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तीहरा हत्याकांड : दो साल से बहन और जीजा को बना रहा था टारगेट
Updated Sun, 19 Aug 2018 10:13 PM IST
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दो साल से बहन और जीजा थे टारगेट पर
तीहरा हत्याकांड : चार महीने से हथियार लेकर ताक में था आरोपी
तीनों हत्याओं के लिए तीन हथियारों का किया इस्तेमाल
जीजा दविंदर को घर खराब होने का जिम्मेदार मानता था आरोपी
विकास मल्होत्रा
लुधियाना। किशोर नगर इलाके में दिन दिहाड़े अपनी बहन और उसके दोहता-दोहती को मौत के घाट उतारने वाला आरोपी दो साल से अपनी बहन और जीजा को टारगेट पर बनाए हुए था। आरोपी दंपति को मौत के घाट उतारने के लिए इतनी जल्दी में था कि पिछले चार महीने से लगातार अपने पास हथियार रखे हुए था। तीन अगस्त को आरोपी को मौका मिला, लेकिन उसका जीजा घर से चला गया और आरोपी ने बहन को तो मौत के घाट उतार दिया। लेकिन घर से जाने के कारण उसका जीजा बाल बाल बच गया। लेकिन उसने दोनों बच्चों को भी मार डाला। आरोपी ने तीनों की हत्या करने के लिए तीन अलग अलग हथियारों का इस्तेमाल किया। जिसमें हथौड़ा, कटर और नाड़ा शामिल है। पुलिस आरोपी से पूछताछ करने में जुटी हुई है। उम्मीद है कि आरोपी से कई ओर भी खुलासे होने की उम्मीद है।
भगोड़ा होने के बाद बदल लिया नाम
पुलिस कमिश्नर डॉ. सुखचैन सिंह गिल ने बताया कि आरोपी राजविंदर सिंह का असली नाम रविंदर सिंह बक्शी था। वह अपने पिता के साथ पहले हरचरण नगर में फिर बाद में गुरु अर्जुन देव नगर इलाके में रहने लगा। उसकी 1997 में शादी हुई और पत्नी को तंग परेशान करने और दहेज की मांग को लेकर उसके खिलाफ वर्ष 2000 में मामला दर्ज हो हुआ था। पेशी पर न जाने की वजह से आरोपी अदालत से भगोड़ा हो गया। वह फरार होकर अमृतसर में रहने लगा। वहां उसने अपना नाम रविंदर सिंह बक्शी से बदल कर राजविंदर सिंह रख लिया। राजविंदर रखने के बाद उसने अपने पहचान पत्र भी राजविंदर के नाम से बनवा लिए। जिसके बाद वह काफी समय तक अमृतसर में ही रहा और किसी को कुछ पता नहीं चला।
पहली शादी का पता चला तो टूटी दूसरी शादी
नाम बदलने के बाद आरोपी राजविंदर सिंह काफी समय तक अमृतसर में रहा और उसने वहीं पर शादी कर ली। शादी के बाद कुछ समय अमृतसर में रहने के बाद वह दूसरी पत्नी को लेकर दिल्ली चला गया। दिल्ली से वह मुंबई रहने के लिए चला गया। काफी समय तक वहां मेहनत मजदूरी की। इसी दौरान उसकी दूसरी पत्नी को पता चला कि वह शादीशुदा है और उसने किसी को बताया नहीं। इससे वह नाराज होकर उसे छोड़कर मायके में रहने लगी। जिसके बाद वह काफी परेशान हो गया। करीब आठ साल इधर उधर भटकने के बाद वह फिर लुधियाना आया और सीधे बहन गुरविंदर कौर के पास गया और वहीं रहने लगा।
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घर खराब होने के पीछे जीजा दविंदर को मानता था जिम्मेदार
पुलिस के अनुसार आरोपी राजविंदर सिंह अपना घर खराब होने के पीछे अपने जीजा दविंदर सिंह को जिम्मेदार मानता था। वह सोचता था कि दविंदर सिंह ने ही उसकी दूसरी पत्नी को उसकी पहली शादी और उसके खिलाफ दर्ज हुए दहेज उत्पीड़न के मामले बताए। जिस कारण उसकी दूसरी पत्नी उसे छोड़कर चली गई। वहां से उसने अपने जीजा दविंदर और बहन गुरविंदर कौर की हत्या करने की ठान ली। जिसके बाद वह दो साल पहले उनके घर आ गया। वह वहीं रहने लगा और चौड़ा बाजार में काम करने लगा। इसके बाद उसने दविंदर के घर के पीछे वाली एक कमरा किराए पर ले लिया। चौड़ा बाजार में कुछ समय नौकरी करने के बाद दुकानदार ने उसे निकाल दिया और वह फिर बेरोजगार हो गया। मकान मालिक ने भी किराया न देने पर मकान खाली करने को कह दिया था। जिस कारण वह अपने जीजा के पीछे हाथ धो कर पड़ा गया था।
