{"_id":"5b59fa784f1c1b50748b749d","slug":"191532623480-ludhiana-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रांसपोर्ट हड़ताल से उद्योग में %कफ्र्यू’ जैसी स्थिति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रांसपोर्ट हड़ताल से उद्योग में %कफ्र्यू’ जैसी स्थिति
Updated Thu, 26 Jul 2018 10:17 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सभी केंद्रों के ध्यानार्थ.................
ट्रांसपोर्ट हड़ताल से उद्योग में कर्र्फ्यू जैसे हालात
-इकाइयों में करीब पांच हजार करोड़ का माल अटका
-माल की आवाजाही रुकने से बंद होने लगीं इकाइयां
-उद्योगों में माल रखने की जगह नहीं, कच्चे माल की भी किल्लत
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का उद्योग जगत पर व्याप्त असर पड़ना शुरू हो गया है और कर्फ्यू जैसे हालात पैदा हो गए हैं। माल की डिस्पैच पूरी तरह से बंद है, तैयार उत्पादों के अंबार लग रहे हैं। जगह और कच्चे माल की कमी के कारण इकाइयां बंद होने लगीं हैं। अस्थायी तौर पर बेरोजगारी बढ़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक यहां के उद्योगों में करीब पांच हजार करोड़ का तैयार माल अटक गया है और सौ इकाइयों में उत्पादन या बंद या न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। उद्यमियों ने साफ किया है कि यदि हड़ताल एक दो दिन में न खुली तो हालत और भी बदतर हो जाएंगे। फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल आर्गेनाइजेशन के चेयरमैन एवं नीलम साइकिल्स के एमडी केके सेठ ने कहा है कि फैक्ट्री में अब और माल रखने की जगह नहीं है। इसलिए वीरवार से मजबूरन प्रोडक्शन बंद करने का फैसला लिया गया है। रोजाना इकाई से सात से आठ ट्रक माल लोड होकर देश के कोने कोने में जाता है, आज एक भी ट्रक नहीं लग पाया। यहां तक की साइकिल की सरकारी सप्लाई भी रुक गई है और जुर्माना लगने का खतरा अलग से मंडरा रहा है। इससे अस्थायी तौर पर बेरोजगारी बढ़ रही है। इसके अलावा पेमेंट की भी भारी किल्लत पैदा हो गई है। गुड टाइम वेंचर्स के मालिक नरेंद्र छिब्बर ने कहा कि हड़ताल के कारण माल समय पर डिलीवरी नहीं हो पा रहा है। इस कारण काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। हीरो साइकिल्स के वाइस चेयरमैन एसके राय का कहना है कि हड़ताल के कारण सारा डिस्पैच पूरी तरह से रुक गया है। उद्योगों में कर्फ्यू जैसे हालात बन गए हैं। इकाई में तैयार माल का स्टॉक भर रहा है। माह के अंत में डिलीवरी टारगेट पूरे करने होते हैं। लेकिन पूरा सिस्टम ही गड़बड़ा रहा है। यदि हालात न सुधरे तो आने वाले दिनों में उत्पादन रोकना पड़ सकता है। एवन साइकिल्स लिमिटेड के चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर ओंकार सिंह पाहवा तर्क है कि ट्रक हड़ताल से उद्योग जगत पर भी ब्रेक लग गया है। इकाई में कच्चा माल नहीं है। प्रोडक्शन को कम करने की नौबत आ गई है, लेकिन यदि हड़ताल लंबी चली तो प्रोडक्शन को मजबूरन रोकना पड़ेगा। मोंटे कार्लो फैशन्स लिमिटेड के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर संदीप जैन कहते हैं कि ट्रक हड़ताल से पूरी औद्योगिक चेन ही डिस्टर्ब हो गई है। माल भेजने के लिए ट्रक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इसलिए माल की डिलीवरी प्रभावित हो रही है। सरकार को चाहिए कि शीघ्र ही ट्रांसपोर्टरों से बात करके उनकी उलझने सुलझाए। क्योंकि इस हड़ताल से हर सेक्टर बुरी तरह प्रभावित है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट्स आर्गेनाइजेशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एससी रल्हन का कहना है कि हड़ताल से सिर्फ निर्यातकों को रोजाना सौ करोड़ का नुकसान हो रहा है। कच्चे माल की भारी कमी के कारण इकाइयां बंद हो रही हैं। करीब सौ इकाइयों में उत्पादन बंद हो गया है। इसके अलावा विदेशी बायर्स से रिश्ते खराब हो रहे हैं। रल्हन का कहना है कि सरकार इसे गंभीरता से ले और हड़ताल खत्म कराए।
