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सात माह पीछे से बिजली बढ़ोतरी लागू करने से हर फर्नेस इकाई को अस्सी लाख का नुकसान
Updated Thu, 30 Nov 2017 10:02 PM IST
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बिजली की दरों में बढ़ोतरी से फर्नेस इकाई को झटका
अप्रैल से दरें लागू करने पर छोटी यूनिट को 80 लाख, बड़ी को पांच करोड़ की चपत
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन ऑफ नार्दर्न इंडिया ने सूबे में बिजली की दरों में वृद्धि को अप्रैल 2017 से लागू करने का विरोध किया है। एसोसिएशन का दावा है कि इस वजह से सूबे की हर छोटी फर्नेस इकाई को 80 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। मध्यम और बड़ी इकाइयों को तीन से पांच करोड़ की चपत लगी है। इस उद्योग पर कुल 650 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ा है। इसकी भरपाई किसी तरीके से संभव नहीं है।
एसोसिएशन ने कहा कि अक्तूबर में सूबे में बिजली दरों में वृद्धि का एलान किया गया और बढ़ी दरों को एक अप्रैल से लागू करने की बात की गई। उद्यमियों का तर्क है कि बिजली इंडक्शन फर्नेस उद्योग में कच्चा माल है। एक टन लोहा बनाने में करीब आठ सौ यूनिट से अधिक बिजली खर्च होती है। ऐसे में सात माह पीछे के माल पर सीधा ही नुकसान हो रहा है।
एसोसिएशन के प्रधान केके गर्ग एवं महासचिव देव गुप्ता कहना है कि सूबे में अब यूनिट चलाना कठिन हो रहा है। वायबिलिटी खत्म हो रही है। 50 फीसदी इकाइयां बंद हो चुकी हैं। 30 फीसदी बिकाऊ हैं लेकिन खरीदार नहीं हैं। यदि यही हालात रहे तो सूबे में सेकेंडरी स्टील उद्योग खत्म हो जाएगा। एसोसिएशन ने गुहार लगाई है कि बिजली की दरों में इजाफे को वापस लिया जाए।
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अप्रैल से दरें लागू करने पर छोटी यूनिट को 80 लाख, बड़ी को पांच करोड़ की चपत
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन ऑफ नार्दर्न इंडिया ने सूबे में बिजली की दरों में वृद्धि को अप्रैल 2017 से लागू करने का विरोध किया है। एसोसिएशन का दावा है कि इस वजह से सूबे की हर छोटी फर्नेस इकाई को 80 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। मध्यम और बड़ी इकाइयों को तीन से पांच करोड़ की चपत लगी है। इस उद्योग पर कुल 650 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ा है। इसकी भरपाई किसी तरीके से संभव नहीं है।
एसोसिएशन ने कहा कि अक्तूबर में सूबे में बिजली दरों में वृद्धि का एलान किया गया और बढ़ी दरों को एक अप्रैल से लागू करने की बात की गई। उद्यमियों का तर्क है कि बिजली इंडक्शन फर्नेस उद्योग में कच्चा माल है। एक टन लोहा बनाने में करीब आठ सौ यूनिट से अधिक बिजली खर्च होती है। ऐसे में सात माह पीछे के माल पर सीधा ही नुकसान हो रहा है।
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एसोसिएशन के प्रधान केके गर्ग एवं महासचिव देव गुप्ता कहना है कि सूबे में अब यूनिट चलाना कठिन हो रहा है। वायबिलिटी खत्म हो रही है। 50 फीसदी इकाइयां बंद हो चुकी हैं। 30 फीसदी बिकाऊ हैं लेकिन खरीदार नहीं हैं। यदि यही हालात रहे तो सूबे में सेकेंडरी स्टील उद्योग खत्म हो जाएगा। एसोसिएशन ने गुहार लगाई है कि बिजली की दरों में इजाफे को वापस लिया जाए।
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