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Punjab: पावरकॉम के डिप्टी चीफ इंजीनियर समेत 15 पर भ्रष्टाचार का केस दर्ज, छह साल जांच के बाद कार्रवाई
Sat, 07 Oct 2023 12:04 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 07 Oct 2023 12:04 PM IST
सार
पावरकॉम के चरणदीप संधू की शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया है। यह मामला ठेकेदार को 4.78 करोड़ रुपये अधिक अदायगी से संबंधित है, जिसे लेकर विजिलेंस द्वारा कार्रवाई की गई है। इस घोटाले का पर्दाफाश अमर उजाला ने 2017 में किया था।
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पंजाब विजिलेंस ब्यूरो।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने छह साल पुराने मामले में पावरकॉम के डिप्टी चीफ इंजीनियर परमिंदर सिंह समेत 15 अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इस घोटाले का पर्दाफाश अमर उजाला ने 2017 में किया था। विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव ए वेणु प्रसाद ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए थे। मामले की जांच के लिए विभाग ने तत्कालीन डिप्टी चीफ इंजीनियर संजीव शर्मा, एक्सईएन पवन कुमार और जालंधर के डिप्टी सीए को जिम्मेदारी दी थी।
पावरकॉम के चरणदीप संधू की शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया है। यह मामला ठेकेदार को 4.78 करोड़ रुपये अधिक अदायगी से संबंधित है, जिसे लेकर विजिलेंस द्वारा कार्रवाई की गई है। जांच में पाया कि पूर्व डिप्टी चीफ इंजीनियर परमिंदर सिंह के कार्यकाल 2010 के दौरान होशियारपुर सर्कल में पिल्लरों पर बिजली के मीटर लगवाने का काम किया गया। परमिंदर सिंह उस समय एडिशनल एसई थे व उनके पास डीडीओ ड्राइंग एंड डिस्बरसग अधिकारी के अधिकार भी थे।
यह भी पढ़ें: गर्व: दुनिया के टॉप वैज्ञानिकों की सूची जारी, चंडीगढ़ पीयू के 18 और पीजीआई के 23 साइंटिस्ट का नाम शामिल
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बिजली के मीटरों को पिलरों पर लगाने वाली फर्में मैसर्ज विद्या टेलीलिंकर्ज को इंजी परमिंदर सिंह द्वारा अधिक पेमेंट करवाई गई। पावरकॉम की जांच में साफ हुआ कि ठेकेदार के मेटीरियल सप्लाई से संबंधित प्रत्येक बिल के समान की सही स्थिति संबंधी सीनियर इंजीनियरों से तसदीक करवाई जाती तो सही स्थिति का पता चल जाता। ठेकेदार अधिक राशि प्राप्त नहीं कर सकता था। वितरण हलका होशियारपुर के किसी भी अधिकारी द्वारा बचे हुए समान को संभालने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया, जिसके चलते ठेकेदार द्वारा इसे डिस्पोज ऑफ कर दिया गया।
परमिंदर सिंह (डिप्टी चीफ इंजी., सेवा मुक्त) सहित 15 अन्य अधिकारियों द्वारा अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए 4.78 करोड़ रुपये की अधिक पेमैंट मैसर्ज विद्या टैलीलिंकर्ज लि. को करके वित्तीय लाभ पहुंचाया गया।
आखिरकार मामला 2019 को विजिलेंस के पास पहुंचा, विजिलेंस ने इसकी जांच शुरू की और अब छह साल बाद मामला दर्ज कर लिया गया है। लेकिन इस छह साल में दो अधिकारियों का देहांत हो चुका है। लिहाजा स्टेट विजिलेंस ब्यूरो बाकी 13 आरोपियों की तलाश कर रही है।
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पावरकॉम के चरणदीप संधू की शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया है। यह मामला ठेकेदार को 4.78 करोड़ रुपये अधिक अदायगी से संबंधित है, जिसे लेकर विजिलेंस द्वारा कार्रवाई की गई है। जांच में पाया कि पूर्व डिप्टी चीफ इंजीनियर परमिंदर सिंह के कार्यकाल 2010 के दौरान होशियारपुर सर्कल में पिल्लरों पर बिजली के मीटर लगवाने का काम किया गया। परमिंदर सिंह उस समय एडिशनल एसई थे व उनके पास डीडीओ ड्राइंग एंड डिस्बरसग अधिकारी के अधिकार भी थे।
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बिजली के मीटरों को पिलरों पर लगाने वाली फर्में मैसर्ज विद्या टेलीलिंकर्ज को इंजी परमिंदर सिंह द्वारा अधिक पेमेंट करवाई गई। पावरकॉम की जांच में साफ हुआ कि ठेकेदार के मेटीरियल सप्लाई से संबंधित प्रत्येक बिल के समान की सही स्थिति संबंधी सीनियर इंजीनियरों से तसदीक करवाई जाती तो सही स्थिति का पता चल जाता। ठेकेदार अधिक राशि प्राप्त नहीं कर सकता था। वितरण हलका होशियारपुर के किसी भी अधिकारी द्वारा बचे हुए समान को संभालने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया, जिसके चलते ठेकेदार द्वारा इसे डिस्पोज ऑफ कर दिया गया।
परमिंदर सिंह (डिप्टी चीफ इंजी., सेवा मुक्त) सहित 15 अन्य अधिकारियों द्वारा अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए 4.78 करोड़ रुपये की अधिक पेमैंट मैसर्ज विद्या टैलीलिंकर्ज लि. को करके वित्तीय लाभ पहुंचाया गया।
आखिरकार मामला 2019 को विजिलेंस के पास पहुंचा, विजिलेंस ने इसकी जांच शुरू की और अब छह साल बाद मामला दर्ज कर लिया गया है। लेकिन इस छह साल में दो अधिकारियों का देहांत हो चुका है। लिहाजा स्टेट विजिलेंस ब्यूरो बाकी 13 आरोपियों की तलाश कर रही है।