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Ludhiana News: 7 करोड़ की ठगी का आरोपी गिरफ्तार, रिमांड पर लिया
Fri, 02 Oct 2026 07:08 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
Updated Fri, 02 Oct 2026 07:08 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। उद्योगपति एसपी ओसवाल से सात करोड़ रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्य साजिशकर्ता सोहेल अख्तर उर्फ राजू को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से गिरफ्तार किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम उससे छह अक्तूबर तक रिमांड पर पूछताछ कर रही है।
पूछताछ में सोहेल से विदेशी साइबर गिरोहों, हवाला तंत्र और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के बारे में सुराग जुटाए जा रहे हैं। शुरुआती पड़ताल में पता चला है कि भारत में मौजूद सदस्य केवल रकम बटोरते थे। ठगी की पूरी कमान विदेश में बैठे नेटवर्क के हाथों में थी। सोहेल अख्तर ने स्वीकार किया कि ठगी गई रकम को तुरंत इधर-उधर करने के लिए हाई-टेक सॉफ्टवेयर और डिजिटल टूल्स का उपयोग किया गया। उसने रिग्लो वेंचर्स सहित कई कागजी फर्में और फर्जी बैंक खाते बनाए थे। इन खातों से जुड़े मोबाइल फोन में एएमएमएफओआरडब्ल्यूएआरडी नामक गुप्त एपीके फाइल इंस्टॉल की जाती थी। यह फाइल बैंक संदेश और ओटीपी तुरंत नेपाल, कंबोडिया और वियतनाम में सक्रिय साइबर ठगों तक पहुंचा देती थी। इसके बाद विदेशी आका भारतीय बैंकिंग तंत्र से पैसे निकालकर उन्हें विदेशी खातों और क्रिप्टोकरेंसी में बदल देते थे।
ईडी अब दर्जनों फर्जी बैंक खातों की सूची तैयार कर रही है। ये खाते पश्चिम बंगाल और आसपास के इलाकों से गरीब युवाओं को नौकरी या कर्ज का झांसा देकर खुलवाए गए थे। इन खातों के जरिये दो से पांच लाख रुपये की छोटी किस्तों में पैसे निकाले गए। अधिकारियों को कुछ बैंक कर्मियों की भूमिका पर भी संदेह है, जिनसे जल्द पूछताछ की तैयारी है। जांच एजेंसी इस मामले में 1.76 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां पहले ही जब्त कर चुकी है।
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लुधियाना। उद्योगपति एसपी ओसवाल से सात करोड़ रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्य साजिशकर्ता सोहेल अख्तर उर्फ राजू को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से गिरफ्तार किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम उससे छह अक्तूबर तक रिमांड पर पूछताछ कर रही है।
पूछताछ में सोहेल से विदेशी साइबर गिरोहों, हवाला तंत्र और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के बारे में सुराग जुटाए जा रहे हैं। शुरुआती पड़ताल में पता चला है कि भारत में मौजूद सदस्य केवल रकम बटोरते थे। ठगी की पूरी कमान विदेश में बैठे नेटवर्क के हाथों में थी। सोहेल अख्तर ने स्वीकार किया कि ठगी गई रकम को तुरंत इधर-उधर करने के लिए हाई-टेक सॉफ्टवेयर और डिजिटल टूल्स का उपयोग किया गया। उसने रिग्लो वेंचर्स सहित कई कागजी फर्में और फर्जी बैंक खाते बनाए थे। इन खातों से जुड़े मोबाइल फोन में एएमएमएफओआरडब्ल्यूएआरडी नामक गुप्त एपीके फाइल इंस्टॉल की जाती थी। यह फाइल बैंक संदेश और ओटीपी तुरंत नेपाल, कंबोडिया और वियतनाम में सक्रिय साइबर ठगों तक पहुंचा देती थी। इसके बाद विदेशी आका भारतीय बैंकिंग तंत्र से पैसे निकालकर उन्हें विदेशी खातों और क्रिप्टोकरेंसी में बदल देते थे।
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ईडी अब दर्जनों फर्जी बैंक खातों की सूची तैयार कर रही है। ये खाते पश्चिम बंगाल और आसपास के इलाकों से गरीब युवाओं को नौकरी या कर्ज का झांसा देकर खुलवाए गए थे। इन खातों के जरिये दो से पांच लाख रुपये की छोटी किस्तों में पैसे निकाले गए। अधिकारियों को कुछ बैंक कर्मियों की भूमिका पर भी संदेह है, जिनसे जल्द पूछताछ की तैयारी है। जांच एजेंसी इस मामले में 1.76 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां पहले ही जब्त कर चुकी है।
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