादि के स्वादिष्ट व्यंजन शामिल हैं।
संगत की कम संख्या के कारण मेले में दुकानें लगाने वाले दुकानदार भी परेशान हैं। बाबा गुरदित्ता जी मार्केट से मनजीत सिंह नीटू, शिव कुमार जगोता व अन्य ने बताया कि पिछले वर्ष मेले के दौरान भारी गिनती में श्रद्धालु आए थे, लेकिन इस वर्ष 30% भी संगत की संख्या नहीं है। जिससे उनकी बिक्री नाममात्र है। वहीं कोरोना को लेकर प्रशासन के निर्देश भी उनके लिए जी का जंजाल बने हुए हैं।
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श्रद्धालुओं की संख्या बेशक कम है लेकिन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अलावा विभिन्न धार्मिक संगठनों और समाजसेवी लोगों की ओर से लंगर सेवा लगातार जारी है। बड़ी श्रद्धा भावना से गुरुद्वारा श्री पतालपुरी साहिब, गुरुद्वारा बाबा गुरदिता जी के अलावा अन्य धार्मिक स्थलों पर विभिन्न व्यंजनों के लंगर लगाए गए, जिनमें कढ़ी चावल, हरी सब्जियां, आलू की टिक्की, खीर, जलेबियां इत्यादि के स्वादिष्ट व्यंजन शामिल हैं।
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संगत की कम संख्या के कारण मेले में दुकानें लगाने वाले दुकानदार भी परेशान हैं। बाबा गुरदित्ता जी मार्केट से मनजीत सिंह नीटू, शिव कुमार जगोता व अन्य ने बताया कि पिछले वर्ष मेले के दौरान भारी गिनती में श्रद्धालु आए थे, लेकिन इस वर्ष 30% भी संगत की संख्या नहीं है। जिससे उनकी बिक्री नाममात्र है। वहीं कोरोना को लेकर प्रशासन के निर्देश भी उनके लिए जी का जंजाल बने हुए हैं।
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