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शहीद के जीवन से जुडा सामान भारत लाने के प्रति गंभीर नहीं हैं राजसी नेता.....?
Updated Fri, 27 Jul 2018 10:29 PM IST
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शहीद के जीवन से जुड़ा सामान भारत लाने के प्रति गंभीर नहीं नेता
हस्तलिखित पत्र, रिवाल्वर, कपड़े, निजी डायरी लाने की मांग
-शहीद के परिजनों ने फिर से मांग उठाने का किया आग्रह
-लोग जानना चाहते हैं ऊधम सिंह के विदेशी परिवार होने का सत्य
सुशील कुमार
सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर)। सत्तासीन नेताओं के वादों और दावों के बावजूद विदेश से शहीद ऊधम सिंह की जिंदगी का अहम हिस्सा रहा सामान भारत नहीं आ पाया है। जबकि शहीद के परिजनों से लेकर आम लोग शहीद ऊधम सिंह का सामान देश में लाकर, सुनाम में स्थित उनके पैतृक घर (जोकि यहां के पीलवाद मोहल्ले में स्थित है और सरकार ने प्रदेश की धरोहर घोषित किया हुआ है) में रखने की मांग लगातार उठा रहे हैं। लोगों की दिली इच्छा है कि महान शहीद ऊधम सिंह ने जिस रिवाल्वर से माइकल ओडायर को मारा था उसे भारत लाया जाए। ऊधम सिंह के कपडे़, निजी लाल डायरी (जिसमें जलियांवालाबाग में 13 अप्रैल 1919 को हुए नरसंहार का बार-बार जिक्र किया हुआ है), जिस डायरी को काटकर रिवाल्वर छुपाई थी वो डायरी, किताबें और अन्य सामग्री भी देश में लाई जाए। सबसे महत्वपूर्ण शहीद ऊधम सिंह के हस्तलिखित वह पत्र (लंदन की पेंटनविले जेल और बेरिक्सटन जेल यात्रा के दौरान लिखित) भी लाने की मांग हो रही है, जिन पत्रों में ऊधम सिंह ने देश के प्रति और ब्रिटिश हुकूमत के प्रति अपने जज्बात खुलकर लिखे थे और ब्रिटिश सरकार ने पत्रों को सेंसर करने के बाद उन पर पूर्ण तौर पर पाबंदी लगा दी थी। ब्रिटिश सरकार को भय था कि ऊधम सिंह के ऐसे जज्बात सार्वजनिक होने पर भारत में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की चिंगारी, विकराल रूप धारण कर सकती है और भारत में आजादी की लड़ाई प्रचंड हो सकती है।
वादों के प्रति गंभीर नहीं हैं सत्तासीन नेता
वर्तमान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2002 से 2007 तक सीएम रहते इस महान शहीद की नगरी में आयोजित राज्यस्तरीय बलिदान दिवस समारोह में खडे़ होकर कहा था कि शहीद ऊधम सिंह के जीवन से जुड़ी वस्तुओं को स्वदेश लाने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया जाएगा। लेकिन हैरत की बात है कि उस वक्त से लेकर अब तक जनवरी 2004 में पंजाब सरकार की ओर से केंद्र को मात्र एक पत्र ही लिखा गया। इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय की ओर से आरटीआई के जरिए दी गई है। आरटीआई एक्टिविस्ट जतिंदर जैन ने उक्त जानकारी मांगी थी। इसके अलावा वर्ष 2008 में सीएम रहते हुए प्रकाश सिंह बादल ने शहीद ऊधम सिंह का विदेश में रहता परिवार ढूंढने का वादा किया था। लेकिन शहीद के विदेशी परिवार होने अथवा नहीं होने का कोई सत्य सामने नहीं आ सका है और लोग पूछ रहे हैं कि कहां है शहीद का विदेशी परिवार। हालांकि विदेश मंत्रालय ने सूचना अधिकार कानून के तहत बताया है कि ब्रिटिश सरकार ने शहीद ऊधम सिंह के सामान को उस वक्त केस में जोड़कर अपने कब्जे में रखा हुआ है और इसे देने से फिलहाल इकंार कर दिया है। लेकिन शहीद के करीब सौ वर्षीय भांजे खुशी नंद, जीत सिंह आदि ने केंद्र सरकार से मांग दोहराई है कि ब्रिटिश सरकार के समक्ष देश वासियों की भावनाओं को रखकर उक्त सामान देश लाने का प्रयास फिर से किया जाए। खुशी नंद ने कहा कि शहीद ऊधम सिंह के हस्तलिखित पत्र पूरे देश के नौजवानों में देशभक्ति की भावना पैदा करेंगे। खासतौर पर पंजाब के युवक, नशे से दूर होकर देश सेवा करेंगे।
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फोटो:27एसजीआरपी01ए: शहीद ऊधम सिंहके रिवाल्वर की फाइल फोटो।