विज्ञापन
ट्रांसपोर्ट हड़ताल से उद्योग में कर्र्फ्यू जैसे हालात
-इकाइयों में करीब पांच हजार करोड़ का माल अटका
-माल की आवाजाही रुकने से बंद होने लगीं इकाइयां
-उद्योगों में माल रखने की जगह नहीं, कच्चे माल की भी किल्लत
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का उद्योग जगत पर व्याप्त असर पड़ना शुरू हो गया है और कर्फ्यू जैसे हालात पैदा हो गए हैं। माल की डिस्पैच पूरी तरह से बंद है, तैयार उत्पादों के अंबार लग रहे हैं। जगह और कच्चे माल की कमी के कारण इकाइयां बंद होने लगीं हैं। अस्थायी तौर पर बेरोजगारी बढ़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक यहां के उद्योगों में करीब पांच हजार करोड़ का तैयार माल अटक गया है और सौ इकाइयों में उत्पादन या बंद या न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। उद्यमियों ने साफ किया है कि यदि हड़ताल एक दो दिन में न खुली तो हालत और भी बदतर हो जाएंगे। फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल आर्गेनाइजेशन के चेयरमैन एवं नीलम साइकिल्स के एमडी केके सेठ ने कहा है कि फैक्ट्री में अब और माल रखने की जगह नहीं है। इसलिए वीरवार से मजबूरन प्रोडक्शन बंद करने का फैसला लिया गया है। रोजाना इकाई से सात से आठ ट्रक माल लोड होकर देश के कोने कोने में जाता है, आज एक भी ट्रक नहीं लग पाया। यहां तक की साइकिल की सरकारी सप्लाई भी रुक गई है और जुर्माना लगने का खतरा अलग से मंडरा रहा है। इससे अस्थायी तौर पर बेरोजगारी बढ़ रही है। इसके अलावा पेमेंट की भी भारी किल्लत पैदा हो गई है। गुड टाइम वेंचर्स के मालिक नरेंद्र छिब्बर ने कहा कि हड़ताल के कारण माल समय पर डिलीवरी नहीं हो पा रहा है। इस कारण काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। हीरो साइकिल्स के वाइस चेयरमैन एसके राय का कहना है कि हड़ताल के कारण सारा डिस्पैच पूरी तरह से रुक गया है। उद्योगों में कर्फ्यू जैसे हालात बन गए हैं। इकाई में तैयार माल का स्टॉक भर रहा है। माह के अंत में डिलीवरी टारगेट पूरे करने होते हैं। लेकिन पूरा सिस्टम ही गड़बड़ा रहा है। यदि हालात न सुधरे तो आने वाले दिनों में उत्पादन रोकना पड़ सकता है। एवन साइकिल्स लिमिटेड के चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर ओंकार सिंह पाहवा तर्क है कि ट्रक हड़ताल से उद्योग जगत पर भी ब्रेक लग गया है। इकाई में कच्चा माल नहीं है। प्रोडक्शन को कम करने की नौबत आ गई है, लेकिन यदि हड़ताल लंबी चली तो प्रोडक्शन को मजबूरन रोकना पड़ेगा। मोंटे कार्लो फैशन्स लिमिटेड के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर संदीप जैन कहते हैं कि ट्रक हड़ताल से पूरी औद्योगिक चेन ही डिस्टर्ब हो गई है। माल भेजने के लिए ट्रक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इसलिए माल की डिलीवरी प्रभावित हो रही है। सरकार को चाहिए कि शीघ्र ही ट्रांसपोर्टरों से बात करके उनकी उलझने सुलझाए। क्योंकि इस हड़ताल से हर सेक्टर बुरी तरह प्रभावित है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट्स आर्गेनाइजेशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एससी रल्हन का कहना है कि हड़ताल से सिर्फ निर्यातकों को रोजाना सौ करोड़ का नुकसान हो रहा है। कच्चे माल की भारी कमी के कारण इकाइयां बंद हो रही हैं। करीब सौ इकाइयों में उत्पादन बंद हो गया है। इसके अलावा विदेशी बायर्स से रिश्ते खराब हो रहे हैं। रल्हन का कहना है कि सरकार इसे गंभीरता से ले और हड़ताल खत्म कराए।