{"_id":"5be861d9bdec22694b42c01b","slug":"61541956057-ludhiana-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांव राजोआणा में फरमान पराली जलाने वालों को जमीन ठेके पर नहीं मिलेगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांव राजोआणा में फरमान पराली जलाने वालों को जमीन ठेके पर नहीं मिलेगी
Updated Sun, 11 Nov 2018 10:37 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गांव राजोआणा में किसी किसान ने नहीं जलाई पराली
पूर्व सरपंच किसानों को कर रहे जागरूक, सरकार की स्कीम को अपनाया
गांव के एनआरआई ने पराली न जलाने वाले किसानों को कम पैसे में ठेके पर दी जमीन
कंवरपाल
हलवारा (लुधियाना)। लुधियाना की तहसील रायकोट के गांव राजोआणा कलां में एक भी किसान ने इस बार पराली नहीं जलाई है। पंजाब में धरती बचाओ और पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे पूर्व सरपंच जगदीप सिंह नत्त ने बताया कहा कि यंग इनोवेटिव वाट्सऐप ग्रुप जय जवान जय किसान जागरुक किसान ग्रुप और किसान एग्रीकल्चर ग्रुप बनाकर वह पूरे पंजाब में बिना पराली जलाए खेती करने की अपील करते आ रहे हैं। उनके गांव के सभी किसानों ने करीब 1100 एकड़ में इस बार बिना पराली जलाए फसलें बीज कर कीर्तिमान स्थापित कर दिया है।
पूर्व सरपंच जगदीप सिंह नत्त ने बताया कि पंजाब सरकार के दस लाख रुपये के प्रोजेक्ट को अपनाते हुए किसानों ने सात-सात के ग्रुप बनाकर किसान सेवा सेंटर के जरिए चार हैप्पी सीडर, एक एमबी पलाओ और रोटावेटर मशीनों की खरीद कर यह कदम उठाया है। इसके अलावा निजी तौर पर भी किसानों ने दो हैप्पी सीडर की खरीद की। सहकारी सभा की मदद से अन्य जरूरी टूल्स और साजोसामान का प्रबंध किया गया। गांव के सभी किसान एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। अभी तक साठ प्रतिशत बिजाई का काम पूरा कर लिया गया है। बाकी बची जमीन में जोरों पर काम चल रहा है। सरकारी सभा द्वारा दिए गए हैप्पी सीडर मशीन मशीन से एक खेत में गेहूं बीज रहे दविंदर सिंह ने बताया कि 12 सौ रुपये प्रति घंटे के हिसाब से काम किया जा रहा है। चालीस से 45 मिनट में एक एकड़ जमीन का काम पूरा हो जाता है। इस तरह एक हैप्पी सीडर से रोजाना दस से 15 एकड़ जमीन में बिजाई का काम पूरा कर दिया गया है।
एनआरआई दे रहे है विशेष योगदान
इसके अलावा गांव के एनआरआई किसानों ने ऐलान कर दिया था कि खेतों में पराली जलाने वाले किसानों को जमीन ठेके पर नहीं दी जाएगी। बिना पराली जलाए बिजाई करने वाले किसानों को खेती टूल्स और मशीन खरीद के लिए आधे पैसे भी दिए जाएंगे। इसका जबरदस्त असर हुआ। किसानों ने एनआरआई के सहयोग से मशीनें भी खरीदी और पराली न जलाकर कम ठेके में जमीनें भी हासिल कीं।
विज्ञापन
एनआरआई जोगिंदर सिंह की गांव में जमीन है, जिसे उन्होंने वसाखा सिंह को ठेके पर दे रखा था। इस बार एनआरआई जोगिंदर सिंह ने वसाखा सिंह से पहले ही कह दिया था कि अगर वह पराली जलाएंगे तो उनका ठेका कैंसिल कर दिया जाएगा। अगर नहीं जलाएंगे तो उन्हें ठेके की जो रकम तय होगी, उससे पांच हजार रुपये कम लिया जाएगा। इसके अलावा मशीनें दिलाने में भी मदद की जाएगी। किसान लखवीर सिंह, कुलवंत सिंह, ईशर सिंह, भगवंत सिंह और हरमीत सिंह ने बताया कि आधुनिक तकनीक से बिना पराली जलाए बिजाई करने में काफी कम खर्च आया है। भविष्य में वह कभी पराली नहीं जलाएंगे।