फोटो:27एसजीआरपी01बी: सुनाम के मौहल्लापीलवाद में स्थित शहीद ऊधम सिंह का पैतिृक घर।
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हस्तलिखित पत्र, रिवाल्वर, कपड़े, निजी डायरी लाने की मांग
-शहीद के परिजनों ने फिर से मांग उठाने का किया आग्रह
-लोग जानना चाहते हैं ऊधम सिंह के विदेशी परिवार होने का सत्य
सुशील कुमार
सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर)। सत्तासीन नेताओं के वादों और दावों के बावजूद विदेश से शहीद ऊधम सिंह की जिंदगी का अहम हिस्सा रहा सामान भारत नहीं आ पाया है। जबकि शहीद के परिजनों से लेकर आम लोग शहीद ऊधम सिंह का सामान देश में लाकर, सुनाम में स्थित उनके पैतृक घर (जोकि यहां के पीलवाद मोहल्ले में स्थित है और सरकार ने प्रदेश की धरोहर घोषित किया हुआ है) में रखने की मांग लगातार उठा रहे हैं। लोगों की दिली इच्छा है कि महान शहीद ऊधम सिंह ने जिस रिवाल्वर से माइकल ओडायर को मारा था उसे भारत लाया जाए। ऊधम सिंह के कपडे़, निजी लाल डायरी (जिसमें जलियांवालाबाग में 13 अप्रैल 1919 को हुए नरसंहार का बार-बार जिक्र किया हुआ है), जिस डायरी को काटकर रिवाल्वर छुपाई थी वो डायरी, किताबें और अन्य सामग्री भी देश में लाई जाए। सबसे महत्वपूर्ण शहीद ऊधम सिंह के हस्तलिखित वह पत्र (लंदन की पेंटनविले जेल और बेरिक्सटन जेल यात्रा के दौरान लिखित) भी लाने की मांग हो रही है, जिन पत्रों में ऊधम सिंह ने देश के प्रति और ब्रिटिश हुकूमत के प्रति अपने जज्बात खुलकर लिखे थे और ब्रिटिश सरकार ने पत्रों को सेंसर करने के बाद उन पर पूर्ण तौर पर पाबंदी लगा दी थी। ब्रिटिश सरकार को भय था कि ऊधम सिंह के ऐसे जज्बात सार्वजनिक होने पर भारत में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की चिंगारी, विकराल रूप धारण कर सकती है और भारत में आजादी की लड़ाई प्रचंड हो सकती है।
वादों के प्रति गंभीर नहीं हैं सत्तासीन नेता
वर्तमान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2002 से 2007 तक सीएम रहते इस महान शहीद की नगरी में आयोजित राज्यस्तरीय बलिदान दिवस समारोह में खडे़ होकर कहा था कि शहीद ऊधम सिंह के जीवन से जुड़ी वस्तुओं को स्वदेश लाने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया जाएगा। लेकिन हैरत की बात है कि उस वक्त से लेकर अब तक जनवरी 2004 में पंजाब सरकार की ओर से केंद्र को मात्र एक पत्र ही लिखा गया। इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय की ओर से आरटीआई के जरिए दी गई है। आरटीआई एक्टिविस्ट जतिंदर जैन ने उक्त जानकारी मांगी थी। इसके अलावा वर्ष 2008 में सीएम रहते हुए प्रकाश सिंह बादल ने शहीद ऊधम सिंह का विदेश में रहता परिवार ढूंढने का वादा किया था। लेकिन शहीद के विदेशी परिवार होने अथवा नहीं होने का कोई सत्य सामने नहीं आ सका है और लोग पूछ रहे हैं कि कहां है शहीद का विदेशी परिवार। हालांकि विदेश मंत्रालय ने सूचना अधिकार कानून के तहत बताया है कि ब्रिटिश सरकार ने शहीद ऊधम सिंह के सामान को उस वक्त केस में जोड़कर अपने कब्जे में रखा हुआ है और इसे देने से फिलहाल इकंार कर दिया है। लेकिन शहीद के करीब सौ वर्षीय भांजे खुशी नंद, जीत सिंह आदि ने केंद्र सरकार से मांग दोहराई है कि ब्रिटिश सरकार के समक्ष देश वासियों की भावनाओं को रखकर उक्त सामान देश लाने का प्रयास फिर से किया जाए। खुशी नंद ने कहा कि शहीद ऊधम सिंह के हस्तलिखित पत्र पूरे देश के नौजवानों में देशभक्ति की भावना पैदा करेंगे। खासतौर पर पंजाब के युवक, नशे से दूर होकर देश सेवा करेंगे।
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फोटो:27एसजीआरपी01ए: शहीद ऊधम सिंहके रिवाल्वर की फाइल फोटो।
फोटो:27एसजीआरपी01बी: सुनाम के मौहल्लापीलवाद में स्थित शहीद ऊधम सिंह का पैतिृक घर।