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पैरोल पर गए साढ़े तीन सौ कैदी नहीं लौटे
ब्यूरो/अमर उजाला, बरनाला
Updated Tue, 10 May 2016 06:05 PM IST
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जेल
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राज्य सरकार व डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने जेलों से अपना धंधा चला रहे गैंगस्टरों पर पैनी नजर रखनी और बाहर उनके साथियों की धरपकड़ शुरू कर दी है। जेलों में चल रहे मोबाइल फोन इत्यादि को भी पकड़ा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर राज्य की जेलों से पैरोल पर छुट्टी पर पैरोल गए 350 कैदी वापस जेलों में ही नहीं लौटे। यह काफी खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि ऐसे अपराधी फिरौती लेकर या गैंगस्टरों से मिलकर किसी भी अप्रिय घटना को अंजाम दे सकते हैं।
किसी भी केस में लंबी सजा पा चुके कैदी को पैरोल पर छुट्टी जाने का प्रावधान होता है। इस कानून के तहत हरेक कैदी जो किसी भी जेल में बंद है, वर्ष में दो बार पैरोल पर अपने घर छुट्टी जा सकता है।
खेतीबाड़ी करने वाले अपराधी किसान अपनी फसल के लिए वर्ष में दो बार 45-45 दिन की पैरोल ले सकते हैं। या फिर घरेलू जरूरत के मुताबिक बच्चे के विवाह या किसी पारिवारिक या रिश्तेदार की मौत होने पर छुट्टी ले सकते हैं। हालांकि कुछ कैदी ऐसे भी होते हैं जो पेरोल पर छुट्टी आने के बाद वापस जेल नहीं जाते व गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त हो जाते हैं।
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आरटीआई एक्ट के तहत मिली सूचना के तहत राज्य की 26 जेलों में बंद कैदियों में से 350 कैदी पैरोल पर गए और लौटे नहीं, जिनकी तलाश जारी है। इनमें से कई कैदी गंभीर अपराध में शामिल हैं। पैरोल पर गए उक्त कैदियों का जेल में न लौटना चिंता का विषय है। बरनाला जेल के पांच कैदी फरार हैं। वे पैरोल पर छुट्टी लेकर गए थे और लौटे नहीं।
वापसी की जिम्मेवारी किसी पर तय की जाए : सतपाल
आरटीआई कार्यकर्ता सतपाल निवासी तपा मंडी के मुताबिक अमन-कानून की स्थिति बनाए रखने के लिए और अप्रिय घटनाओं से बचने के लिए इन कैदियों की जेल वापसी अति जरूरी है। ऐसा प्रावधान भी होना चाहिए की कैदियों को पैरोल पर छुट्टी भेजने के समय उनकी वापसी की जिम्मेवारी किसी पर तय की जाए। तो ही जुर्म में कमी लाकर राज्य में अमन शांति बरकरार रखी जा सकती है।
हमारी जेल में से पांच कैदी पैरोल पर छुट्टी गए थे जो नहीं लौटे। उनकी तलाश के लिए हर संभव यत्न किए जा रहे हैं।
- कुलवंत सिंह, सुपरिंटेंडेंट, बरनाला जेल
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किसी भी केस में लंबी सजा पा चुके कैदी को पैरोल पर छुट्टी जाने का प्रावधान होता है। इस कानून के तहत हरेक कैदी जो किसी भी जेल में बंद है, वर्ष में दो बार पैरोल पर अपने घर छुट्टी जा सकता है।
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खेतीबाड़ी करने वाले अपराधी किसान अपनी फसल के लिए वर्ष में दो बार 45-45 दिन की पैरोल ले सकते हैं। या फिर घरेलू जरूरत के मुताबिक बच्चे के विवाह या किसी पारिवारिक या रिश्तेदार की मौत होने पर छुट्टी ले सकते हैं। हालांकि कुछ कैदी ऐसे भी होते हैं जो पेरोल पर छुट्टी आने के बाद वापस जेल नहीं जाते व गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त हो जाते हैं।
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आरटीआई एक्ट के तहत मिली सूचना के तहत राज्य की 26 जेलों में बंद कैदियों में से 350 कैदी पैरोल पर गए और लौटे नहीं, जिनकी तलाश जारी है। इनमें से कई कैदी गंभीर अपराध में शामिल हैं। पैरोल पर गए उक्त कैदियों का जेल में न लौटना चिंता का विषय है। बरनाला जेल के पांच कैदी फरार हैं। वे पैरोल पर छुट्टी लेकर गए थे और लौटे नहीं।
वापसी की जिम्मेवारी किसी पर तय की जाए : सतपाल
आरटीआई कार्यकर्ता सतपाल निवासी तपा मंडी के मुताबिक अमन-कानून की स्थिति बनाए रखने के लिए और अप्रिय घटनाओं से बचने के लिए इन कैदियों की जेल वापसी अति जरूरी है। ऐसा प्रावधान भी होना चाहिए की कैदियों को पैरोल पर छुट्टी भेजने के समय उनकी वापसी की जिम्मेवारी किसी पर तय की जाए। तो ही जुर्म में कमी लाकर राज्य में अमन शांति बरकरार रखी जा सकती है।
हमारी जेल में से पांच कैदी पैरोल पर छुट्टी गए थे जो नहीं लौटे। उनकी तलाश के लिए हर संभव यत्न किए जा रहे हैं।
- कुलवंत सिंह, सुपरिंटेंडेंट, बरनाला जेल