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Ludhiana News: संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसानों ने लगाया धरना
Wed, 08 Oct 2025 09:57 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
Updated Wed, 08 Oct 2025 09:57 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बठिंडा। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां और विभिन्न किसान एवं अन्य जत्थेबंदियों के बैनर तले किसानों ने मिनी सचिवालय के पास बुधवार को धरना दिया। किसानों ने पंजाब और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
धरने को संबोधित करते हुए यूनियन नेता हरजिंदर सिंह, बलदेव सिंह व गुरदीप सिंह ने कहा कि पिछले दिनों पंजाब में बाढ़ से भारी तबाही हुई। भाखड़ा ब्यास मैनजमेंट बोर्ड की कोताही कारण डैम को समय से पहले भर दिया। उसके बाद बारिश आने पर सभी डैम से ज्यादा पानी छोड़कर करीब पांच लाख एकड़ कृषि जमीन एवं सैकड़ों घरों को बर्बाद कर दिया। किसानों ने आरोप लगाया कि धान की फसल मंडियों में आने के बावजूद सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई। व्यापारी किसानों को लूट रहे हैं। किसान नेताओं ने प्रशासनिक अधिकारी के जरिये पंजाब एवं केंद्र सरकार को मांग पत्र भेजा। इसमें मांग की कि बाढ़ की सुप्रीम कोर्ट के सीटिंग जज की अगुवाई में कमिशन बनाकर जांच करवाई जाए। दोषी पाए जाने पर कर्मियों एवं अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
किसानों ने मांग की कि पंजाब अंदर आई बाढ़ को केंद्र सरकार राष्ट्रीय आपदा घोषित करे। 25 हजार करोड़ रुपये का पैकेज पंजाब के लिए जारी किया जाए। नहर एवं रजवाहों की सफाई का काम जल्दी शुरू करवाया जाए। बाढ़ पीड़ित किसानों को 70 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाए। बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 25 लाख की मुआवजा राशि एवं परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। प्रति मकान को ठीक करवाने के लिए 10 लाख रुपये दिए जाएं।
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बठिंडा। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां और विभिन्न किसान एवं अन्य जत्थेबंदियों के बैनर तले किसानों ने मिनी सचिवालय के पास बुधवार को धरना दिया। किसानों ने पंजाब और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
धरने को संबोधित करते हुए यूनियन नेता हरजिंदर सिंह, बलदेव सिंह व गुरदीप सिंह ने कहा कि पिछले दिनों पंजाब में बाढ़ से भारी तबाही हुई। भाखड़ा ब्यास मैनजमेंट बोर्ड की कोताही कारण डैम को समय से पहले भर दिया। उसके बाद बारिश आने पर सभी डैम से ज्यादा पानी छोड़कर करीब पांच लाख एकड़ कृषि जमीन एवं सैकड़ों घरों को बर्बाद कर दिया। किसानों ने आरोप लगाया कि धान की फसल मंडियों में आने के बावजूद सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई। व्यापारी किसानों को लूट रहे हैं। किसान नेताओं ने प्रशासनिक अधिकारी के जरिये पंजाब एवं केंद्र सरकार को मांग पत्र भेजा। इसमें मांग की कि बाढ़ की सुप्रीम कोर्ट के सीटिंग जज की अगुवाई में कमिशन बनाकर जांच करवाई जाए। दोषी पाए जाने पर कर्मियों एवं अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
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किसानों ने मांग की कि पंजाब अंदर आई बाढ़ को केंद्र सरकार राष्ट्रीय आपदा घोषित करे। 25 हजार करोड़ रुपये का पैकेज पंजाब के लिए जारी किया जाए। नहर एवं रजवाहों की सफाई का काम जल्दी शुरू करवाया जाए। बाढ़ पीड़ित किसानों को 70 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाए। बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 25 लाख की मुआवजा राशि एवं परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। प्रति मकान को ठीक करवाने के लिए 10 लाख रुपये दिए जाएं।
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