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लाल और पीली गाजर की खेती से हो रहा दुगना लाभ
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पीली गाजर की खेती से दुगना लाभ
फतेहगढ़ साहिब का प्रगतिशील किसान इंदरपाल 16 एकड़ में करता है खेती
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहगढ़ साहिब। जिले के गांव चनारथल कलां का प्रगतिशील किसान इंदरपाल सिंह ने खेती विभिन्नता अपनाकर मिसाल पैदा की है। इंदरपाल अपनी 24 एकड़ जमीन में से 8 एकड़ में आम गाजर और 16 एकड़ में पीली गाजर की सफल खेती कर रहा है। इससे उसे आर्थिक तौर पर लाभ पहुंचा है।
किसान इंदरपाल सिंह ने बताया कि आम गाजर 100 दिनों में और पीली गाजर 120 दिनों में तैयार हो जाती है। वह सब्जियों के साथ-साथ धान की खेती भी करता है। पिछले 8 वर्ष से पराली को खेत में ही जोत रहा है। इससे उसके खेत की धरती की उपजाऊ शक्ति बढ़ी है और वहीं धरती में मौजूद मित्र कीड़े जीवित हैं। इंदरपाल ने बताया कि पहले उस ने चार साल कंट्रैक्ट खेती की। कुछ बड़ा करने की सोच के कारण उसने कंट्रैक्ट फार्मिंग छोड़ कर गाजरं की खेती शुरू कर दी। किसान का कहना है कि पीली गाजर अधिक लाभ देती है। पीली गाजर 22 रुपये प्रति किलो तक बिक जाती है। लाल गाजर की कीमत इससे आधी मिलती है। पीली गाजर से उसे प्रति एकड़ एक से डेढ़ लाख रुपये की आमदनी हुई है।
इंदरपाल सिंह की सफलता को देखते हुए गांव के तकरीबन 7-8 किसानों ने भी गाजरों की खेती शुरू की है। प्रगतिशील किसान इंदरपाल सिंह के अनुसार उसे पीली गाजरों की फसल से 150 से 250 क्विंटल तक का झाड़ प्रति एकड़ निकलता है। आम गाजर का झाड़ प्रति एकड़ 100 से 200 क्विंटल तक निकलता है। वह मशीन की मदद से गाजरों की बुआई करता है और मशीन के साथ गाजरों की खोदाई भी करता है।
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किसान इंदरपाल खुद करता हैं गाजर की मार्केटिंग
किसान इंदरपाल सिंह ने बताया कि गाजरों की फसल की मार्केटिंग भी वह खुद करता है और यह चंडीगढ़, लुधियाना, जालंधर और श्री अमृतसर साहिब में बेचता है। खुद मार्केटिंग करने से उसे फसल का अच्छा भाव भी मिलता है। प्रगतिशील किसान इंदरपाल सिंह ने और किसानों को न्योता दिया कि वह बाजार की मांग अनुसार ही फसलों की खेती करे, जिससे फसल का बढ़िया भाव मिल सके और वह आर्थिक तंगी से बाहर निकल सकें।
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फतेहगढ़ साहिब का प्रगतिशील किसान इंदरपाल 16 एकड़ में करता है खेती
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहगढ़ साहिब। जिले के गांव चनारथल कलां का प्रगतिशील किसान इंदरपाल सिंह ने खेती विभिन्नता अपनाकर मिसाल पैदा की है। इंदरपाल अपनी 24 एकड़ जमीन में से 8 एकड़ में आम गाजर और 16 एकड़ में पीली गाजर की सफल खेती कर रहा है। इससे उसे आर्थिक तौर पर लाभ पहुंचा है।
किसान इंदरपाल सिंह ने बताया कि आम गाजर 100 दिनों में और पीली गाजर 120 दिनों में तैयार हो जाती है। वह सब्जियों के साथ-साथ धान की खेती भी करता है। पिछले 8 वर्ष से पराली को खेत में ही जोत रहा है। इससे उसके खेत की धरती की उपजाऊ शक्ति बढ़ी है और वहीं धरती में मौजूद मित्र कीड़े जीवित हैं। इंदरपाल ने बताया कि पहले उस ने चार साल कंट्रैक्ट खेती की। कुछ बड़ा करने की सोच के कारण उसने कंट्रैक्ट फार्मिंग छोड़ कर गाजरं की खेती शुरू कर दी। किसान का कहना है कि पीली गाजर अधिक लाभ देती है। पीली गाजर 22 रुपये प्रति किलो तक बिक जाती है। लाल गाजर की कीमत इससे आधी मिलती है। पीली गाजर से उसे प्रति एकड़ एक से डेढ़ लाख रुपये की आमदनी हुई है।
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इंदरपाल सिंह की सफलता को देखते हुए गांव के तकरीबन 7-8 किसानों ने भी गाजरों की खेती शुरू की है। प्रगतिशील किसान इंदरपाल सिंह के अनुसार उसे पीली गाजरों की फसल से 150 से 250 क्विंटल तक का झाड़ प्रति एकड़ निकलता है। आम गाजर का झाड़ प्रति एकड़ 100 से 200 क्विंटल तक निकलता है। वह मशीन की मदद से गाजरों की बुआई करता है और मशीन के साथ गाजरों की खोदाई भी करता है।
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किसान इंदरपाल खुद करता हैं गाजर की मार्केटिंग
किसान इंदरपाल सिंह ने बताया कि गाजरों की फसल की मार्केटिंग भी वह खुद करता है और यह चंडीगढ़, लुधियाना, जालंधर और श्री अमृतसर साहिब में बेचता है। खुद मार्केटिंग करने से उसे फसल का अच्छा भाव भी मिलता है। प्रगतिशील किसान इंदरपाल सिंह ने और किसानों को न्योता दिया कि वह बाजार की मांग अनुसार ही फसलों की खेती करे, जिससे फसल का बढ़िया भाव मिल सके और वह आर्थिक तंगी से बाहर निकल सकें।