पूर्व सरपंच जगदीप सिंह नत्त ने कहा कि उनके गांव के सभी किसानों द्वारा सरकार को खेती मॉडल अपनाने का इनाम मिलना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मांग की है कि उनके गांव को इस प्राप्ति के लिए विशेष ग्रांट दी जानी चाहिए। नत्त ने इस मौके पर पंजाब के तमाम किसानों को पराली न जलाने की अपील करते हुए कहा कि यह धरती हमारी मां है और इसमें आग लगाने अपनी मां के सीने पर आग लगाने जैसा है।
विज्ञापन
पूर्व सरपंच किसानों को कर रहे जागरूक, सरकार की स्कीम को अपनाया
गांव के एनआरआई ने पराली न जलाने वाले किसानों को कम पैसे में ठेके पर दी जमीन
कंवरपाल
हलवारा (लुधियाना)। लुधियाना की तहसील रायकोट के गांव राजोआणा कलां में एक भी किसान ने इस बार पराली नहीं जलाई है। पंजाब में धरती बचाओ और पर्यावरण संरक्षण की अलख जगा रहे पूर्व सरपंच जगदीप सिंह नत्त ने बताया कहा कि यंग इनोवेटिव वाट्सऐप ग्रुप जय जवान जय किसान जागरुक किसान ग्रुप और किसान एग्रीकल्चर ग्रुप बनाकर वह पूरे पंजाब में बिना पराली जलाए खेती करने की अपील करते आ रहे हैं। उनके गांव के सभी किसानों ने करीब 1100 एकड़ में इस बार बिना पराली जलाए फसलें बीज कर कीर्तिमान स्थापित कर दिया है।
पूर्व सरपंच जगदीप सिंह नत्त ने बताया कि पंजाब सरकार के दस लाख रुपये के प्रोजेक्ट को अपनाते हुए किसानों ने सात-सात के ग्रुप बनाकर किसान सेवा सेंटर के जरिए चार हैप्पी सीडर, एक एमबी पलाओ और रोटावेटर मशीनों की खरीद कर यह कदम उठाया है। इसके अलावा निजी तौर पर भी किसानों ने दो हैप्पी सीडर की खरीद की। सहकारी सभा की मदद से अन्य जरूरी टूल्स और साजोसामान का प्रबंध किया गया। गांव के सभी किसान एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। अभी तक साठ प्रतिशत बिजाई का काम पूरा कर लिया गया है। बाकी बची जमीन में जोरों पर काम चल रहा है। सरकारी सभा द्वारा दिए गए हैप्पी सीडर मशीन मशीन से एक खेत में गेहूं बीज रहे दविंदर सिंह ने बताया कि 12 सौ रुपये प्रति घंटे के हिसाब से काम किया जा रहा है। चालीस से 45 मिनट में एक एकड़ जमीन का काम पूरा हो जाता है। इस तरह एक हैप्पी सीडर से रोजाना दस से 15 एकड़ जमीन में बिजाई का काम पूरा कर दिया गया है।
विज्ञापन
एनआरआई दे रहे है विशेष योगदान
इसके अलावा गांव के एनआरआई किसानों ने ऐलान कर दिया था कि खेतों में पराली जलाने वाले किसानों को जमीन ठेके पर नहीं दी जाएगी। बिना पराली जलाए बिजाई करने वाले किसानों को खेती टूल्स और मशीन खरीद के लिए आधे पैसे भी दिए जाएंगे। इसका जबरदस्त असर हुआ। किसानों ने एनआरआई के सहयोग से मशीनें भी खरीदी और पराली न जलाकर कम ठेके में जमीनें भी हासिल कीं।
विज्ञापन
एनआरआई जोगिंदर सिंह की गांव में जमीन है, जिसे उन्होंने वसाखा सिंह को ठेके पर दे रखा था। इस बार एनआरआई जोगिंदर सिंह ने वसाखा सिंह से पहले ही कह दिया था कि अगर वह पराली जलाएंगे तो उनका ठेका कैंसिल कर दिया जाएगा। अगर नहीं जलाएंगे तो उन्हें ठेके की जो रकम तय होगी, उससे पांच हजार रुपये कम लिया जाएगा। इसके अलावा मशीनें दिलाने में भी मदद की जाएगी। किसान लखवीर सिंह, कुलवंत सिंह, ईशर सिंह, भगवंत सिंह और हरमीत सिंह ने बताया कि आधुनिक तकनीक से बिना पराली जलाए बिजाई करने में काफी कम खर्च आया है। भविष्य में वह कभी पराली नहीं जलाएंगे।
पूर्व सरपंच जगदीप सिंह नत्त ने कहा कि उनके गांव के सभी किसानों द्वारा सरकार को खेती मॉडल अपनाने का इनाम मिलना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मांग की है कि उनके गांव को इस प्राप्ति के लिए विशेष ग्रांट दी जानी चाहिए। नत्त ने इस मौके पर पंजाब के तमाम किसानों को पराली न जलाने की अपील करते हुए कहा कि यह धरती हमारी मां है और इसमें आग लगाने अपनी मां के सीने पर आग लगाने जैसा है।