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किसान की जमीन की कुर्की करने आए अधिकारियों को करना पड़ा विरोध का सामना
Updated Thu, 04 Jan 2018 10:17 PM IST
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अधिकारियों के सामने धरने पर बैठकर किसानों ने शुरू किया विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
संगरूर। जिले के गांव चूड़ल कलां में किसान की जमीन की कुर्की करने पहुंचे अधिकारियों को भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां की अगुवाई में पहुंचे किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध के चलते अधिकारी बिना कुर्की किए ही वापस लौट गए।
भाकियू उग्राहां के लहरागागा के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह पिशौर ने बताया कि गांव चूड़ल कलां के किसान राम सिंह की जमीन की कुर्की करने के लिए नायब तहसीलदार और पटवारी अपने अमले के साथ पहुंचे थे। इसकी भनक उनकी जत्थेबंदी को लगी तो बड़ी तादाद में किसान गांव चूड़ल कलां पहुंच गए और कुर्की करने आए अधिकारियों की गाड़ी को घेरकर धरने पर बैठ गए। इसके कारण अधिकारी बिना कोई कार्रवाई किए लौट गए।
उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले कैप्टन सरकार ने वादा किया था कि किसान-मजदूरों का कर्ज माफ किया जाएगा। सत्ता में आते ही वह अपने वादे से पीछे भाग रही है। इससे साफ है कि कैप्टन की कथनी और करनी में अंतर है। राज्य में रोजाना किसान खुदकुशी कर रहे हैं लेकिन सरकार की नींद नहीं टूट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सूदखोर आढ़ती व बैंक किसानों से खाली चेक ले लेते हैं। इसके बाद अपनी मर्जी से रुपये भर लेते हैं जिसका जत्थेबंदी लंबे समय से विरोध करती रही है। उन्होंने एलान किया कि किसी भी किसान व मजदूर की जमीन जायदाद की कुर्की नहीं होने दी जाएगी। इन्हीं मांगों के लिए 22 से 26 जनवरी तक पक्के मोर्चे लगाए जाएंगे।
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फोटो:04एसजीआरपी01 संगरूर के गांव चूड़ल कलां में जमीन की कुर्की के विरोध में धरना लगाए हुए किसान।
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अमर उजाला ब्यूरो
संगरूर। जिले के गांव चूड़ल कलां में किसान की जमीन की कुर्की करने पहुंचे अधिकारियों को भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां की अगुवाई में पहुंचे किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध के चलते अधिकारी बिना कुर्की किए ही वापस लौट गए।
भाकियू उग्राहां के लहरागागा के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह पिशौर ने बताया कि गांव चूड़ल कलां के किसान राम सिंह की जमीन की कुर्की करने के लिए नायब तहसीलदार और पटवारी अपने अमले के साथ पहुंचे थे। इसकी भनक उनकी जत्थेबंदी को लगी तो बड़ी तादाद में किसान गांव चूड़ल कलां पहुंच गए और कुर्की करने आए अधिकारियों की गाड़ी को घेरकर धरने पर बैठ गए। इसके कारण अधिकारी बिना कोई कार्रवाई किए लौट गए।
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उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले कैप्टन सरकार ने वादा किया था कि किसान-मजदूरों का कर्ज माफ किया जाएगा। सत्ता में आते ही वह अपने वादे से पीछे भाग रही है। इससे साफ है कि कैप्टन की कथनी और करनी में अंतर है। राज्य में रोजाना किसान खुदकुशी कर रहे हैं लेकिन सरकार की नींद नहीं टूट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सूदखोर आढ़ती व बैंक किसानों से खाली चेक ले लेते हैं। इसके बाद अपनी मर्जी से रुपये भर लेते हैं जिसका जत्थेबंदी लंबे समय से विरोध करती रही है। उन्होंने एलान किया कि किसी भी किसान व मजदूर की जमीन जायदाद की कुर्की नहीं होने दी जाएगी। इन्हीं मांगों के लिए 22 से 26 जनवरी तक पक्के मोर्चे लगाए जाएंगे।
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फोटो:04एसजीआरपी01 संगरूर के गांव चूड़ल कलां में जमीन की कुर्की के विरोध में धरना लगाए हुए किसान।