{"_id":"84684f77f70bad58bedf5713ba141bfc","slug":"dead-crime","type":"story","status":"publish","title_hn":"शैलर परिवार की सामूहिक आत्महत्या के मामले की सुलझी गुत्थी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शैलर परिवार की सामूहिक आत्महत्या के मामले की सुलझी गुत्थी
अमर उजाला, समाना।
Updated Sun, 02 Mar 2014 09:53 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला के एसएसपी हरदयाल सिंह मान ने करीब चार माह पहले एक शैलर मालिक, उसकी पत्नी और पुत्र की ओर से सामूहिक तौर पर आत्महत्या करने के मामले की गुत्थी सुलझा ली है। इन आत्महत्याओं के लिए मुख्य तौर पर आरोपी भूषण कुमार निवासी दिड़बा को हिरासत में लेकर जांच पड़ताल के बाद मामले की असली कहानी सामने आई है।
मान ने बताया कि गत छह नवंबर 2013 को समाना की भवानीगढ़ रोड़ पर स्थित सिंधू राइश मिल के हिस्सेदार कंवलजीत सिंह, पत्नी कुलदीप कौर और उसके पुत्र विक्रम सिंह ने अपने शैलर के नजदीक ही एक जामुन के पेड़ से सामूहिक तौर पर फंदा लगा कर आत्महत्या कर ली थी।
जिसके बाद मृतकों के रिश्तेदार सुखविंदर सिंह की शिकायत पर पुलिस ने मृतक कंवलजीत सिंह के भाई हरजीत सिंह, भतीजे हरविंदर सिंह उर्फ बब्बू, जसकरण सिंह, भाभी गुरदीप कौर और बहु मनप्रीत कौर, कुलदीप कौर और बलजीत कौर के खिलाफ मामला दर्ज कर किया। पुलिस ने मृतक की जेब से मिले अलग अलग सुसाइड नोट के आधार पर कार्रवाई शुरू की दी थी। उन्हाेंने बताया कि मृतकों ने सुसाइड नोट में आरोप लगाया था कि हरविंदर सिंह उनके 60 लाख रुपये लेकर फरार हो गया है।
विज्ञापन
पुलिस ने हरविंदर सिंह के फरार होने के बाद उसे दस फरवरी को हिरासत में लिया। हरविंदर सिंह से पूछताछ के बाद मामले की असली कहानी सामने आई। एसएसपी मान ने बताया कि जांच में पता चला कि मृतकों ने 12 अक्टूबर 2013 में शैलर का सौदा 60 लाख रुपये में गुरदर्शन सिंह निवासी गांव कादराबाद से किया था। जिसके बदले उन्होंने 20 लाख रुपये बतौर ब्याना लिया था। रजिस्ट्ररी की तारीख 18 नवंबर 2013 तय की गई थी। लेकिन इसी दौरान कंवलजीत सिंह ने 15 अक्तूबर 2013 को इसी शैलर का सौदा 35 लाख रुपये में भूषण कुमार से तय कर लिया। जिसके बाद भूषण कुमार ने सौदे को लिखित कर कंवलजीत सिंह को भरोसे में लेकर कोई पैसा नहीं दिया।
बल्कि इस भरोसे का फायदा उठाते शैलर पर बैंक का कर्ज चुकाने के नाम पर भूषण कुमार ने कंवलजीत सिंह से साढे़ 22 लाख रुपये भी ले लिए, ताकि वह खुद बैंक का कर्ज उतार सके। लेकिन इसी दौरान कंवलजीत सिंह के भतीजे हरविंदर सिंह उर्फ बब्बू ने दूसरी शादी रचा ली और वह अपनी दूसरी पत्नी को लेकर घर से भाग गया। जिसका फायदा उठाते हुए भूषण कुमार ने एक साजिश के तहत कंवलजीत सिंह को यह कह दिया कि वह हरविंदर सिंह के साथ बैंक में 60 लाख रुपये जमा कराने जा रहा था और हरविंदर सिंह 60 लाख रुपये लेकर फरार हो गया।
