एशिया की सबसे बड़ी मंडी का हाल: पुख्ता इंतजाम न होने से परेशान किसान, बारिश से भीगा सैकड़ों टन धान
पंजाब में बेमौसम बारिश ने किसानों के सामने बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। सैकड़ों टन धान मंडियों में भीग गया है। सूखने के बाद ही इसकी खरीद होगी। किसानों का कहना है कि मंडियों में पुख्ता इंतजाम नहीं थे। यही वजह है कि धान भीग गया है। अब हफ्ते पर इन्हें सूखाना पड़ेगा।
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देर रात से हो रही बारिश ने पंजाब की मंडियों में सरकार के प्रबंध की पोल खोल दी। बरसात की वजह से मंडियों में सैकड़ों टन धान की फसल भीग चुकी है। धान की फसल को किसान किसी तरह से फटी तिरपाल के सहारे बचाने का प्रयास करते रहे पर उनको कोई लाभ हुआ नहीं।
नतीजा यह हुआ कि अब किसानों को धान की फसल को सुखाने के लिए करीब एक सप्ताह और मंडियों में बैठना होगा। फसल भीगने के कारण अब इसकी बोली नहीं लगेगी और खरीद एजेंसियां तभी फसल खरीदेंगी जब यह पूरी तरह से सूख जाएगी जो फसल भीगने से बच भी गई है उसमें नमी की मात्रा बढ़ गई है। जिसकी वजह से किसानों के लिए यह एक नई परेशानी बन गई है।
गौरतलब है कि धान की फसल की खरीद के लिए सरकार ने बड़े दावे किए थे। एशिया की सबसे बड़ी खन्ना अनाज मंडी, जिला लुधियाना की दूसरी सबसे बड़ी मंड़ी जगरांव में सैकड़ों टन अनाज भीग चुका है। सबसे ज्यादा बुरे हालात छोटी मंडियों के है। जहां शेड तो थे नहीं और तिरपाल का प्रबंध भी नहीं किया गया था।
वहां मंडी में पड़ी धान की फसल पूरी तरह भीग चुकी है। जगरांव मंडी की बात करें तो अभी तक यहां महज दस फीसदी धान की फसल पहुंची है। महानगर लुधियाना में आसपास हंबड़ा रोड और बहादुर के रोड स्थित अनाज मंडी में पुख्ता प्रबंध न होने के कारण भी धान की फसल भीग चुकी है।
एशिया की सबसे बड़ी मंडी जलमग्न
खन्ना में शनिवार देर रात से शुरू हुई बरसात ने एशिया की सबसे बड़ी मंडी खन्ना जलमग्न हो गई। मंडी में पड़ा ज्यादातर धान गीला होने के कारण बर्बाद हो गया। मंडी में बैठे किसान अमरजीत सिंह गांव सलोदी से बताया कि अगर मार्केट कमेटी ने समय रहते सही प्रबंध किए होते तो हमारी फसल बर्बाद न होती।
बारिश शुरू होती है तभी मोटर चालू कर देनी चाहिए जिससे साथ-साथ मंडी में पानी जमा न हो। मार्केट कमेटी की लापरवाही के कारण ही हम लोगों की फसल बर्बाद हुई है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि इस नुकसान की भरपाई सरकार को करनी चाहिए। किसानों का कहना है कि मार्केट कमेटी लाखों रुपये हमसे टैक्स के रूप में लेती है तो क्या उचित प्रबंध नहीं कर सकती।
फड़ों पर पड़ी फसल तक बर्बाद हो गई। इसकी वजह थी कि जो फसल बोरियों में या थैलों में भरी गई थी उसके नीचे क्रेट तक नहीं रखे गए थे। उनका कहना है कि अगर बोरियों को नीचे क्रेट रख दिए जाते तो फसल बर्बाद न होती। कमेटी के पास तिरपाल ही हैं।
मार्केट कमेटी के सचिव सुरजीत सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि कुदरती आफत के आगे हम क्या कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि फिर भी हमने प्रबंध अच्छे किए थे जिससे फसल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। शनिवार शाम से लेकर अब तक चार से पांच हजार क्विंटल धान मंडी में पड़ा है। धान कितना बर्बाद हुआ है इसका अभी अनुमान नहीं ।
पहले छह दिन से बैठे है मंडी में अब ओर होगा इंतजार
जिला लुधियाना की जगरांव मंडी में हालात भी कुछ ऐसे है, कुप्रबंधन के चलते किसानों को सैकड़ों टन अनाज भीग गया है। गांव सोइया से आए किसान परमजीत सिंह ने बताया कि वह लगभग छह दिन से यहां पर बैठे है। रात को बरसात शुरू होते ही उन्हें तिरपाल मुहैया करवाई गई लेकिन वह जगह जगह से फटी थी। इस लापरवाही से उनकी 25 फीसदी से ज्यादा फसल भीग गई है।
अब फसल सूखने तक उन्हें पता नहीं कितने दिन और यहां बिताने पड़ेंगे। गांव मलकपुर निवासी मेहर सिंह ने बताया कि यहां कोई प्रबंध दिखाई नहीं दे रहे है। बरसात के चलते उनकी फसल भीग गई है। सरकार पहले नमी की बात कहकर फसल खरीद नहीं रही है। अब भीग चुकी फसल को सुखाने के लिए उन्हें पता नहीं कितने दिन यहां बैठकर मशक्कत करनी होगी। बरसात में कुछ तिरपाल आढ़ती से मिली थी, बाकी का इंतजाम उन्होंने खुद घर से किया है लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ है।