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हरप्रीत की मां को कच्ची नौकरी देकर पल्ला झाड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला, बरनाला
Updated Wed, 23 Mar 2016 10:34 PM IST
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तेजाब की भेंट चढ़ी हरप्रीत कौर की मां दविंदर कौर
- फोटो : अमर उजाला
मरहूम तेजाब पीड़िता हरप्रीत कौर की मां दविंदर कौर को दस माह की धक्केशाही के बाद जिला प्रशासन व सत्ताधारी नेताओं ने सुविधा सेंटर में कच्ची नौकरी देकर पल्ला झाल लिया है।
बरनाला की दविंदर कौर ने बताया कि 7 दिसंबर, 2013 को शादी वाले दिन ब्यूटी पार्लर में (लुधियाना) सजी उनकी बेटी हरप्रीत कौर पर कुछ नौजवानों ने तेजाब छिड़क दिया था। हरप्रीत की हालत गंभीर देखते हुए डीएमसी लुधियाना के डाक्टरों ने 12 दिसंबर, 2013 को मुंबई के अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। मुंबई के अस्पताल में 27 दिसंबर, 2013 हरप्रीत मौत हो गई और 28 दिसंबर 2013 को उसका बरनाला में अंतिम संस्कार कर दिया।
दविंदर कौर ने बताया कि अंतिम संस्कार वाले दिन राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींढसा व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा ने उनके घर आकर परिवार के किसी सदस्य को पक्की नौकरी देने का आश्वासन दिया था। हालांकि उनके लड़के दलजीत सिंह को सुविधा सेंटर में चपरासी की कच्ची नौकरी दी गई। एक वर्ष बाद उससे वह भी नौकरी छीन ली गई। उसके बाद गलत आरोप लगाकर उसके लड़के को नौकरी से निकाल दिया गया। सुविधा सेंटर के इंचार्ज ने उसके लड़के पर गलत आरोप लगाकर नौकरी से निकाल दिया गया था।
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जबकि उसके लड़के दलजीत सिंह द्वारा सुविधा सेंटर के इंचार्ज पर लगाए गए आरोपों की जांच नहीं की गई और पक्षपात करते हुए उसके लड़के को नौकरी से निकाल दिया था। वह एक वर्ष से नौकरी के लिए दर दर भटक रही थी, लेकिन अब फिर उन्हें पक्की नौकरी देने के बजाय 10 महीने की धक्केशाही के बाद सुविधा सेंटर में कच्ची नौकरी दे दी गई है।
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बरनाला की दविंदर कौर ने बताया कि 7 दिसंबर, 2013 को शादी वाले दिन ब्यूटी पार्लर में (लुधियाना) सजी उनकी बेटी हरप्रीत कौर पर कुछ नौजवानों ने तेजाब छिड़क दिया था। हरप्रीत की हालत गंभीर देखते हुए डीएमसी लुधियाना के डाक्टरों ने 12 दिसंबर, 2013 को मुंबई के अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। मुंबई के अस्पताल में 27 दिसंबर, 2013 हरप्रीत मौत हो गई और 28 दिसंबर 2013 को उसका बरनाला में अंतिम संस्कार कर दिया।
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दविंदर कौर ने बताया कि अंतिम संस्कार वाले दिन राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींढसा व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा ने उनके घर आकर परिवार के किसी सदस्य को पक्की नौकरी देने का आश्वासन दिया था। हालांकि उनके लड़के दलजीत सिंह को सुविधा सेंटर में चपरासी की कच्ची नौकरी दी गई। एक वर्ष बाद उससे वह भी नौकरी छीन ली गई। उसके बाद गलत आरोप लगाकर उसके लड़के को नौकरी से निकाल दिया गया। सुविधा सेंटर के इंचार्ज ने उसके लड़के पर गलत आरोप लगाकर नौकरी से निकाल दिया गया था।
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जबकि उसके लड़के दलजीत सिंह द्वारा सुविधा सेंटर के इंचार्ज पर लगाए गए आरोपों की जांच नहीं की गई और पक्षपात करते हुए उसके लड़के को नौकरी से निकाल दिया था। वह एक वर्ष से नौकरी के लिए दर दर भटक रही थी, लेकिन अब फिर उन्हें पक्की नौकरी देने के बजाय 10 महीने की धक्केशाही के बाद सुविधा सेंटर में कच्ची नौकरी दे दी गई है।