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एक गांव ऐसा भी
Updated Mon, 23 Apr 2018 10:16 PM IST
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सरकार से आशा छोड़ खुद उठाया मदद का बीड़ा
गांव लड्डा में आग से फसल जल जाने वाले किसानों की मिलकर कर रहे सहायता
धार्मिक स्थलों व अन्य जगहों पर दान देने की बजाए पीड़ित के घर पहुंचा रहे गेहूं
अमर उजाला ब्यूरो
संगरूर।
किसानों को कभी प्राकृतिक आपदा तो कभी अन्य कारणों के कारण बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में किसान हमेशा सरकार से मदद की उम्मीद करते हैं। वहीं संगरूर के गांव लड्डा के किसानों ने सरकार से आशा छोड़कर खुद ही अग्निकांड पीड़ितों की मदद का बीड़ा उठाया है। इस गांव के किसानों ने प्रस्ताव डाला कि गांव के जिसकी फसल को आग लगने के कारण नुकसान हुआ है, उनकी मिलकर मदद की जाए। सभी मिलकर गांव में घरों से गेहूं एकत्र करके अग्निकांड पीड़ित किसान के घर पहुंचा रहे हैं। यहीं नहीं किसानों के पशुओं के लिए तूड़ी की व्यवस्था भी कर रहे हैं।
पिछले दिनों खेतों में आग लगने के कारण गांव लड्डाके कई किसानों की 52 एकड़ में लगी गेहूं की फसल और करीब दो सौ एकड़ नाड़ जल गया था। ऐसे में किसानों परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। इनमें से कई ऐसे हैं, जिनके पास घर के लिए भी अनाज नहीं बचा। ऐसे में गांव के किसानों ने अपने किसान भाइयों को इस दर्द से उभारने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें कहा गया कि गांव के अन्य किसान उन किसानों के घर गेहूं व तूड़ी घरों से इक्ट्ठा करके पहुंचाएंगे। गांव के किसान थैले लेकर ट्रैक्टर ट्राली पर सवार होकर घरों से गेहूं व तूड़ी इक्ट्ठा कर पीड़ित किसानों के घरों तक पहुंचा रहे हैं।
गांव लड्डा की ग्राम सभा के अध्यक्ष परमजीत सिंह लड्डा ने बताया कि आग लगने के कारण गांव के कई किसानों भारी नुकसान हो गया है। इससे कई किसानों की कमर ही टूट गई है। इनमें से कई किसान ऐसे हैं जो इस फसल पर निर्भर थे और इससे ही उन्होंने अपने परिवार का गुजारा चलाना था। फसल को आग लगने के कारण किसानों की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। हालात यह बन गए कि किसानों के पास खुद को खाने के लिए तो क्या पशुओं के लिए चारा (तूड़ी) तक नहीं बचा। ऐसे में गांव के किसानों ने प्रस्ताव डालकर पीड़ित ों की सहायता के लिए बीड़ा उठाया है। उन्होंने कहा कि गांव के किसान किसी धार्मिक संस्थान व अन्य जगह दान करने की बजाए अपने ही गांव के पीड़ित किसानों को गेहूं देंगे इसके लिए गेहूं व तूड़ी एकत्र करके अग्निकांड पीड़ित किसानों के घरों तक पहुंचाने का काम जारी है।
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गांव लड्डा में आग से फसल जल जाने वाले किसानों की मिलकर कर रहे सहायता
धार्मिक स्थलों व अन्य जगहों पर दान देने की बजाए पीड़ित के घर पहुंचा रहे गेहूं
अमर उजाला ब्यूरो
संगरूर।
किसानों को कभी प्राकृतिक आपदा तो कभी अन्य कारणों के कारण बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में किसान हमेशा सरकार से मदद की उम्मीद करते हैं। वहीं संगरूर के गांव लड्डा के किसानों ने सरकार से आशा छोड़कर खुद ही अग्निकांड पीड़ितों की मदद का बीड़ा उठाया है। इस गांव के किसानों ने प्रस्ताव डाला कि गांव के जिसकी फसल को आग लगने के कारण नुकसान हुआ है, उनकी मिलकर मदद की जाए। सभी मिलकर गांव में घरों से गेहूं एकत्र करके अग्निकांड पीड़ित किसान के घर पहुंचा रहे हैं। यहीं नहीं किसानों के पशुओं के लिए तूड़ी की व्यवस्था भी कर रहे हैं।
पिछले दिनों खेतों में आग लगने के कारण गांव लड्डाके कई किसानों की 52 एकड़ में लगी गेहूं की फसल और करीब दो सौ एकड़ नाड़ जल गया था। ऐसे में किसानों परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। इनमें से कई ऐसे हैं, जिनके पास घर के लिए भी अनाज नहीं बचा। ऐसे में गांव के किसानों ने अपने किसान भाइयों को इस दर्द से उभारने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें कहा गया कि गांव के अन्य किसान उन किसानों के घर गेहूं व तूड़ी घरों से इक्ट्ठा करके पहुंचाएंगे। गांव के किसान थैले लेकर ट्रैक्टर ट्राली पर सवार होकर घरों से गेहूं व तूड़ी इक्ट्ठा कर पीड़ित किसानों के घरों तक पहुंचा रहे हैं।
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गांव लड्डा की ग्राम सभा के अध्यक्ष परमजीत सिंह लड्डा ने बताया कि आग लगने के कारण गांव के कई किसानों भारी नुकसान हो गया है। इससे कई किसानों की कमर ही टूट गई है। इनमें से कई किसान ऐसे हैं जो इस फसल पर निर्भर थे और इससे ही उन्होंने अपने परिवार का गुजारा चलाना था। फसल को आग लगने के कारण किसानों की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। हालात यह बन गए कि किसानों के पास खुद को खाने के लिए तो क्या पशुओं के लिए चारा (तूड़ी) तक नहीं बचा। ऐसे में गांव के किसानों ने प्रस्ताव डालकर पीड़ित ों की सहायता के लिए बीड़ा उठाया है। उन्होंने कहा कि गांव के किसान किसी धार्मिक संस्थान व अन्य जगह दान करने की बजाए अपने ही गांव के पीड़ित किसानों को गेहूं देंगे इसके लिए गेहूं व तूड़ी एकत्र करके अग्निकांड पीड़ित किसानों के घरों तक पहुंचाने का काम जारी है।
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