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‘टैक्स वापस न लिया तो बंद करेंगे व्यापार’
अमर उजाला, जालंधर
Updated Thu, 05 Dec 2013 11:06 PM IST
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राज्य सरकार की तरफ से कृषि उत्पादों पर लगाए चार फीसदी टैक्स को व्यापारियों ने देने से मना कर दिया है। व्यापारियों के मुताबिक अगर सरकार ने टैक्स वापस न लिया तो वे व्यापार बंद कर देंगे।
पंजाब दाल मर्चेंट एंड मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन ने राज्य सरकार को 15 दिसंबर तक का समय दिया है। इसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का दावा किया है। वीरवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों के साथ बातचीत में एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि गांव के विकास के लिए इस टैक्स में राज्य सरकार ने दो फीसदी हिस्सा रखा है।
लगाए जाने वाले चार फीसदी टैक्स में दो फीसदी मार्केट फीस और दो फीसदी आरडीएफ (रुरल डेवलपमेंट फंड) शामिल किया गया है। इस टैक्स को व्यापारियों ने जनता पर बोझ बताया है। प्रधान अनूप जिंदल तथा गुरचरण अरोड़ा ने संयुक्त रूप में कहा कि देश में ऐसा कोई प्रदेश नहीं है जहां, कृषि उत्पादों पर टैक्स लगाया जाता है।
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उन्होंने कहा कि 1995 में कांग्रेस सरकार ने कृषि उत्पादों में मार्केट फीस खत्म कर सभी वर्ग को राहत दी थी। अब इस टैक्स को फिर लगाकर राज्य सरकार ने साबित कर दिया है कि वह लोगों को पेट भर खाना खाते हुए देख खुश नहीं है। इस समय राज्य की मांग को पूरा करने के लिए व्यापारी वर्ग राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, यूपी तथा महाराष्ट्र से दालें मंगवा रहा है। पंजाब में तो दालों का उत्पादन महज डिमांड के मुकाबले एक फीसदी है। ऐसे में पंजाब की जनता को दालों की महंगी खरीद करनी होगी।
नेताओं के दरबार में भी मिली निराशा
कृषि टैक्स वापस करवाने के लिए व्यापारियों ने कई नेताओं के दरवाजे खटखटाए हैं लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी है। एसोसिएशन के सदस्यों के मुताबिक अभी तक वे नरोतम दत्त, कमल शर्मा, केडी भंडारी, मदन लाल बग्गा और तीक्ष्ण सूद से मिल चुके हैं। इन नेताओं ने कहा कि इसका फैसला सुखबीर बादल ही कर सकते हैं।
दो फाड़ हो गई यूनियन
प्रेस वार्ता करने पहुंची व्यापारियों की यूनियन इस मौके दो फाड़ दिखाई दी। एक तरफ नेताओं ने बताया कि वे दिल्ली चुनाव में अकाली दल के पक्ष में प्रचार करने गए थे, इसके पीछे ही सरकार ने उन टैक्स थोप दिया है। जालंधर दाल मर्चेंट एसोेसिएशन से धनी राम गुप्ता ने कहा कि इस समय पंजाब में सांस लेने पर ही टैक्स लगाना बाकी है। जैसे ही धनी राम ने यह कहना आरंभ किया तो यूनियन के दूसरे सदस्य उन्हें चुप करवाते रहे। इस दौरान प्रितपाल सिंह लुधियाना को बीच में ही प्रेस कान्फ्रेंस छोड़ जाना पड़ा।
यह सदस्य थे मौजूद
प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान प्रितपाल सिंह, काल्पनिक बांसल, जगदीश अग्रवाल, यशपाल गुप्ता, विनोद कालड़ा, धनी राम गुप्ता, अनूप जिंदल, गुरचरण अरोड़ा के अतिरिक्त एसोसिएशन के कई सदस्य मौजूद थे।
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पंजाब दाल मर्चेंट एंड मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन ने राज्य सरकार को 15 दिसंबर तक का समय दिया है। इसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का दावा किया है। वीरवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों के साथ बातचीत में एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि गांव के विकास के लिए इस टैक्स में राज्य सरकार ने दो फीसदी हिस्सा रखा है।
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लगाए जाने वाले चार फीसदी टैक्स में दो फीसदी मार्केट फीस और दो फीसदी आरडीएफ (रुरल डेवलपमेंट फंड) शामिल किया गया है। इस टैक्स को व्यापारियों ने जनता पर बोझ बताया है। प्रधान अनूप जिंदल तथा गुरचरण अरोड़ा ने संयुक्त रूप में कहा कि देश में ऐसा कोई प्रदेश नहीं है जहां, कृषि उत्पादों पर टैक्स लगाया जाता है।
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उन्होंने कहा कि 1995 में कांग्रेस सरकार ने कृषि उत्पादों में मार्केट फीस खत्म कर सभी वर्ग को राहत दी थी। अब इस टैक्स को फिर लगाकर राज्य सरकार ने साबित कर दिया है कि वह लोगों को पेट भर खाना खाते हुए देख खुश नहीं है। इस समय राज्य की मांग को पूरा करने के लिए व्यापारी वर्ग राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, यूपी तथा महाराष्ट्र से दालें मंगवा रहा है। पंजाब में तो दालों का उत्पादन महज डिमांड के मुकाबले एक फीसदी है। ऐसे में पंजाब की जनता को दालों की महंगी खरीद करनी होगी।
नेताओं के दरबार में भी मिली निराशा
कृषि टैक्स वापस करवाने के लिए व्यापारियों ने कई नेताओं के दरवाजे खटखटाए हैं लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी है। एसोसिएशन के सदस्यों के मुताबिक अभी तक वे नरोतम दत्त, कमल शर्मा, केडी भंडारी, मदन लाल बग्गा और तीक्ष्ण सूद से मिल चुके हैं। इन नेताओं ने कहा कि इसका फैसला सुखबीर बादल ही कर सकते हैं।
दो फाड़ हो गई यूनियन
प्रेस वार्ता करने पहुंची व्यापारियों की यूनियन इस मौके दो फाड़ दिखाई दी। एक तरफ नेताओं ने बताया कि वे दिल्ली चुनाव में अकाली दल के पक्ष में प्रचार करने गए थे, इसके पीछे ही सरकार ने उन टैक्स थोप दिया है। जालंधर दाल मर्चेंट एसोेसिएशन से धनी राम गुप्ता ने कहा कि इस समय पंजाब में सांस लेने पर ही टैक्स लगाना बाकी है। जैसे ही धनी राम ने यह कहना आरंभ किया तो यूनियन के दूसरे सदस्य उन्हें चुप करवाते रहे। इस दौरान प्रितपाल सिंह लुधियाना को बीच में ही प्रेस कान्फ्रेंस छोड़ जाना पड़ा।
यह सदस्य थे मौजूद
प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान प्रितपाल सिंह, काल्पनिक बांसल, जगदीश अग्रवाल, यशपाल गुप्ता, विनोद कालड़ा, धनी राम गुप्ता, अनूप जिंदल, गुरचरण अरोड़ा के अतिरिक्त एसोसिएशन के कई सदस्य मौजूद थे।