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हड़ताल से लुधियाना को 4500 करोड़ की चपत
अमर उजाला, लुधियाना
Updated Mon, 10 Feb 2014 10:11 PM IST
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यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले बैंक मुलाजिमाें की दो दिवसीय हड़ताल से पंजाब की आर्थिक राजधानी में बैंकिंग कारोबार को तकरीबन 4500 करोड़ रुपये की चपत लगने का अनुमान है।
इससे जहां बैंकिंग इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित है, वहीं आयातक, निर्यातक, उद्यमी और समाज के हर वर्ग पर इसका असर देखा जा रहा है। हड़ताल के चलते एटीएम भी खाली होना शुरू हो गए हैं। मंगलवार तक शहर के अधिकतर एटीएम में रुपये खत्म हो जाएंगे। वहीं हड़ताल के चलते निजी क्षेत्र के बैंकों पर काम का अधिक दबाव रहा, लेकिन क्लीयरिंग बंद होने के चलते वे भी खुल कर कारोबार नहीं कर पाए।
लुधियाना में बैंकों की कुल 866 शाखाएं हैं, इनमें से 532 शाखाएं सरकारी बैंकों से संबंधित हैं। इन तमाम शाखाओं में हड़ताल का पूरा असर देखा गया। लुधियाना के कुल बैंकिंग कारोबार में 72 फीसदी (65 हजार करोड़ रुपये) हिस्सेदारी सरकारी बैंकों की है।
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इस तरह से सरकारी बैंक क्लीयरिंग के अलावा भी सात सौ करोड़ का कारोबार रोजाना करते हैं। नौ फरवरी को रविवार की छुट्टी के कारण कोई बैंकिंग नहीं हुई। इसके बाद 10 और 11 फरवरी को हड़ताल हो गई। नतीजतन तीन दिन बैंकों में कामकाज नहीं होगा। ऐसे में आठ सौ करोड़ की रोजाना क्लीयरिंग एवं सात सौ करोड़ की अन्य बैकिंग को जोड़ कर करीब 4500 करोड़ की कारोबारी चपत सरकारी बैंकों को लगने का अंदेशा है।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के जिला सचिव नरेश गौड़ का कहना है कि एटीएम में शनिवार के बाद रुपये नहीं डाले गए हैं। नतीजतन पचास फीसदी से अधिक एटीएम सोमवार को ड्राई हो गए हैं, जबकि अधिकतर एटीएम मंगलवार को खाली हो जाएंगे। ऑल इंडिया इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट संदीप जैन का कहना है कि तीन दिन की बंदी के कारण आयातित माल पर डेमरेज, डिटेंशन और ब्याज इत्यादि जोड़कर उद्यमियों को तीन सौ रुपये प्रति टन का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इससे तीन सौ रुपये माल महंगा हो जाएगा।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन के रीजनल चेयरमैन एससी रल्हन का कहना है कि पंजाब में रोजाना सौ करोड़ का निर्यात और 125 करोड़ का माल आयात किया जाता है। तीन दिन की बंदी के कारण निर्यातकों और आयातकों को नुकसान हो रहा है। विदेशी पेमेंट में देरी से छवि खराब हो रही है।
उद्यमी सरकारी ड्यूटियों का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। सरकार को मुलाजिमों की मांगों को तुरंत हल करना चाहिए। चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल अंडरटेकिंग्स के महासचिव उपकार सिंह का कहना है कि बैंकों की हड़ताल के चलते बैंकों में बंदी ने सारा गणित बिगाड़ कर रख दिया है। इससे उद्यमियों एवं व्यापारियों के लेन देन प्रभावित हो गए हैं। लेबर की पैमेंट नहीं हो पा रही है।
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इससे जहां बैंकिंग इंडस्ट्री बुरी तरह प्रभावित है, वहीं आयातक, निर्यातक, उद्यमी और समाज के हर वर्ग पर इसका असर देखा जा रहा है। हड़ताल के चलते एटीएम भी खाली होना शुरू हो गए हैं। मंगलवार तक शहर के अधिकतर एटीएम में रुपये खत्म हो जाएंगे। वहीं हड़ताल के चलते निजी क्षेत्र के बैंकों पर काम का अधिक दबाव रहा, लेकिन क्लीयरिंग बंद होने के चलते वे भी खुल कर कारोबार नहीं कर पाए।
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लुधियाना में बैंकों की कुल 866 शाखाएं हैं, इनमें से 532 शाखाएं सरकारी बैंकों से संबंधित हैं। इन तमाम शाखाओं में हड़ताल का पूरा असर देखा गया। लुधियाना के कुल बैंकिंग कारोबार में 72 फीसदी (65 हजार करोड़ रुपये) हिस्सेदारी सरकारी बैंकों की है।
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इस तरह से सरकारी बैंक क्लीयरिंग के अलावा भी सात सौ करोड़ का कारोबार रोजाना करते हैं। नौ फरवरी को रविवार की छुट्टी के कारण कोई बैंकिंग नहीं हुई। इसके बाद 10 और 11 फरवरी को हड़ताल हो गई। नतीजतन तीन दिन बैंकों में कामकाज नहीं होगा। ऐसे में आठ सौ करोड़ की रोजाना क्लीयरिंग एवं सात सौ करोड़ की अन्य बैकिंग को जोड़ कर करीब 4500 करोड़ की कारोबारी चपत सरकारी बैंकों को लगने का अंदेशा है।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के जिला सचिव नरेश गौड़ का कहना है कि एटीएम में शनिवार के बाद रुपये नहीं डाले गए हैं। नतीजतन पचास फीसदी से अधिक एटीएम सोमवार को ड्राई हो गए हैं, जबकि अधिकतर एटीएम मंगलवार को खाली हो जाएंगे। ऑल इंडिया इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट संदीप जैन का कहना है कि तीन दिन की बंदी के कारण आयातित माल पर डेमरेज, डिटेंशन और ब्याज इत्यादि जोड़कर उद्यमियों को तीन सौ रुपये प्रति टन का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इससे तीन सौ रुपये माल महंगा हो जाएगा।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन के रीजनल चेयरमैन एससी रल्हन का कहना है कि पंजाब में रोजाना सौ करोड़ का निर्यात और 125 करोड़ का माल आयात किया जाता है। तीन दिन की बंदी के कारण निर्यातकों और आयातकों को नुकसान हो रहा है। विदेशी पेमेंट में देरी से छवि खराब हो रही है।
उद्यमी सरकारी ड्यूटियों का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। सरकार को मुलाजिमों की मांगों को तुरंत हल करना चाहिए। चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल अंडरटेकिंग्स के महासचिव उपकार सिंह का कहना है कि बैंकों की हड़ताल के चलते बैंकों में बंदी ने सारा गणित बिगाड़ कर रख दिया है। इससे उद्यमियों एवं व्यापारियों के लेन देन प्रभावित हो गए हैं। लेबर की पैमेंट नहीं हो पा रही है।