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लुधियाना में कारोबारी बोले, कोरोना काल में टैरिफ रेट न बढ़ाएं

Thu, 04 Feb 2021 11:11 PM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Thu, 04 Feb 2021 11:11 PM IST
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Businesses Ludhiana do not increase tariff rate during Corona period
लुधियाना। पावरकॉम ने इस साल पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन से फिक्स चार्ज में 15 फीसदी तो एनर्जी चार्ज में 6 फीसदी बढ़ोतरी की मांग की है। ऐसे में आम जनता की इस पर क्या राय है, यह जानने के लिए वीरवार को कमीशन की चेयरपर्सन कुसमजीत कौर सिद्धू लुधियाना पहुंचीं। बैठक में शामिल कारोबारियों ने दो टूक कहा कि कोरोना काल में इंडस्ट्री इस हालत में नहीं है कि वह अब और बोझ उठा सके। इसलिए टैरिफ रेट में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं होनी चाहिए। पंजाब के मुकाबले पड़ोसी प्रदेशों में बिजली के रेट कम हो रहे हैं, इसलिए यहां कोई बड़ा यूनिट आने के लिए तैयार नहीं हो रहा है। अगर बिजली बोर्ड अपने सिस्टम में सुधार लाकर अपने लॉस को कम करे तो आने वाले पांच साल तक बिजली रेट बढ़ाने की जरूर नहीं रहेगी।
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लॉस कम करने की तरफ ध्यान देना चाहिए
इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन ऑफ नार्थ इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट देव गुप्ता ने कमीशन चेयरपर्सन से कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण लगे लॉकडाउन से इंडस्ट्री को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। इससे हर कारोबारी की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ा है। इस बात को ध्यान में रखते हुए बिजली के टैरिफ रेट में कोई बढ़ोतरी नहीं होनी चाहिए। बिजली के दाम बढ़ाने की जगह पावरकॉम को अपने लॉस कम करने की तरफ ध्यान देना चाहिए। ताकी बिजली के रेट बढ़ाने की नौबत न आए।
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1.25 रुपये की नहीं दी जा रही राहत
फर्नेस कारोबारी संदीप जैन ने कहा कि सरकार ने दावा किया था कि नाइट रिबेट के तहत रात दस बजे से लेकर सुबह छह बजे तक बिजली इस्तेमाल पर 1.25 रुपये की राहत मिलनी चाहिए। इसमें सरकार ने शर्त जोड़ रखी है कि 4.83 पैसे कम से कम एक यूनिट का रेट लगेगा। अगर इसमें भी 1.25 रुपये कम किए जाएं तो 3.58 पैसे प्रति यूनिट रेट लगना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। सरकार कहती है कि आपको पांच रुपये यूनिट बिजली दी जाती है, ऐसे में हमें सिर्फ 17 पैसे ही मिलते है। उन्होंने कहा कि सरकार कारोबारियों को पूरा नाइट रिबेट दे, 17 पैसे से काम नहीं चलेगा। चेयरपर्सन के सामने संदीप जैन ने सिस्टम के हालात के बारे में बताया कि उनके घर पर 37 किलोवाट का लोड है, बिजली बोर्ड ने उन्हें 89 लाख रुपये का बिजली बिल भेज दिया था। बाद में पावरकॉम के अफसरों का कहना था कि सिस्टम में खराबी के कारण ऐसा हुआ है।
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चेयरपर्सन के सामने रखीं शिकायतें और सुझाव
-कृषि सेक्टर में कितनी बिजली मुफ्त में दी जाती है, इस बारे में पावरकाम को पता नहीं है। क्योंकि अगर बिजली मीटर लगेंगे तभी पता चल सकेगा कि कितनी यूनिट बिजली कृषि को मुफ्त दी गई है।
-सामान्य एक बिजली फीडर पर सात फीसदी का बिजली लॉस होता है, किसी फीडर पर यह लॉस 40 फीसदी तक होता है। कभी पावरकॉम ने यह जानने की कोशिश की कि 40 फीसदी लॉस के पीछे क्या कारण है।

-बिजली बंद संबंधी शिकायतों को समय पर पूरा नहीं किया जाता है, फीडर बंद होने पर दस घंटे तक बिजली गुल रहती है। इन लॉस को कम करने पर क्यों ध्यान नहीं दिया जाता है।
-घरेलू बिजली कनेक्शन 15 दिन में जारी करने के आदेश हैं, असल में दो माह तक समय लग जाता है बिजली कनेक्शन लेने में।
-एक सेक्टर पर बिजली टैरिफ रेट को एक समान रखा जाना चाहिए। चाहे उसका लोड कितना भी क्यों न हो।
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