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शौद्ध पत्रों में भाषा की गलतियां एक बड़ी समस्या-भाटिया
Updated Wed, 03 Jan 2018 10:45 PM IST
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शोध व अनुसंधान पर एक साप्ताहिक वर्कशॉप
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी गोबिंदगढ़।
रिमट यूनिवर्सिटी में शोध व अनुसंधान पर एक साप्ताहिक वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. एएस चावला ने किया। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में आ रहे बदलाव से वर्तमान ज्ञान में सच्चाई और उसकी वैधता-परीक्षण की निरंतर आवश्यकता बनी रहती है। यह काम सिर्फ शिक्षा, अनुसंधान और शोध के माध्यम से ही पूरा किया जा सकता है। यह वर्कशॉप ‘डाटा एनालिसिस थ्रू स्पेशल पैकेज फॉर सोशल साइंसेज’ विषय पर आधारित थी। इसमें 29 शोधकर्ता भाग ले रहे हैं।
चावला ने कहा कि शिक्षा के दो मकसद होते हैं। पहला ज्ञान की प्राप्ति और दूसरा ज्ञान में कुछ नया जोड़ना है। वाइस चांसलर ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के विस्तार ने पूरी दुनिया के ज्ञान तंत्र की सीमाओं को खोल दिया है। उन्होंने कहा कि शोध के लिए चाहे स्रोत ढूंढना पहले से आसान हो गया है। इसका भरपूर उपयोग किया जा सकता है।
यूनिवर्सिटी के प्रो वाइस चांसलर डॉ. बीएस भाटिया ने कहा कि शोध का उद्देश्य महज डिग्री की प्राप्ति न होकर सामाजिक की भलाई होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंटरनेट के युग में अब हेराफेरी की संभावनाएं पहले से बहुत कम हो गई है।
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फोटो कैप्शन:03जीबीजीपी05: वर्कशाप में शौद्धकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रो-वाईस चांसलर डा. बी एस भाटिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
मंडी गोबिंदगढ़।
रिमट यूनिवर्सिटी में शोध व अनुसंधान पर एक साप्ताहिक वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. एएस चावला ने किया। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में आ रहे बदलाव से वर्तमान ज्ञान में सच्चाई और उसकी वैधता-परीक्षण की निरंतर आवश्यकता बनी रहती है। यह काम सिर्फ शिक्षा, अनुसंधान और शोध के माध्यम से ही पूरा किया जा सकता है। यह वर्कशॉप ‘डाटा एनालिसिस थ्रू स्पेशल पैकेज फॉर सोशल साइंसेज’ विषय पर आधारित थी। इसमें 29 शोधकर्ता भाग ले रहे हैं।
चावला ने कहा कि शिक्षा के दो मकसद होते हैं। पहला ज्ञान की प्राप्ति और दूसरा ज्ञान में कुछ नया जोड़ना है। वाइस चांसलर ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के विस्तार ने पूरी दुनिया के ज्ञान तंत्र की सीमाओं को खोल दिया है। उन्होंने कहा कि शोध के लिए चाहे स्रोत ढूंढना पहले से आसान हो गया है। इसका भरपूर उपयोग किया जा सकता है।
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यूनिवर्सिटी के प्रो वाइस चांसलर डॉ. बीएस भाटिया ने कहा कि शोध का उद्देश्य महज डिग्री की प्राप्ति न होकर सामाजिक की भलाई होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंटरनेट के युग में अब हेराफेरी की संभावनाएं पहले से बहुत कम हो गई है।
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फोटो कैप्शन:03जीबीजीपी05: वर्कशाप में शौद्धकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रो-वाईस चांसलर डा. बी एस भाटिया।