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नरमें के रस चूसने वाले कीड़ो से बचाव के लिए लगातार सर्वे करते रहे: खेती माहिर
Updated Wed, 08 Aug 2018 10:33 PM IST
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नरमे का रस चूसने वाले कीड़ों से बचाव के लिए करें सर्वेे: खेती माहिर
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना । पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के खेती माहिरों और खेतीबाड़ी विभाग की ओर से नरमा पट्टी का लगातार सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के दौरान मानसा, बठिंडा, फरीदकोट, मुक्तसर जिलों में चिट्टी मक्खी का हमला इकनामिक थ्रैशहोल्ड लेवल (6 मक्खी प्रति पत्ता) से बहुत कम पाया गया। फाजिल्का में खूहिया सर्वर ब्लॉक के 12 गांव के 335 खेतों में से 19 खेतों में इस का हमला इकनामिक थ्रैशहोल्ड लेवल से ऊपर है।
नरमा पट्टी के कुछ खेतों में हरे तेले और भूरी जू (थरिप) का हमला भी दिखाई दिया है। पीएयू के कीट वैज्ञानिक डा. विजय कुमार ने कहा कि किसानों को इस समय घबराने की जरूरत नहीं बल्कि वह सफेद मक्खी, हरे तेले और भूरी जू के लिए अपने खेतों का लगातार सर्वे करते रहें। नरमे की फसल को सूखने ना दें क्योंकि सफेद मक्खी और भूरी जू के हमले में बढ़ोतरी होती है। हरे तेले की रोकथाम के लिए छिड़काव उस समय करो जब 50 प्रतिशत बूटो के ऊपरी हिस्से के पूरे बन चुके पत्ते किनारों से पीले पड़ जाए। इसकी रोकथाम के लिए 60 ग्राम औशीन 20 एसजी (डाइनोटैफूरान) या 80 ग्राम उलाला 50 डब्ल्यूजी (फ्लोनिकामिड) प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करों। भूरी जू के बच्चे और बालग पहले पत्ते की ऊपरी सतह को खरोचते हैं। बाद में पत्ते से निकल रहे पानी को चूसते हैं। शुरुआती अवस्था में पत्ते की बीच में और आस पास चमकीली धारियां दिखाई देती हैं। ज्यादा हमला होनी की सूरत में पत्ते दूर से ही खाकी दिखाई देते है। किसी का हमला ज्यादा नजर आए तो 500 मिली क्यिूराक्रान 50 इसी (प्रोफेनोफास) का छिड़काव करें।
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अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना । पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के खेती माहिरों और खेतीबाड़ी विभाग की ओर से नरमा पट्टी का लगातार सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के दौरान मानसा, बठिंडा, फरीदकोट, मुक्तसर जिलों में चिट्टी मक्खी का हमला इकनामिक थ्रैशहोल्ड लेवल (6 मक्खी प्रति पत्ता) से बहुत कम पाया गया। फाजिल्का में खूहिया सर्वर ब्लॉक के 12 गांव के 335 खेतों में से 19 खेतों में इस का हमला इकनामिक थ्रैशहोल्ड लेवल से ऊपर है।
नरमा पट्टी के कुछ खेतों में हरे तेले और भूरी जू (थरिप) का हमला भी दिखाई दिया है। पीएयू के कीट वैज्ञानिक डा. विजय कुमार ने कहा कि किसानों को इस समय घबराने की जरूरत नहीं बल्कि वह सफेद मक्खी, हरे तेले और भूरी जू के लिए अपने खेतों का लगातार सर्वे करते रहें। नरमे की फसल को सूखने ना दें क्योंकि सफेद मक्खी और भूरी जू के हमले में बढ़ोतरी होती है। हरे तेले की रोकथाम के लिए छिड़काव उस समय करो जब 50 प्रतिशत बूटो के ऊपरी हिस्से के पूरे बन चुके पत्ते किनारों से पीले पड़ जाए। इसकी रोकथाम के लिए 60 ग्राम औशीन 20 एसजी (डाइनोटैफूरान) या 80 ग्राम उलाला 50 डब्ल्यूजी (फ्लोनिकामिड) प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करों। भूरी जू के बच्चे और बालग पहले पत्ते की ऊपरी सतह को खरोचते हैं। बाद में पत्ते से निकल रहे पानी को चूसते हैं। शुरुआती अवस्था में पत्ते की बीच में और आस पास चमकीली धारियां दिखाई देती हैं। ज्यादा हमला होनी की सूरत में पत्ते दूर से ही खाकी दिखाई देते है। किसी का हमला ज्यादा नजर आए तो 500 मिली क्यिूराक्रान 50 इसी (प्रोफेनोफास) का छिड़काव करें।
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