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भुच्चो मंडी में डायरिया की चपेट में आए 30 लोग
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा
Updated Mon, 25 Jul 2016 06:15 PM IST
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- फोटो : getty images
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जिले की भुच्चोे मंडी में डायरिया ने अपना कहर बरपाते हुए 30 से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। इनमें सबसे ज्यादा 14 साल से कम उम्र के बच्चे हैं। इतने डायरिया के केस सामने आने पर सेहत विभाग में हड़कंप मच गया। विभाग ने तुरंत छह टीमों का गठन कर दिया।
वहीं रविवार को अपना इलाज करवाने के लिए सिविल अस्पताल पहुंचे मरीजों को डॉक्टर न मिलने से परेशान होकर प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ा। इसके चलते लोगों में सेहत विभाग के प्रति रोष पाया जा रहा है।
भुच्चो मंडी निवासी महिला जसप्रीत कौर और सोनू ने बताया कि वह कई दिनों से बुखार की चपेट में थे। रविवार को टेस्ट करवाने पर पता चला कि वह डायरिया से पीड़ित हैं। जब वह इलाज करवाने के लिए सिविल अस्पताल पहुंचे तो वहां पर एक स्टाफ नर्स के अलावा कोई डॉक्टर नहीं था।
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उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अलावा मंडी के तीस से अधिक लोग डायरिया से पीड़ित हैं, जो उनसे पहले इलाज करवाने सिविल अस्पताल आए थे। वहां पर कोई भी सेहत सुविधा न मिलने से वह भी वापस लौट गए। पीड़ितों का कहना था कि उन्होंने किसी तरह अस्पताल में डॉक्टर एसएस रोमाणा को बुलाया तो वह भी उन्होंने उन्हें ग्लूकोज की बोतल लगाकर उन्हें घर भेज दिया।
सिविल सर्जन डॉ. आरएस रंधावा का कहना है कि मामला उनके ध्यान में है, लेकिन विभाग की टीमों की ओर से पीड़ितों के घर जाकर उनको जरूरी सुविधा दी जा रही है।
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वहीं रविवार को अपना इलाज करवाने के लिए सिविल अस्पताल पहुंचे मरीजों को डॉक्टर न मिलने से परेशान होकर प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ा। इसके चलते लोगों में सेहत विभाग के प्रति रोष पाया जा रहा है।
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भुच्चो मंडी निवासी महिला जसप्रीत कौर और सोनू ने बताया कि वह कई दिनों से बुखार की चपेट में थे। रविवार को टेस्ट करवाने पर पता चला कि वह डायरिया से पीड़ित हैं। जब वह इलाज करवाने के लिए सिविल अस्पताल पहुंचे तो वहां पर एक स्टाफ नर्स के अलावा कोई डॉक्टर नहीं था।
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उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अलावा मंडी के तीस से अधिक लोग डायरिया से पीड़ित हैं, जो उनसे पहले इलाज करवाने सिविल अस्पताल आए थे। वहां पर कोई भी सेहत सुविधा न मिलने से वह भी वापस लौट गए। पीड़ितों का कहना था कि उन्होंने किसी तरह अस्पताल में डॉक्टर एसएस रोमाणा को बुलाया तो वह भी उन्होंने उन्हें ग्लूकोज की बोतल लगाकर उन्हें घर भेज दिया।
सिविल सर्जन डॉ. आरएस रंधावा का कहना है कि मामला उनके ध्यान में है, लेकिन विभाग की टीमों की ओर से पीड़ितों के घर जाकर उनको जरूरी सुविधा दी जा रही है।