बहन को मारने के बाद जीजा का किया इंतजार, बच्चे आए तो उनको मार डाला
पिछले चार महीने से तो वह हमेशा हथौड़ा अपने साथ ही रख रहा था, ताकि जब भी मौका लगा तो दोनों को मौत के घाट उतार दे। वारदात के दिन उसने दविंदर के दामाद को किसी जगह काम से भेज दिया, जबकि उसकी बेटी को दूसरी जगह भेज दिया। पीछे से दविंदर सिंह और उसकी पत्नी घर में अकेली थी। जब वह हथियार लेकर घर पहुंचा तो दविंदर सिंह काम से जा चुका था। घर पर गुरविंदर अकेली थी। उसने अपनी बहन के सिर पर हथौड़ा मारा। उसने समझा की गुरविंदर मर चुकी है, लेकिन कुछ समय रुकने के बाद वह होश में आ गई। आरोपी ने गुरविंदर के हाथ बांधे और उसे घसीटते हुए नीचे वाले कमरे में ले आया और उसकी हत्या कर दी। आरोपी ने सीढ़ियाें और ऊपर सारा खून साफ किया और दविंदर सिंह का इंतजार करने लगा ताकि उसे भी मौत के घाट उतार। इसी दौरान दविंदर का दोहता आ गया तो उसने खून देख लिया। जब वह चिल्लाता आरोपी ने कटर के साथ उसका गला रेत दिया और मौत के घाट उतार कर उसका शव भी कमरे में रख दिया। इसी दौरान ऊपर से बच्ची भी घर पहुंच गई। जब बच्ची ने खून देखा तो आरोपी ने उसे भी मौत के घाट उतार दिया। काफी समय तक दविंदर नहीं आया तो आरोपी बाहर से दरवाजा बंद कर फरार हो गया।
कभी अमृतसर तो कभी हनुमानगढ़ में रह रहा था आरोपी
पुलिस कमिश्नर डॉ. सुखचैन सिंह नेबताया कि हत्या के बाद आरोपी अमृतसर फरार हो गया। वहां कुछ समय रहने के बाद वहां से बसें बदलकर वह हनुमानगढ़ पहुंच गया। वहां कुछ समय रहने के बाद वह संगरूर आ गया। उसके दिमाग में आया कि दविंदर सिंह को मौत के घाट उतार नहीं पाया तो उसने दविंदर को फोन कर धमकियां दी कि वह उसे भी मौत के घाट उतार देगा। जिसके बाद पुलिस ने नंबर की जांच की और आरोपी को संगरूर की धर्मशाला से गिरफ्तार किया।
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तीहरा हत्याकांड : चार महीने से हथियार लेकर ताक में था आरोपी
तीनों हत्याओं के लिए तीन हथियारों का किया इस्तेमाल
जीजा दविंदर को घर खराब होने का जिम्मेदार मानता था आरोपी
विकास मल्होत्रा
लुधियाना। किशोर नगर इलाके में दिन दिहाड़े अपनी बहन और उसके दोहता-दोहती को मौत के घाट उतारने वाला आरोपी दो साल से अपनी बहन और जीजा को टारगेट पर बनाए हुए था। आरोपी दंपति को मौत के घाट उतारने के लिए इतनी जल्दी में था कि पिछले चार महीने से लगातार अपने पास हथियार रखे हुए था। तीन अगस्त को आरोपी को मौका मिला, लेकिन उसका जीजा घर से चला गया और आरोपी ने बहन को तो मौत के घाट उतार दिया। लेकिन घर से जाने के कारण उसका जीजा बाल बाल बच गया। लेकिन उसने दोनों बच्चों को भी मार डाला। आरोपी ने तीनों की हत्या करने के लिए तीन अलग अलग हथियारों का इस्तेमाल किया। जिसमें हथौड़ा, कटर और नाड़ा शामिल है। पुलिस आरोपी से पूछताछ करने में जुटी हुई है। उम्मीद है कि आरोपी से कई ओर भी खुलासे होने की उम्मीद है।
भगोड़ा होने के बाद बदल लिया नाम
पुलिस कमिश्नर डॉ. सुखचैन सिंह गिल ने बताया कि आरोपी राजविंदर सिंह का असली नाम रविंदर सिंह बक्शी था। वह अपने पिता के साथ पहले हरचरण नगर में फिर बाद में गुरु अर्जुन देव नगर इलाके में रहने लगा। उसकी 1997 में शादी हुई और पत्नी को तंग परेशान करने और दहेज की मांग को लेकर उसके खिलाफ वर्ष 2000 में मामला दर्ज हो हुआ था। पेशी पर न जाने की वजह से आरोपी अदालत से भगोड़ा हो गया। वह फरार होकर अमृतसर में रहने लगा। वहां उसने अपना नाम रविंदर सिंह बक्शी से बदल कर राजविंदर सिंह रख लिया। राजविंदर रखने के बाद उसने अपने पहचान पत्र भी राजविंदर के नाम से बनवा लिए। जिसके बाद वह काफी समय तक अमृतसर में ही रहा और किसी को कुछ पता नहीं चला।
