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किसान जान न दें, बस आठ माह और रुक जाएं : भगवंत मान
ब्यूरो/अमर उजाला, बरनाला
Updated Sun, 01 May 2016 09:56 PM IST
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बरनाला में पीड़ित परिवार से मिलते भगवंत मान।
- फोटो : अमर उजाला
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आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने कहा कि आम आदमी पार्टी अब किसानों को चिट्ठी भेजेगी कि वह आत्महत्याएं न करें, बस आठ माह और इंतजार करें। आप की सरकार बनने पर किसी भी किसान को मरने नही देंगे। सांसद मान रविवार को बरनाला के गांव जोधपुर में पीड़ित परिवार से हमदर्दी जताने पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राज्य के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को पत्र लिखकर किसानों से कर्ज की जबरन बसूली बंद करने की मांग की थी। इस पर कोई गौर न किए जाने के कारण किसान खुदकुशियां कर रहे हैं। अब केजरीवाल बादल को दोबारा पत्र लिखेंगे।
सांसद मान ने कहा कि पुलिस के उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में मां बेटे द्वारा आत्महत्या कर ली गई, जबकि परिवार घर की कुर्की को रोकने के लिए कुछ समय की मोहलत मांग रहा था। अब सरकार ने उन्हें 10 लाख रुपये का चेक दिया और घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जा रही है।
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सांसद मान ने कहा कि जिन पुलिस अधिकारियों के सामने मां-बेटे ने जान दी, वह तो जिम्मेदार हैं ही, बरनाला के जिला पुलिस मुखी भी बराबर के जिम्मेदार हैं। उन्होंने अब तक लापरवाही करने वाले अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नही किए और घटना वाले दिन से ही उनको बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा अगर किसी भी जिला में कोई घटना होती है तो उस घटना का जिम्मेदार जिला मुखी भी होता है। सरकार और डीजीपी को लापरवाही करने वाले पुलिस अधिकारियों के साथ साथ जिला पुलिस मुखी पर भी कार्रवाई करनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राज्य के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को पत्र लिखकर किसानों से कर्ज की जबरन बसूली बंद करने की मांग की थी। इस पर कोई गौर न किए जाने के कारण किसान खुदकुशियां कर रहे हैं। अब केजरीवाल बादल को दोबारा पत्र लिखेंगे।
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सांसद मान ने कहा कि पुलिस के उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में मां बेटे द्वारा आत्महत्या कर ली गई, जबकि परिवार घर की कुर्की को रोकने के लिए कुछ समय की मोहलत मांग रहा था। अब सरकार ने उन्हें 10 लाख रुपये का चेक दिया और घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जा रही है।
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सांसद मान ने कहा कि जिन पुलिस अधिकारियों के सामने मां-बेटे ने जान दी, वह तो जिम्मेदार हैं ही, बरनाला के जिला पुलिस मुखी भी बराबर के जिम्मेदार हैं। उन्होंने अब तक लापरवाही करने वाले अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नही किए और घटना वाले दिन से ही उनको बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा अगर किसी भी जिला में कोई घटना होती है तो उस घटना का जिम्मेदार जिला मुखी भी होता है। सरकार और डीजीपी को लापरवाही करने वाले पुलिस अधिकारियों के साथ साथ जिला पुलिस मुखी पर भी कार्रवाई करनी चाहिए।