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नगर सुधार ट्रस्ट के चेयरमैन की जमानत याचिका खारिज
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संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। नगर सुधार ट्रस्ट में फैले भ्रष्टाचार के आरोप में नामजद किए गए पूर्व चेयरमैन रमन बाला सुब्रह्मण्यम की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। आठ दिन पहले विजिलेंस की टीम द्वारा मामला दर्ज किया गया था और इतने दिन बीतने के बाद भी पूर्व चेयरमैन कहां है, इसके बारे में विजिलेंस को अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है। हैरानी की बात यह है कि रमन बाला सुब्रह्मण्यम अपनी वकीलों के संपर्क में है। वह कहां से संपर्क कर रहा है इसका कुछ पता नहीं चल पा रहा है। वकीलों के जरिये पूर्व चेयरमैन ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई, जिस पर अदालत में चार अगस्त को सुनवाई थी। वीरवार को अदालत की तरफ से पूर्व चेयरमैन की जमानत याचिका को रद्द कर दिया है। इसके बाद पूर्व चेयरमैन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है और विजिलेंस की टीम लगातार फिर से दबिश देनी शुरू कर दी है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. अजीत अत्री की अदालत में वीरवार को जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। अदालत ने लंबी दलीलें सुनने के बाद अग्रिम जमानत अर्जी को रद्द कर दिया। अदालत में पूर्व चेयरमैन ने अपने वकील के जरिये पूर्व चेयरमैन ने दावा किया है कि वह निर्दोष है। उन्होंने न तो किसी से रिश्वत मांगी और न ही स्वीकार की। राजनीतिक प्रतिशोध के चलते विजिलेंस ब्यूरो ने उनके खिलाफ 28 जुलाई 2022 को मामला दर्ज किया था। यह दावा किया गया है कि आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं। उन्होंने ईमानदारी और लगन से अपने कर्तव्यों का पालन किया। कुछ भू-माफिया, प्रापर्टी डीलर व राजनीतिक व्यक्तियों के साथ सांठगांठ कर रहे हैं क्योंकि आरोपी ने उनकी अवैध मांगों को उस अवधि के दौरान स्वीकार नहीं किया जब वह सुधार ट्रस्ट लुधियाना के चेयरमैन थे। प्लाट संख्या: 9-बी, एसबीएस नगर, लुधियाना और 106-डी, ऋषि नगर, लुधियाना को स्थानीय निकाय विभाग, सरकार के उच्चतम अधिकारियों से उचित मंजूरी/आदेश प्राप्त करने के बाद अदालत के आदेश के अनुसार आवंटित किया गया है।
उन्होंने दावा किया कि एफआईआर में दिखाई गई अन्य संपत्तियों की अलाटमेंट उन्होंने नहीं की। जो भी नीलामी हुई वह ई-नीलामी थी। उक्त ई-नीलामी में आरोपी सहित इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के किसी भी कर्मचारी की कोई भूमिका या हस्तक्षेप नहीं था। ई-नीलामी निष्पक्ष, ईमानदारी एवं नियमानुसार हुई उसमें जिलाधीश कार्यालय के एक प्रतिनिधि एवं अन्य विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे, उक्त ई-नीलामी की वीडियो रिकार्डिंग भी सरकार के पास उपलब्ध है। जमानत याचिका में कहा गया था कि न तो उन्होंने कोई जालसाजी की और न ही धोखा दिया और न ही कोई विश्वासघात किया। दूसरी ओर विजिलेंस ब्यूरो ने कथित अनियमितताओं में पूर्व चेयरमैन की भूमिका का आरोप लगाया और जोर देकर कहा कि आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। इसके बाद अदालत ने याचिका को रद्द कर दिया।
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लुधियाना। नगर सुधार ट्रस्ट में फैले भ्रष्टाचार के आरोप में नामजद किए गए पूर्व चेयरमैन रमन बाला सुब्रह्मण्यम की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। आठ दिन पहले विजिलेंस की टीम द्वारा मामला दर्ज किया गया था और इतने दिन बीतने के बाद भी पूर्व चेयरमैन कहां है, इसके बारे में विजिलेंस को अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है। हैरानी की बात यह है कि रमन बाला सुब्रह्मण्यम अपनी वकीलों के संपर्क में है। वह कहां से संपर्क कर रहा है इसका कुछ पता नहीं चल पा रहा है। वकीलों के जरिये पूर्व चेयरमैन ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई, जिस पर अदालत में चार अगस्त को सुनवाई थी। वीरवार को अदालत की तरफ से पूर्व चेयरमैन की जमानत याचिका को रद्द कर दिया है। इसके बाद पूर्व चेयरमैन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है और विजिलेंस की टीम लगातार फिर से दबिश देनी शुरू कर दी है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. अजीत अत्री की अदालत में वीरवार को जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। अदालत ने लंबी दलीलें सुनने के बाद अग्रिम जमानत अर्जी को रद्द कर दिया। अदालत में पूर्व चेयरमैन ने अपने वकील के जरिये पूर्व चेयरमैन ने दावा किया है कि वह निर्दोष है। उन्होंने न तो किसी से रिश्वत मांगी और न ही स्वीकार की। राजनीतिक प्रतिशोध के चलते विजिलेंस ब्यूरो ने उनके खिलाफ 28 जुलाई 2022 को मामला दर्ज किया था। यह दावा किया गया है कि आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं। उन्होंने ईमानदारी और लगन से अपने कर्तव्यों का पालन किया। कुछ भू-माफिया, प्रापर्टी डीलर व राजनीतिक व्यक्तियों के साथ सांठगांठ कर रहे हैं क्योंकि आरोपी ने उनकी अवैध मांगों को उस अवधि के दौरान स्वीकार नहीं किया जब वह सुधार ट्रस्ट लुधियाना के चेयरमैन थे। प्लाट संख्या: 9-बी, एसबीएस नगर, लुधियाना और 106-डी, ऋषि नगर, लुधियाना को स्थानीय निकाय विभाग, सरकार के उच्चतम अधिकारियों से उचित मंजूरी/आदेश प्राप्त करने के बाद अदालत के आदेश के अनुसार आवंटित किया गया है।
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उन्होंने दावा किया कि एफआईआर में दिखाई गई अन्य संपत्तियों की अलाटमेंट उन्होंने नहीं की। जो भी नीलामी हुई वह ई-नीलामी थी। उक्त ई-नीलामी में आरोपी सहित इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के किसी भी कर्मचारी की कोई भूमिका या हस्तक्षेप नहीं था। ई-नीलामी निष्पक्ष, ईमानदारी एवं नियमानुसार हुई उसमें जिलाधीश कार्यालय के एक प्रतिनिधि एवं अन्य विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे, उक्त ई-नीलामी की वीडियो रिकार्डिंग भी सरकार के पास उपलब्ध है। जमानत याचिका में कहा गया था कि न तो उन्होंने कोई जालसाजी की और न ही धोखा दिया और न ही कोई विश्वासघात किया। दूसरी ओर विजिलेंस ब्यूरो ने कथित अनियमितताओं में पूर्व चेयरमैन की भूमिका का आरोप लगाया और जोर देकर कहा कि आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। इसके बाद अदालत ने याचिका को रद्द कर दिया।
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