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चालीस लाख का कर्ज था, मौसेरे भाई को अगवा किया
ब्यूरो/अमर उजाला, जगरांव (लुधियाना)
Updated Mon, 02 May 2016 10:00 PM IST
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गांव ढैपई से 28 अप्रैल की रात को होटल मालिक के अपहरण और फिरौती लेकर छोड़ने के मामले को पुलिस ने 48 घंटे में सुलझाने का दावा किया है। पुलिस ने तीन अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि फिरौती की तीस लाख की रकम में से 29 लाख रुपये बरामद कर लिए गए हैं। मुख्य आरोपी होटल मालिक की मौसी का बेटा है। डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने इस केस को सुलझाने वाले अधिकारियों को सर्टिफिकेट और हवलदार हरप्रीत सिंह, सिपाही नवजोत सिंह और गुरप्रीत सिंह को अगले रैंक की तरक्की दी है।
जानकारी के अनुसार होटल मालिक रंजीत सिंह को 28 अप्रैल की देर शाम कुछ युवकों ने अपहरण कर लिया था। इसके बाद डेढ़ करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की गई। अपहरणकर्ताओं ने रंजीत सिंह को 29 अप्रैल की रात को छोड़ दिया था। थाना जोधां में मामला दर्ज कर पुलिस ने छानबीन शुरू की थी। सोमवार को आईजी लोक नाथ अंगारा ने जगरांव में केस सुलझाने का दावा किया।
जांच में सामने आया कि रंजीत को तीस लाख रुपये की फिरौती देकर रिहा कराया गया। रंजीत से पूछताछ में अपहरणकर्ताओं की संख्या और उनके हुलिया के बारे में जानकारी ली गई। एसएसपी उपिंदरजीत सिंह ने टीमें बनाकर छापामारी की और रविवार को एक आरोपी गुरजंट सिंह को खमाणों से काबू कर लिया।
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मनदीप सिंह पुत्र गुरमेल सिंह निवासी गांव पंडोरी, महल कलां और डॉ. मनदीप सिंह निवासी छापा को दो मई को काबू कर लिया गया। पूछताछ में आरोपी मनदीप सिंह ने कबूल किया है कि एनआरआई हरदीप के भाई रंजीत को पैसे के लिए अगवा किया गया था।
सारी साजिश मनदीप ने ही अपने साथियों के साथ रची थी। उसे पता था कि रंजीत के बदले मोटी रकम मिल सकती है। उन्होंने डेढ़ करोड़ की मांग की थी, लेकिन हरदीप ने तीस लाख रुपये देकर रंजीत को छुड़वा लिया। मनदीप ने माना कि उसने 40 लाख रुपये बैंक, आढ़ती और अन्य लोगों का कर्ज देना है। इसी वजह से उसने अपने साथियों के साथ मिलकर अपहरण की योजना बनाई।
पुलिस ने आरोपी मनदीप सिंह से दस लाख रुपये, वारदात में उपयोग की गई स्कारपियो गाड़ी, गुरजंट सिंह ने 9.45 लाख रुपये, मोटरसाइकिल और डा. मनदीप सिंह से 9.45 लाख रुपये (कुल 28.90 लाख रुपये) बरामद किए हैं।
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जानकारी के अनुसार होटल मालिक रंजीत सिंह को 28 अप्रैल की देर शाम कुछ युवकों ने अपहरण कर लिया था। इसके बाद डेढ़ करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की गई। अपहरणकर्ताओं ने रंजीत सिंह को 29 अप्रैल की रात को छोड़ दिया था। थाना जोधां में मामला दर्ज कर पुलिस ने छानबीन शुरू की थी। सोमवार को आईजी लोक नाथ अंगारा ने जगरांव में केस सुलझाने का दावा किया।
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जांच में सामने आया कि रंजीत को तीस लाख रुपये की फिरौती देकर रिहा कराया गया। रंजीत से पूछताछ में अपहरणकर्ताओं की संख्या और उनके हुलिया के बारे में जानकारी ली गई। एसएसपी उपिंदरजीत सिंह ने टीमें बनाकर छापामारी की और रविवार को एक आरोपी गुरजंट सिंह को खमाणों से काबू कर लिया।
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मनदीप सिंह पुत्र गुरमेल सिंह निवासी गांव पंडोरी, महल कलां और डॉ. मनदीप सिंह निवासी छापा को दो मई को काबू कर लिया गया। पूछताछ में आरोपी मनदीप सिंह ने कबूल किया है कि एनआरआई हरदीप के भाई रंजीत को पैसे के लिए अगवा किया गया था।
सारी साजिश मनदीप ने ही अपने साथियों के साथ रची थी। उसे पता था कि रंजीत के बदले मोटी रकम मिल सकती है। उन्होंने डेढ़ करोड़ की मांग की थी, लेकिन हरदीप ने तीस लाख रुपये देकर रंजीत को छुड़वा लिया। मनदीप ने माना कि उसने 40 लाख रुपये बैंक, आढ़ती और अन्य लोगों का कर्ज देना है। इसी वजह से उसने अपने साथियों के साथ मिलकर अपहरण की योजना बनाई।
पुलिस ने आरोपी मनदीप सिंह से दस लाख रुपये, वारदात में उपयोग की गई स्कारपियो गाड़ी, गुरजंट सिंह ने 9.45 लाख रुपये, मोटरसाइकिल और डा. मनदीप सिंह से 9.45 लाख रुपये (कुल 28.90 लाख रुपये) बरामद किए हैं।