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राजीव गांधी की प्रतिमा पर कालिख पोतने वाले दोनों आरोपियों को मिली जमानत
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राजीव गांधी की प्रतिमा पर कालिख पोतने वालों को मिली जमानत
सोमवार को छुट्टी के चलते मंगलवार शाम को होगी रिहाई
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। सलेम टाबरी इलाके में लगी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की प्रतिमा पर कालिख पोतने के दोनों आरोपियों को सोमवार अदालत ने जमानत दे दी है। सोमवार को छुट्टी होने के कारण होने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो सकी है। अब मंगलवार शाम को जेल से उनकी रिहाई हो पाएगी। दोनों युवा नेताओं की जमानत होने से अकाली दल नेताओं में खुशी की लहर दौड़ गई है।
युवा अकाली नेता गुरदीप गोशा और मीत पाल दुगरी ने बीती 25 दिसंबर की सुबह सलेमटाबरी में लगी राजीव गांधी की प्रतिमा पर कालिख पोत दी थी। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट कर अधिकारियों को सख्त कार्रवाई करने के आदेश जारी किए थे।पुलिस ने तुरंत गोशा और दुगरी पर मामला दर्ज किया और दोपहर गोशा को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी मीत पाल दुगरी ने 26 दिसंबर को शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रमजीत मजीठिया को साथ लेकर अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था।
एक दिन के पुलिस रिमांड के बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। शनिवार को गोशा के वकील गगनप्रीत सिंह और दुगरी के वकील विक्रम सिद्धू ने अदालत में जमानत अर्जी दायर की थी। अर्जी पर सुनवाई की तारीख एक जनवरी रखी गई थी। सोमवार दोनों पक्षों की बहस के लिए अदालत ने जमानत अर्जी को मंजूर कर लिया है। वकील गगनप्रीत सिंह के अनुसार बहस के दौरान उनकी तरफ से यही मुद्दा रखा गया था कि राजीव गांधी की प्रतिमा का किसी धर्म से कोई लेना देना नहीं है। प्रतिमा को निगम या फिर किसी सरकारी विभाग ने नहीं लगवाया है।
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सोमवार को छुट्टी के चलते मंगलवार शाम को होगी रिहाई
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। सलेम टाबरी इलाके में लगी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की प्रतिमा पर कालिख पोतने के दोनों आरोपियों को सोमवार अदालत ने जमानत दे दी है। सोमवार को छुट्टी होने के कारण होने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो सकी है। अब मंगलवार शाम को जेल से उनकी रिहाई हो पाएगी। दोनों युवा नेताओं की जमानत होने से अकाली दल नेताओं में खुशी की लहर दौड़ गई है।
युवा अकाली नेता गुरदीप गोशा और मीत पाल दुगरी ने बीती 25 दिसंबर की सुबह सलेमटाबरी में लगी राजीव गांधी की प्रतिमा पर कालिख पोत दी थी। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट कर अधिकारियों को सख्त कार्रवाई करने के आदेश जारी किए थे।पुलिस ने तुरंत गोशा और दुगरी पर मामला दर्ज किया और दोपहर गोशा को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी मीत पाल दुगरी ने 26 दिसंबर को शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रमजीत मजीठिया को साथ लेकर अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था।
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एक दिन के पुलिस रिमांड के बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। शनिवार को गोशा के वकील गगनप्रीत सिंह और दुगरी के वकील विक्रम सिद्धू ने अदालत में जमानत अर्जी दायर की थी। अर्जी पर सुनवाई की तारीख एक जनवरी रखी गई थी। सोमवार दोनों पक्षों की बहस के लिए अदालत ने जमानत अर्जी को मंजूर कर लिया है। वकील गगनप्रीत सिंह के अनुसार बहस के दौरान उनकी तरफ से यही मुद्दा रखा गया था कि राजीव गांधी की प्रतिमा का किसी धर्म से कोई लेना देना नहीं है। प्रतिमा को निगम या फिर किसी सरकारी विभाग ने नहीं लगवाया है।
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