जिसका सदमा कंवलजीत सिंह और उसका परिवार सहन नही कर सका और उन्होंने सामूहिक आत्महत्या कर ली। इसके बाद भूषण कुमार ने साजिश के मुताबिक हरविंदर सिंह से भी संपर्क रखा। पुलिस ने हरविंदर सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद पता चला कि वह पैसे लेकर नहीं भागा है। साजिश के मुताबिक आरोपी भूषण कुमार हरविंदर सिंह को विश्वास में लेकर शैलर पर भी कब्जा करना चाहता था। लेकिन हरविंदर सिंह ने पुलिस को सारी कहानी बता दी और भूषण कुमार को पुलिस ने हिरासत में लेकर उससे 17 लाख 50 हजार रुपये भी बरामद किए है।
विज्ञापन
मान ने बताया कि गत छह नवंबर 2013 को समाना की भवानीगढ़ रोड़ पर स्थित सिंधू राइश मिल के हिस्सेदार कंवलजीत सिंह, पत्नी कुलदीप कौर और उसके पुत्र विक्रम सिंह ने अपने शैलर के नजदीक ही एक जामुन के पेड़ से सामूहिक तौर पर फंदा लगा कर आत्महत्या कर ली थी।
विज्ञापन
जिसके बाद मृतकों के रिश्तेदार सुखविंदर सिंह की शिकायत पर पुलिस ने मृतक कंवलजीत सिंह के भाई हरजीत सिंह, भतीजे हरविंदर सिंह उर्फ बब्बू, जसकरण सिंह, भाभी गुरदीप कौर और बहु मनप्रीत कौर, कुलदीप कौर और बलजीत कौर के खिलाफ मामला दर्ज कर किया। पुलिस ने मृतक की जेब से मिले अलग अलग सुसाइड नोट के आधार पर कार्रवाई शुरू की दी थी। उन्हाेंने बताया कि मृतकों ने सुसाइड नोट में आरोप लगाया था कि हरविंदर सिंह उनके 60 लाख रुपये लेकर फरार हो गया है।
विज्ञापन
पुलिस ने हरविंदर सिंह के फरार होने के बाद उसे दस फरवरी को हिरासत में लिया। हरविंदर सिंह से पूछताछ के बाद मामले की असली कहानी सामने आई। एसएसपी मान ने बताया कि जांच में पता चला कि मृतकों ने 12 अक्टूबर 2013 में शैलर का सौदा 60 लाख रुपये में गुरदर्शन सिंह निवासी गांव कादराबाद से किया था। जिसके बदले उन्होंने 20 लाख रुपये बतौर ब्याना लिया था। रजिस्ट्ररी की तारीख 18 नवंबर 2013 तय की गई थी। लेकिन इसी दौरान कंवलजीत सिंह ने 15 अक्तूबर 2013 को इसी शैलर का सौदा 35 लाख रुपये में भूषण कुमार से तय कर लिया। जिसके बाद भूषण कुमार ने सौदे को लिखित कर कंवलजीत सिंह को भरोसे में लेकर कोई पैसा नहीं दिया।
बल्कि इस भरोसे का फायदा उठाते शैलर पर बैंक का कर्ज चुकाने के नाम पर भूषण कुमार ने कंवलजीत सिंह से साढे़ 22 लाख रुपये भी ले लिए, ताकि वह खुद बैंक का कर्ज उतार सके। लेकिन इसी दौरान कंवलजीत सिंह के भतीजे हरविंदर सिंह उर्फ बब्बू ने दूसरी शादी रचा ली और वह अपनी दूसरी पत्नी को लेकर घर से भाग गया। जिसका फायदा उठाते हुए भूषण कुमार ने एक साजिश के तहत कंवलजीत सिंह को यह कह दिया कि वह हरविंदर सिंह के साथ बैंक में 60 लाख रुपये जमा कराने जा रहा था और हरविंदर सिंह 60 लाख रुपये लेकर फरार हो गया।
जिसका सदमा कंवलजीत सिंह और उसका परिवार सहन नही कर सका और उन्होंने सामूहिक आत्महत्या कर ली। इसके बाद भूषण कुमार ने साजिश के मुताबिक हरविंदर सिंह से भी संपर्क रखा। पुलिस ने हरविंदर सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद पता चला कि वह पैसे लेकर नहीं भागा है। साजिश के मुताबिक आरोपी भूषण कुमार हरविंदर सिंह को विश्वास में लेकर शैलर पर भी कब्जा करना चाहता था। लेकिन हरविंदर सिंह ने पुलिस को सारी कहानी बता दी और भूषण कुमार को पुलिस ने हिरासत में लेकर उससे 17 लाख 50 हजार रुपये भी बरामद किए है।