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Hindi News ›   Punjab ›   Jalandhar News ›   Punjab Assembly Election: Aam Aadmi Party Convenor Arvind Kejriwal is now talks about nationalism 

पंजाब की सत्ता की डगर: पिछली बार गर्मख्यालियों से नजदीकी के कारण मिली थी हार, अब राष्ट्रवाद की नैया पर सवार हुए केजरीवाल

Thu, 16 Dec 2021 01:16 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 16 Dec 2021 01:16 PM IST
सार

2017 में आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) के पूर्व आतंकी गुरविंदर सिंह की कोठी में रात गुजारकर आरोपों में घिर गए थे। तमाम विरोधी दलों ने केजरीवाल को बुरी तरह घेर लिया था और उनको पंजाब की अमन शांति को खतरा बताकर पंजाब में खूब शोर शराबा किया।

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Punjab Assembly Election: Aam Aadmi Party Convenor Arvind Kejriwal is now talks about nationalism 
जालंधर में तिरंगा यात्रा में शामिल अरविंद केजरीवाल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।

विस्तार

आम आदमी पार्टी पंजाब में 2017 के चुनाव में लगे कट्टरपंथियों से नजदीकियों के दाग अब राष्ट्रवाद से धोने की तैयारी कर रहे हैं। कट्टरपंथियों की नजदीकियों के कारण ही 2017 के चुनाव में आम आदमी पार्टी को पंजाब में करारी हार का सामना करना पड़ा था। अब आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल पंजाब में तिरंगा यात्रा और आतंकवाद के खिलाफ तीखी बयानबाजी कर पंजाब के लोगों को राष्ट्रवाद के जरिए अपने साथ जोड़ने की कोशिश में लगे हैं। पंजाब में भाजपा के अलावा कैप्टन अमरिंदर सिंह भी राष्ट्रवाद के सहारे आगे बढ़ रहे हैं।

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दरअसल, 2017 में आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) के पूर्व आतंकी गुरविंदर सिंह की कोठी में रात गुजारकर आरोपों में घिर गए थे। तमाम विरोधी दलों ने केजरीवाल को बुरी तरह घेर लिया था और उनको पंजाब की अमन शांति को खतरा बताकर पंजाब में खूब शोर शराबा किया। यही नहीं, हिंदू तख्त के प्रमुख महंत पंचानंद गिरी ने अरविंद केजरीवाल से दो दिन में केसीएफ के आतंकी की कोठी में रुकने का कारण स्पष्ट करने को कहा था। केजरीवाल के कोठी में ठहरने से हिंदू वोटरों में खासी नाराजगी पैदा हो गई थी।
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पंजाब में 2017 के चुनाव में मुद्दा ही केजरीवाल की गर्मख्यालियों से नजदीकियां बन गया था। अकाली सुप्रीमो सुखबीर बादल ने तो तीखा वार किया कि पाकिस्तान की सीमा से लगते संवेदनशील इलाकों में आम आदमी पार्टी की सरगर्मियां भविष्य में पंजाब की अमन शांति के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। पंजाब में बेअदबी की घटनाएं तब से शुरू हुईं, जबसे आम आदमी पार्टी पंजाब में आई है। सभी नक्सली एकजुट हो गए हैं। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी राष्ट्रवाद को मुद्दा बनाकर केजरीवाल पर वार किए। यहां तक कहा कि केजरीवाल की सरकार के बाद पंजाब एक बार फिर से आतंकवादी ताकतों के शिकंजे में होगा।

