आम बजट में फिर पंजाब की झोली खाली, दम तोड़ते उद्योगों को नहीं मिली संजीवनी, उद्यमी बोले- निराशा हाथ लगी
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केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीमतारमण ने सोमवार को आम बजट पेश किया और पिछले साल की तरह इस बार भी निराशा ही हाथ लगी। इसमें सरहदी सूबा होने के बावजूद पंजाब के लिए कोई खास घोषणा नहीं की गई। वहीं टैक्स की दरों को लेकर भी निराशापूर्ण प्रतिक्रियाएं मिली हैं। निर्यातकों से लेकर आयातकों तक में निराशा है।
इंडस्ट्री से लेकर तमाम सेक्टर निराशा हैं। पलायन कर रही इंडस्ट्री के लिए भी किसी तरह के पैकेज की घोषणा नहीं की गई है। अटारी बॉर्डर से ट्रेड बंद होने से काफी व्यापारियों की हालत खस्ता हो चुकी है।
इंडस्ट्रियल एंड ट्रेडर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी के कन्वीनर गुरशरण सिंह ने कहा कि इस बजट को इंडस्ट्री का बजट तो बिल्कुल नहीं कहा जा सकता। बजट में किसी भी इंडस्ट्री के लिए कोई भी नया प्रावधान नहीं किया गया है। बजट में अन्य इंडस्ट्रीज की तरह लेदर इंडस्ट्री को भी कुछ नहीं मिला है। जालंधर में लेदर इंडस्ट्री दम तोड़ रही है लेकिन उसके लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया। मोटे तौर कहा जाए तो इंडस्ट्री के लिए बजट में कुछ भी नहीं है। स्पोर्ट्स इंडस्ट्री की हालत खस्ता हो चुकी है। माल चीन से आयात करना पड़ रहा है।
खेल उद्योग संघ के रविंदर धीर का कहना है कि पंजाब के किसान जिस आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं, उसे देखते हुए केंद्र को विशेष कदम उठाने चाहिए थे लेकिन केंद्र ने ध्यान नहीं दिया। जबकि पंजाब में कर्ज के चलते किसान आए दिन खुदकुशी कर रहे हैं। किसानों के लिए उलटा कर्ज का प्रावधान कर दिया है।
मोगा-कोटकपूरा, नवांशहर-अमृतसर नई रेल लाइन की मांग भी लंबित
पाकिस्तान से सटा होने के कारण माझा व मालवा के कई जिले इससे बुरी तरह से प्रभावित हैं। सरहदी जिलों में ढांचागत विकास के लिए केंद्रीय परियोजनाओं की मांग राज्य सरकार द्वारा की जाती रही है। देश की सीमा से सटे राज्यों के लिए बजट में कोई घोषणा नहीं की गई। चंडीगढ़ को सीधे मालवा से जोड़ने की मांगों के अलावा मोगा-कोटकपूरा, नवांशहर-अमृतसर नई रेल लाइन की मांग भी लंबित है।
पंजाब सरकार विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग करती रही है। पड़ोसी हिमाचल को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के बाद पंजाब से जबरदस्त उद्योगों का पलायन हुआ है। पंजाब की इंडस्ट्री बद्दी व गगरेट शिफ्ट हो चुकी है। काफी उद्योग जम्मू-कश्मीर के कठुआ पलायन कर गए हैं। पंजाब का खेल उद्योग मेरठ पलायन कर गया।
पिछले तीन बजट रहे निशापूर्ण
पिछले तीन बजट पंजाब के लिए निराशापूर्ण रहे। 2018-19 के आम बजट में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर न कुछ सस्ता और न कुछ महंगा रहा। किसी बड़ी योजना के बिना पंजाब को मायूस कर गया। वहीं 2019-20 के आम बजट में भी पंजाब की लंबे समय से चली आ रही अधिकांश मांगें लंबित ही रहीं।
पंजाब सरकार के लिए बीता साल केंद्र के साथ अच्छे संबंधों वाला नहीं साबित हुआ। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल और अन्य मंत्री विभिन्न विकास योजनाओं को लागू करवाने और पुरानी योजनाओं की बकाया राशि जारी करवाने के लिए बार-बार दिल्ली के चक्कर लगाते रहे और प्रधानमंत्री के अलावा संबंधित मंत्रियों से बैठकें करते रहे।
पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के पिछले दो साल केंद्र सरकार के साथ ठीक ठाक नहीं रहे हैं। जहां कैप्टन ने सीएए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी देकर केंद्र से रिश्तों में खटास रखी, वहीं अब किसानी कानूनों को लेकर कैप्टन सरकार के स्टैंड से केंद्र के साथ रिश्ते काफी खराब हुए हैं।
महंगाई से हाहाकार, आम नागरिक बजट से निराश
आम बजट से आम नागरिकों में निराशा है। उनका एक सुर में कहना है कि महंगाई से हाहाकार है। पेट्रोल से लेकर रसोई गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं। कोरोना के कारण कारोबार जमीन पर है, ऐसे में लोगों को राहत दी जानी चाहिए थी लेकिन सेस लगाकर काफी वस्तुओं के दाम में और बढ़ोतरी कर दी गई है।
पेशे से सुनार अनुज चोपड़ा की आयकर रिर्टन छह लाख के आसपास है। उनका कहना है कि वह छह लाख रिटर्न भरते हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेट्रोल पर 2.50 रुपये और डीजल पर 4 रुपये का कृषि सेस लगाने का एलान किया है।
मोबाइल पर भी सेस लगा दिया गया है। हालांकि, ऐसा कहा जा रहा है कि इसका असर उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा। माना जा रहा है कि ये सेस कंपनियों को देना होगा। कंपनियां जेब से नहीं डालेंगी बल्कि ग्राहकों से ही निकालेंगी। पेट्रोल-डीजल के भाव पहले ही आसमान छू रहे हैं। महंगाई बढ़ती जा रही है, यह बजट महंगाई को बढ़ाने वाला ही है।
सरकार से राहत की उम्मीद थी, यह क्या किया
पेशे से कारोबारी और निजी चैनल के संचालक निखिल शर्मा का मध्यम वर्गीय परिवार है। निखिल शर्मा कारोबारी के साथ साथ निजी चैनल के संचालक भी हैं। करीब आठ लाख रुपये का रिटर्न भरने वाले निखिल शर्मा का कहना है कि कोरोना महामारी के भीषण संकट के दौरा में देश के इस आम बजट से देशवासियों को काफी उम्मीदें थीं लेकिन निराशा ही मिली है।
बजट में राहत का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया के पुराने नारों की तरह अब आत्मनिर्भर के नए नारे के साथ आंकड़ों में हेराफेरी कर जनता को गुमराह किया गया है। हर वस्तु महंगी हो रही है। डीजल के दाम आसमान को छू रहे हैं। जिससे कीमतों पर भारी असर हो रहा है। आम नागरिकों को कोरोना संक्रमण में काफी नुकसान हुआ है, सरकार से राहत की उम्मीद थी लेकिन पल्ले कुछ नहीं पड़ा।