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Ludhiana News: हड़ताल से बठिंडा में 53 आम आदमी क्लीनिक बंद, मरीज परेशान
Tue, 25 Aug 2026 04:38 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
Updated Tue, 25 Aug 2026 04:38 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बठिंडा। बठिंडा जिले के सभी 53 आम आदमी क्लीनिक मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण बंद हो गए हैं। डॉक्टर, फार्मासिस्ट और क्लीनिकल असिस्टेंट अपनी लंबित मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इससे हजारों मरीजों को इलाज और दवा के लिए भटकना पड़ रहा है।
आम आदमी क्लीनिक सांझा फ्रंट पंजाब के आह्वान पर यह हड़ताल शुरू हुई है। हड़ताल के पहले ही दिन क्लीनिक बंद हो गए। इससे सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपमंडल अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ गया है। मंगलवार सुबह कर्मचारी सिविल अस्पताल बठिंडा परिसर में एकत्र हुए। उन्होंने सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर पंजाब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार ने कई बार मांगों पर सकारात्मक विचार का भरोसा दिया। हालांकि, लिखित अधिसूचना जारी नहीं की गई। उनकी प्रमुख मांगों में वेतन वृद्धि, प्रोत्साहन राशि, आकस्मिक और चिकित्सा अवकाश, नौकरी की सुरक्षा तथा सेवाओं को नियमित करना शामिल है।
हड़ताल के कारण रोजाना इलाज कराने आने वाले मरीजों को भारी परेशानी हुई। कई मरीज क्लीनिक बंद मिलने पर निराश होकर लौटे। उन्हें दवा और जांच के लिए सिविल अस्पतालों का रुख करना पड़ा। लोगों ने सरकार और कर्मचारी संगठनों से जल्द समाधान निकालने की अपील की है। उनका कहना है कि गरीब और ग्रामीण मरीजों को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है।
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बठिंडा। बठिंडा जिले के सभी 53 आम आदमी क्लीनिक मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण बंद हो गए हैं। डॉक्टर, फार्मासिस्ट और क्लीनिकल असिस्टेंट अपनी लंबित मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इससे हजारों मरीजों को इलाज और दवा के लिए भटकना पड़ रहा है।
आम आदमी क्लीनिक सांझा फ्रंट पंजाब के आह्वान पर यह हड़ताल शुरू हुई है। हड़ताल के पहले ही दिन क्लीनिक बंद हो गए। इससे सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपमंडल अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ गया है। मंगलवार सुबह कर्मचारी सिविल अस्पताल बठिंडा परिसर में एकत्र हुए। उन्होंने सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर पंजाब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार ने कई बार मांगों पर सकारात्मक विचार का भरोसा दिया। हालांकि, लिखित अधिसूचना जारी नहीं की गई। उनकी प्रमुख मांगों में वेतन वृद्धि, प्रोत्साहन राशि, आकस्मिक और चिकित्सा अवकाश, नौकरी की सुरक्षा तथा सेवाओं को नियमित करना शामिल है।
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हड़ताल के कारण रोजाना इलाज कराने आने वाले मरीजों को भारी परेशानी हुई। कई मरीज क्लीनिक बंद मिलने पर निराश होकर लौटे। उन्हें दवा और जांच के लिए सिविल अस्पतालों का रुख करना पड़ा। लोगों ने सरकार और कर्मचारी संगठनों से जल्द समाधान निकालने की अपील की है। उनका कहना है कि गरीब और ग्रामीण मरीजों को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है।
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