गृहस्थ आश्रम सबसे बड़ा : कमलानंद

Ludhiana Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
मुक्तसर। श्री कल्याण कमल आश्रम हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद ने कहा कि देने वाला देवता होता है और लेने वाला राक्षस। इसलिए बढ़-चढ़कर दान-पुण्य कर देवता बनो न कि दूसरों का हक छीनकर राक्षस। देवता हर किसी को देते ही हैं और सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इसलिए वह देवता कहलाते हैं। जबकि राक्षसों की प्रवृति दूसरों से छीनने की होती है। इसलिए उन्हें दैत्य कहते हैं। महामंडलेश्वर ने यह विचार श्रीराम भवन में आयोजित कार्तिक महोत्सव के दौरान व्यक्त किए।
गृहस्थ आश्रम के बारे में उन्होंने कहा कि गृहस्थ आश्रम सबसे बड़ा और कठिन है। सभी को जन्म देने वाला गृहस्थ आश्रम ही है। स्वामी जी ने कहा कि भोजन बनाने के पश्चात भगवान को भोग अवश्य लगाना चाहिए। भोग लगाने के बाद भोजन अमृत बन जाता है। इसलिए भोजन करने से पूर्व भगवान को भोग लगाएं। कमलानंद ने कहा कि पत्नी चाहे कैसी भी हो, पति को मरते दम तक उसका साथ नहीं छोड़ना चाहिए। यही पति का धर्म है। वहीं पत्नी को भी अपने पतिव्रत धर्म का सदैव पालन करना चाहिए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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