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पहली शादी का पता चला तो टूटी दूसरी शादी
नाम बदलने के बाद आरोपी राजविंदर सिंह काफी समय तक अमृतसर में रहा और उसने वहीं पर शादी कर ली। शादी के बाद कुछ समय अमृतसर में रहने के बाद वह दूसरी पत्नी को लेकर दिल्ली चला गया। दिल्ली से वह मुंबई रहने के लिए चला गया। काफी समय तक वहां मेहनत मजदूरी की। इसी दौरान उसकी दूसरी पत्नी को पता चला कि वह शादीशुदा है और उसने किसी को बताया नहीं। इससे वह नाराज होकर उसे छोड़कर मायके में रहने लगी। जिसके बाद वह काफी परेशान हो गया। करीब आठ साल इधर उधर भटकने के बाद वह फिर लुधियाना आया और सीधे बहन गुरविंदर कौर के पास गया और वहीं रहने लगा।
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घर खराब होने के पीछे जीजा दविंदर को मानता था जिम्मेदार
पुलिस के अनुसार आरोपी राजविंदर सिंह अपना घर खराब होने के पीछे अपने जीजा दविंदर सिंह को जिम्मेदार मानता था। वह सोचता था कि दविंदर सिंह ने ही उसकी दूसरी पत्नी को उसकी पहली शादी और उसके खिलाफ दर्ज हुए दहेज उत्पीड़न के मामले बताए। जिस कारण उसकी दूसरी पत्नी उसे छोड़कर चली गई। वहां से उसने अपने जीजा दविंदर और बहन गुरविंदर कौर की हत्या करने की ठान ली। जिसके बाद वह दो साल पहले उनके घर आ गया। वह वहीं रहने लगा और चौड़ा बाजार में काम करने लगा। इसके बाद उसने दविंदर के घर के पीछे वाली एक कमरा किराए पर ले लिया। चौड़ा बाजार में कुछ समय नौकरी करने के बाद दुकानदार ने उसे निकाल दिया और वह फिर बेरोजगार हो गया। मकान मालिक ने भी किराया न देने पर मकान खाली करने को कह दिया था। जिस कारण वह अपने जीजा के पीछे हाथ धो कर पड़ा गया था।
बहन को मारने के बाद जीजा का किया इंतजार, बच्चे आए तो उनको मार डाला
पिछले चार महीने से तो वह हमेशा हथौड़ा अपने साथ ही रख रहा था, ताकि जब भी मौका लगा तो दोनों को मौत के घाट उतार दे। वारदात के दिन उसने दविंदर के दामाद को किसी जगह काम से भेज दिया, जबकि उसकी बेटी को दूसरी जगह भेज दिया। पीछे से दविंदर सिंह और उसकी पत्नी घर में अकेली थी। जब वह हथियार लेकर घर पहुंचा तो दविंदर सिंह काम से जा चुका था। घर पर गुरविंदर अकेली थी। उसने अपनी बहन के सिर पर हथौड़ा मारा। उसने समझा की गुरविंदर मर चुकी है, लेकिन कुछ समय रुकने के बाद वह होश में आ गई। आरोपी ने गुरविंदर के हाथ बांधे और उसे घसीटते हुए नीचे वाले कमरे में ले आया और उसकी हत्या कर दी। आरोपी ने सीढ़ियाें और ऊपर सारा खून साफ किया और दविंदर सिंह का इंतजार करने लगा ताकि उसे भी मौत के घाट उतार। इसी दौरान दविंदर का दोहता आ गया तो उसने खून देख लिया। जब वह चिल्लाता आरोपी ने कटर के साथ उसका गला रेत दिया और मौत के घाट उतार कर उसका शव भी कमरे में रख दिया। इसी दौरान ऊपर से बच्ची भी घर पहुंच गई। जब बच्ची ने खून देखा तो आरोपी ने उसे भी मौत के घाट उतार दिया। काफी समय तक दविंदर नहीं आया तो आरोपी बाहर से दरवाजा बंद कर फरार हो गया।
कभी अमृतसर तो कभी हनुमानगढ़ में रह रहा था आरोपी
पुलिस कमिश्नर डॉ. सुखचैन सिंह नेबताया कि हत्या के बाद आरोपी अमृतसर फरार हो गया। वहां कुछ समय रहने के बाद वहां से बसें बदलकर वह हनुमानगढ़ पहुंच गया। वहां कुछ समय रहने के बाद वह संगरूर आ गया। उसके दिमाग में आया कि दविंदर सिंह को मौत के घाट उतार नहीं पाया तो उसने दविंदर को फोन कर धमकियां दी कि वह उसे भी मौत के घाट उतार देगा। जिसके बाद पुलिस ने नंबर की जांच की और आरोपी को संगरूर की धर्मशाला से गिरफ्तार किया।