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कौन है गुरविंदर सिंह

गुरविंदर सिंह खालिस्तान कमांडो फोर्स का सक्रिय आतंकी रहा है। उस पर हिंदू-सिख दंगे भड़काने के लिए मंदिरों में गायों की पूंछें काटकर फेंकने का आरोप लगा था। इस घटना के बाद मोगा सिटी पुलिस ने उसके खिलाफ 15 मई 2008 को धार्मिक भावनाओं को भड़काने का मामला दर्ज किया। गुरविंदर पर बाघापुराना में एक पुजारी की हत्या करने के साथ-साथ एक व्यक्ति की हत्या का प्रयास का आरोप लगा था। 9 जुलाई 1997 को थाना बाघापुराना पुलिस ने उसके खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद उसने 20 दिसंबर 2011 को अमृतसर में एक व्यक्ति से मारपीट की, जिस पर अमृतसर सिटी पुलिस ने उसे नामजद किया। सबूतों और गवाहों के अभाव में बाद में वह सभी मामलों में बरी हो गया और इंग्लैंड चला गया। इस समय वह इंग्लैंड में है और वहीं से पंजाब में अपने साथियों के साथ विभिन्न गतिविधियों को अंजाम देता आ रहा है।

केजरीवाल की फोर्ड फाउंडेशन का खालिस्तान कनेक्शन..

केजरीवाल की एनजीओ फोर्ड फाउंडेशन भी 2017 में चुनाव का मुद्दा रही। आरोप लगा कि इसे अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए, खालिस्तानी और भारत विरोधी सभी अन्य ताकतों का समर्थन प्राप्त है। कैप्टन ने आरोप लगाकर पंजाब की सियासत को गर्म कर दिया था कि जितने भी नक्सली व आतंकवादी हैं, वे सभी आम आदमी पार्टी से मिले हुए हैं।

हिंदू बहुसंख्यक इलाकों से आप का सफाया...

2017 में आतंकवादियों से संबंध के कारण मुद्दा इस कदर गर्मा गया था कि पंजाब में अमन पसंद लोगों ने आप से किनारा करना शुरू कर दिया था। हालात यह बने कि माझा इलाके से आम आदमी पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। पठानकोट से लेकर होशियारपुर कंडी क्षेत्र में आप के उम्मीदवार नजर ही नहीं आए। दोआबा में भी आप को महज दो सीटों पर संतोष करना पड़ा, जिसमें एक भुल्लथ से सुखपाल खैहरा व दूसरी गढ़शंकर से जयकिशन रोढ़ी की सीट थी। जबकि जालंधर सिटी, अमृतसर सिटी, लुधियाना शहरी, मोहाली व ज्यादातर शहरी हलकों से आप का सफाया हो गया। आप को मालवा से 18 सीट मिली।
 

पंजाब में केजरीवाल तिरंगे व अमन शांति का ही करते हैं जिक्र

2022 के चुनावों के लिए केजरीवाल ने अब आप व कट्टरपंथियों के संबंधों के दाग को धोना शुरू कर दिया है। वह पंजाब में आकर देशभक्ति व तिरंगे की बात करने लगे हैं। हिंदू व राष्ट्रवाद की मुख्य बेल्ट माने जाने वाले पठानकोट में तिरंगा यात्रा निकालने के बाद केजरीवाल जालंधर पहुंचे तो उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ जमकर बोला और तिरंगे की शान में कसीदे पढ़े।

केजरीवाल जी उत्तर तो देना होगा, बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाया था- सुभाष शर्मा

भाजपा के फायर ब्रांड नेता और प्रदेश महासचिव डॉ. सुभाष शर्मा का कहना है कि अपने दामन पर लगे दाग केजरीवाल इसलिए धोने की कोशिश कर रहे हैं कि पंजाब में चुनाव सिर पर हैं। केजरीवाल दिल्ली में टुकड़े टुकड़े गैंग को समर्थन देते हैं और अब पंजाब में आकर राष्ट्रवाद की बात करते हैं। केजरीवाल बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक पर सवालिया निशान लगाकर शहीद सैनिकों का अपमान करते हैं और अब राष्ट्रवाद की बात करने लगे हैं। 2017 में केजरीवाल का पर्दाफाश हो गया था कि वह खालिस्तानी समर्थकों की सहायता से पंजाब में सत्ता हासिल करना चाहता था। भाजपा पंजाब में केजरीवाल के मंसूबों को कामयाब नहीं होने देगी।
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