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चुनावी घोषणा पत्र को कानून के दायरे में लाना समय की मांग: ढींसा
Updated Tue, 01 May 2018 09:08 PM IST
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प्रदेश में अराजकता का माहौल: ढींढसा
चुनाव घोषणा पत्र को कानून के दायरे में लाना समय की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
सुनाम ऊधम सिंह वाला (संगरूर)।
अकाली दल के महासचिव व राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींढसा ने मंगलवार को प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कैप्टन सरकार को सभी मोर्चों पर फेल करार देते हुए आरोप लगाया कि इस समय प्रदेश में अराजकता का माहौल है। सत्ता हथियाने के लिए पार्टियां चुनाव से पहले लोक लुभावने वादे करती हैं और सत्ता मिलते वादों से दूर हो जाती हैं। ढींढसा नई अनाज मंडी में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया कि चुनाव से पहले सियासी पार्टियों की ओर से जनता के समक्ष किए जाने वाले वादों को कानून के दायरे में लाया जाए। राजनीतिक पार्टियों के मैनिफेस्टो को चुनाव आयोग पहल करके कानून के दायरे में लाए। उन्होंने कहा कि कई सियासी दलों ने बडे़-बडे़ वायदे करके सत्ता हासिल की लेकिन सरकार बनाने के बाद वायदों से पीछे हट रही हैं। यह जनता के साथ धोखा है। वर्तमान दौर में सूबे के हालात भी कुछ ऐसे ही हैं। कांग्रेस ने सत्ता हासिल करने से वादों को दो माह के भीतर लागू करने के दावे किए थे। सवा वर्ष बीत जाने के बाद तमाम वादे खोखले साबित हुए हैं। लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। ढींढसा ने कहा कि कांग्रेस सरकार को उसके वादे याद दिलाने और इन्हें लागू करने करने का दवाब बनाने के लिए अकाली दल पोल खोल रैली के दूसरे चरण का आगाज जल्द करेगा। इसके अलावा अकाली दल, विधानसभा में भी सरकार को घेर रहा है। कांग्रेस सरकार के कान पर जूं रेंग नहीं रही है। कैप्टन सरकार के कार्यकाल में सूबे अराजकता का माहौल बन चुका है। हरेक वर्ग इस सरकार से निराश व मायूस हो चुका है और लोग पिछली बादल सरकार को याद कर रहे हैं।
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चुनाव घोषणा पत्र को कानून के दायरे में लाना समय की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
सुनाम ऊधम सिंह वाला (संगरूर)।
अकाली दल के महासचिव व राज्यसभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींढसा ने मंगलवार को प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कैप्टन सरकार को सभी मोर्चों पर फेल करार देते हुए आरोप लगाया कि इस समय प्रदेश में अराजकता का माहौल है। सत्ता हथियाने के लिए पार्टियां चुनाव से पहले लोक लुभावने वादे करती हैं और सत्ता मिलते वादों से दूर हो जाती हैं। ढींढसा नई अनाज मंडी में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया कि चुनाव से पहले सियासी पार्टियों की ओर से जनता के समक्ष किए जाने वाले वादों को कानून के दायरे में लाया जाए। राजनीतिक पार्टियों के मैनिफेस्टो को चुनाव आयोग पहल करके कानून के दायरे में लाए। उन्होंने कहा कि कई सियासी दलों ने बडे़-बडे़ वायदे करके सत्ता हासिल की लेकिन सरकार बनाने के बाद वायदों से पीछे हट रही हैं। यह जनता के साथ धोखा है। वर्तमान दौर में सूबे के हालात भी कुछ ऐसे ही हैं। कांग्रेस ने सत्ता हासिल करने से वादों को दो माह के भीतर लागू करने के दावे किए थे। सवा वर्ष बीत जाने के बाद तमाम वादे खोखले साबित हुए हैं। लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। ढींढसा ने कहा कि कांग्रेस सरकार को उसके वादे याद दिलाने और इन्हें लागू करने करने का दवाब बनाने के लिए अकाली दल पोल खोल रैली के दूसरे चरण का आगाज जल्द करेगा। इसके अलावा अकाली दल, विधानसभा में भी सरकार को घेर रहा है। कांग्रेस सरकार के कान पर जूं रेंग नहीं रही है। कैप्टन सरकार के कार्यकाल में सूबे अराजकता का माहौल बन चुका है। हरेक वर्ग इस सरकार से निराश व मायूस हो चुका है और लोग पिछली बादल सरकार को याद कर रहे हैं।
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