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लुधियाना में बोले धीरेंद्र शास्त्री: देश में नहीं चलने देंगे मतांतरण का काला बाजार, सुनी भक्तों की समस्याएं

Tue, 29 Sep 2026 08:52 AM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना Published by: Nivedita Updated Tue, 29 Sep 2026 08:52 AM IST
सार

धीरेंद्र शास्त्री ने पंजाब की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य में लोगों को बहला-फुसलाकर मतांतरण कराया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी धर्म के खिलाफ नहीं हैं लेकिन भय या लालच दिखाकर मतांतरण कराना गलत है।

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Dhirendra Shastri in Ludhiana Won't allow black market of religious conversion in country
धीरेंद्र शास्त्री - फोटो : संवाद

विस्तार

लुधियाना में मंगलम वेलफेयर एंड चैरिटेबल सोसाइटी की ओर से ग्लाडा ग्राउंड में आयोजित श्री हनुमंत कथा के तीसरे दिन बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का दिव्य दरबार सजा। इस दौरान उन्होंने भक्तों की समस्याएं सुनीं और मतांतरण के खिलाफ तीखे बयान दिए। शास्त्री ने कहा कि वे देश में मतांतरण का काला बाजार नहीं चलने देंगे।

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दिव्य दरबार की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना, वैदिक मंत्रोच्चारण और भव्य आरती के साथ हुई। धीरेंद्र शास्त्री ने पर्चियां निकालकर भक्तों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने बाला जी की कृपा से उनका समाधान किया। उन्होंने सभी को अपना जीवन प्रभु चरणों में समर्पित करने का संकल्प दिलाया। शास्त्री ने स्पष्ट किया कि दरबार का मकसद चमत्कार दिखाना नहीं है। इसका ध्येय जन-जन को बाला जी से जोड़ना है। उन्होंने भक्तों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि लाखों की बिगड़ी बनी है, तो उनकी भी अवश्य बनेगी। उन्होंने विरोधी संस्थाओं और दुष्प्रचार करने वालों को भी जवाब दिया।
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धीरेंद्र शास्त्री ने पंजाब की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य में लोगों को बहला-फुसलाकर मतांतरण कराया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी धर्म के खिलाफ नहीं हैं लेकिन भय या लालच दिखाकर मतांतरण कराना गलत है। सनातनियों को जागृत करते हुए उन्होंने कहा कि बजरंग बाबा की शरण में जाने से ही कल्याण संभव है। उन्होंने हुंकार भरी कि जब तक उनके प्राण हैं, वे देश में मतांतरण का काला बाजार नहीं चलने देंगे।
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गुरुद्वारों की सेवा परंपरा से प्रेरणा लें
शास्त्री ने सनातन, गुरु और सिख परंपरा को सर्वोच्च बताया। उन्होंने कहा कि इनमें हर संकट का सामना करने की सामर्थ्य है। उन्होंने सनातनियों का आह्वान किया कि मंदिरों में भक्ति के साथ सेवा का भी समावेश होना चाहिए। गुरुद्वारों से प्रेरणा लेते हुए मंदिरों में अस्पताल बनने चाहिए। इससे श्रद्धालुओं को दवा और कृपा दोनों एक साथ मिल सकें। उन्होंने अपने जीवन का उदाहरण दिया कि जिस गांव में वे भिक्षा मांगते थे, आज वहां अन्नपूर्णा रसोई चल रही है।


कथा के आध्यात्मिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जिसके जीवन में संत या गुरु का आगमन होता है, उसका जीवन बसंत की तरह खिल उठता है। केवल भेष धारण करने से कोई संत नहीं बनता। श्रेष्ठ आचरण ही संतता की पहचान है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को परमात्मा के चरण और महात्मा के आचरण को धारण करना चाहिए। शास्त्री ने कहा, खोजने से नहीं, बल्कि प्रभु भक्ति में खो जाने से सफलता मिलती है।

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