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बिल पर पंजीकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर होने के प्रावधान के खिलाफ उतरे उघोगपति
Updated Wed, 20 Jun 2018 09:32 PM IST
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हस्ताक्षर की शर्त का विरोध, डीईटीसी को सौंपा मांग पत्र
बिल पर पंजीकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर के प्रावधान के खिलाफ उतरे उद्योगपति
अमर उजाला ब्यूरो
सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर)। जीएसटी के नए प्रावधान के अनुसार जीएसटी पोर्टल पर पंजीकृत व्यक्ति द्वारा ही इनवाइस (बिल) पर हस्ताक्षर होने की शर्त का संगरूर डिस्ट्रिक्ट इंडस्ट्रियल चैंबर ने कड़ा विरोध किया है। इस प्रावधान के विरोध में उतरे उद्योगपतियों ने डीईटीसी (डिप्टी एक्साइज टैक्सेशन कमिश्नर) दरबारा सिंह को मांग पत्र सौंपकर जीएसटी के इस प्रावधान में बदलाव की मांग उठाई है। चैंबर के जिलाध्यक्ष घनश्याम कांसल और चेयरमैन डॉ. एआर शर्मा के नेतृत्व में इंडस्ट्री चैंबर के पदाधिकारियों द्वारा सौंपे मांग पत्र में तर्क दिया गया है कि एक उद्योगपति की कई स्थानों पर कई यूनिट हैं। ऐसे में यह संभव नहीं है कि हरेक बिल पर उसके ही हस्ताक्षर हों। फिजिकल तौर पर उद्योगपति ही कई अन्य कार्यों में व्यस्तता रहती है। लिहाजा जमीनी स्तर पर ऐसा होना संभव नहीं है। उद्योगपतियों ने कहा कि सरकार ने इस प्रावधान का उल्लंघन करने पर प्रति इनवाइस दस हजार रुपये का जुर्माना तय किया है, जो अन्याय है। उद्योगपतियों ने कहा कि इस प्रावधान को तुरंत खत्म किया जाए। सरकार की ओर से ई वे बिल व्यवस्था पहले ही लागू कर दी गई है। इस प्रावधान के मुताबिक हर व्यापारी को 50 हजार से ज्यादा राशीके बिल की जानकारी पहले ही देनी होती है।
डीईटीसी दरबारा सिंह ने उद्योगपतियों को भरोसा दिलाया कि उनकी यह मांग विभाग के उच्च अधिकारियों के सामने रखी जाएंगी। इसे जल्द ही जीएसटी काउंसलि के सामने पेश किया जाएगा। ताकि इसका ठोस समाधान हो सके। इस मौके पर जिला महासचिव संजीव चोपड़ा, कोषाध्यक्ष एमपी सिंह, नवनीत शीतल, अनिल लौंगोवालिया, नितिन गर्ग हाजिर थे।
फोटो:20एसजीआरपी01: डीईटीसी को मांग पत्र सौंपते इंडस्ट्री चैंबर के जिला यूनिट के पदाधिकारी।
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बिल पर पंजीकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर के प्रावधान के खिलाफ उतरे उद्योगपति
अमर उजाला ब्यूरो
सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर)। जीएसटी के नए प्रावधान के अनुसार जीएसटी पोर्टल पर पंजीकृत व्यक्ति द्वारा ही इनवाइस (बिल) पर हस्ताक्षर होने की शर्त का संगरूर डिस्ट्रिक्ट इंडस्ट्रियल चैंबर ने कड़ा विरोध किया है। इस प्रावधान के विरोध में उतरे उद्योगपतियों ने डीईटीसी (डिप्टी एक्साइज टैक्सेशन कमिश्नर) दरबारा सिंह को मांग पत्र सौंपकर जीएसटी के इस प्रावधान में बदलाव की मांग उठाई है। चैंबर के जिलाध्यक्ष घनश्याम कांसल और चेयरमैन डॉ. एआर शर्मा के नेतृत्व में इंडस्ट्री चैंबर के पदाधिकारियों द्वारा सौंपे मांग पत्र में तर्क दिया गया है कि एक उद्योगपति की कई स्थानों पर कई यूनिट हैं। ऐसे में यह संभव नहीं है कि हरेक बिल पर उसके ही हस्ताक्षर हों। फिजिकल तौर पर उद्योगपति ही कई अन्य कार्यों में व्यस्तता रहती है। लिहाजा जमीनी स्तर पर ऐसा होना संभव नहीं है। उद्योगपतियों ने कहा कि सरकार ने इस प्रावधान का उल्लंघन करने पर प्रति इनवाइस दस हजार रुपये का जुर्माना तय किया है, जो अन्याय है। उद्योगपतियों ने कहा कि इस प्रावधान को तुरंत खत्म किया जाए। सरकार की ओर से ई वे बिल व्यवस्था पहले ही लागू कर दी गई है। इस प्रावधान के मुताबिक हर व्यापारी को 50 हजार से ज्यादा राशीके बिल की जानकारी पहले ही देनी होती है।
डीईटीसी दरबारा सिंह ने उद्योगपतियों को भरोसा दिलाया कि उनकी यह मांग विभाग के उच्च अधिकारियों के सामने रखी जाएंगी। इसे जल्द ही जीएसटी काउंसलि के सामने पेश किया जाएगा। ताकि इसका ठोस समाधान हो सके। इस मौके पर जिला महासचिव संजीव चोपड़ा, कोषाध्यक्ष एमपी सिंह, नवनीत शीतल, अनिल लौंगोवालिया, नितिन गर्ग हाजिर थे।
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फोटो:20एसजीआरपी01: डीईटीसी को मांग पत्र सौंपते इंडस्ट्री चैंबर के जिला यूनिट के पदाधिकारी।