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किसानों को नहरी पानी दिलवाने के लिए धरने पर जाखड़
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर
Updated Mon, 20 Jun 2016 09:36 PM IST
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धरना
- फोटो : अमर उजाला
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किसानों को नहरी पानी नहीं मिलने पर सोमवार को कांग्रेस उपप्रधान व मुख्य प्रवक्ता सुनील जाखड़ ने अबोहर की नहरी कालोनी में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।
जाखड़ ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली अकाली-भाजपा सरकार नहरी पानी के मामले में अबोहर-फाजिल्का क्षेत्र से सौतेला व्यवहार कर रही है। किसानों ने अपने हाथों में जो तख्तियां उठा रखी थी उन पर अंकित था - बादल है पर पानी नहीं, नींद से जागे- किसानों की सुध ले सरकार।
जाखड़ ने कहा कि 1970 में हुई जनगणना में अबोहर-फाजिल्का क्षेत्र के लाखों लोगों ने हरियाणा से जुड़ने की बजाय पंजाब में ही रहने के पक्ष में फतवा दिया था लेकिन अब बादल सरकार इस इलाके को पंजाब का हिस्सा मानने में संकोच कर रही है। उन्होंने कहा कि पांचवीं बार मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करने के बावजूद प्रकाश सिंह बादल ऐसा प्रभाव दे रहे हैं कि वह पूरे पंजाब के नहीं बल्कि अपने गृह क्षेत्र लंबी व मुक्तसर जिले के हितों की रक्षा करने के लिए ही इस पद पर आसीन हुए हैं। जब बरसात होती है तो सेमनालों का पानी मुक्तसर को बचाने के लिये अबोहर-फाजिल्का क्षेत्र में मोड़ दिया जाता है। जब सूखे की स्थिति होती है तो इस इलाके का पानी बादल सरकार अपने जिले के हितों की रक्षा के लिए हड़पने की छूट जत्थेदारों को दे देती है।
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जाखड़ ने कहा कि लंबे समय तक इस इलाके का प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व लोक सभा अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री बलराम जाखड़ ने अबोहर क्षेत्र को कैलिफोर्निया बनाने का संकल्प लिया था। अब पूरे प्रदेश में किन्नू उगाने वाला 60-70 प्रतिशत रकबा अबोहर उपमंडल में ही स्थित है लेकिन नरमे की बिजाई के बाद पहला पानी लगाने और बागों को बचाने की स्थिति आने पर भी नहरें बंद पड़ी हैं।
ऐसे अनेक किसान हैं जो अब तक नहरी पानी उपलब्ध न होने के कारण नरमे की बिजाई भी नहीं कर पाए। कर्ज तले दबे किसानों की ओर से आत्महत्या किए जाने की स्थिति में सरकार ने मुआवजे की व्यवस्था कर रखी है लेकिन पानी की बंदरबांट के कारण जो किसान बिजाई करने से ही वंचित रह गए हैं उनके लिए किसी प्रकार का मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है। शायद बादल सरकार इस इलाके के किसानों को भी आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने पर तुली हुई है।
जाखड़ ने कहा कि वह प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक नहरी कालोनी में धरने पर बैठेंगे। यह सिलसिला तब तक जारी रहेगा जब तक किसानों को नहरी पानी उपलब्ध करवाने की व्यवस्था नहीं की जाती। इस धरने के अगले चरण में किसानों को साथ लेकर बडे़ संघर्ष की रूप रेखा बनाई जाएगी जिसके लिए संघर्ष समिति का गठन किया जा रहा है। यह समिति सभी गांवों में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हस्ताक्षर अभियान चलाएगी ताकि बादल सरकार को किसानों की दुर्दशा से अवगत करवाया जा सके।
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जाखड़ ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली अकाली-भाजपा सरकार नहरी पानी के मामले में अबोहर-फाजिल्का क्षेत्र से सौतेला व्यवहार कर रही है। किसानों ने अपने हाथों में जो तख्तियां उठा रखी थी उन पर अंकित था - बादल है पर पानी नहीं, नींद से जागे- किसानों की सुध ले सरकार।
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जाखड़ ने कहा कि 1970 में हुई जनगणना में अबोहर-फाजिल्का क्षेत्र के लाखों लोगों ने हरियाणा से जुड़ने की बजाय पंजाब में ही रहने के पक्ष में फतवा दिया था लेकिन अब बादल सरकार इस इलाके को पंजाब का हिस्सा मानने में संकोच कर रही है। उन्होंने कहा कि पांचवीं बार मुख्यमंत्री का पद ग्रहण करने के बावजूद प्रकाश सिंह बादल ऐसा प्रभाव दे रहे हैं कि वह पूरे पंजाब के नहीं बल्कि अपने गृह क्षेत्र लंबी व मुक्तसर जिले के हितों की रक्षा करने के लिए ही इस पद पर आसीन हुए हैं। जब बरसात होती है तो सेमनालों का पानी मुक्तसर को बचाने के लिये अबोहर-फाजिल्का क्षेत्र में मोड़ दिया जाता है। जब सूखे की स्थिति होती है तो इस इलाके का पानी बादल सरकार अपने जिले के हितों की रक्षा के लिए हड़पने की छूट जत्थेदारों को दे देती है।
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जाखड़ ने कहा कि लंबे समय तक इस इलाके का प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व लोक सभा अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री बलराम जाखड़ ने अबोहर क्षेत्र को कैलिफोर्निया बनाने का संकल्प लिया था। अब पूरे प्रदेश में किन्नू उगाने वाला 60-70 प्रतिशत रकबा अबोहर उपमंडल में ही स्थित है लेकिन नरमे की बिजाई के बाद पहला पानी लगाने और बागों को बचाने की स्थिति आने पर भी नहरें बंद पड़ी हैं।
ऐसे अनेक किसान हैं जो अब तक नहरी पानी उपलब्ध न होने के कारण नरमे की बिजाई भी नहीं कर पाए। कर्ज तले दबे किसानों की ओर से आत्महत्या किए जाने की स्थिति में सरकार ने मुआवजे की व्यवस्था कर रखी है लेकिन पानी की बंदरबांट के कारण जो किसान बिजाई करने से ही वंचित रह गए हैं उनके लिए किसी प्रकार का मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है। शायद बादल सरकार इस इलाके के किसानों को भी आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने पर तुली हुई है।
जाखड़ ने कहा कि वह प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक नहरी कालोनी में धरने पर बैठेंगे। यह सिलसिला तब तक जारी रहेगा जब तक किसानों को नहरी पानी उपलब्ध करवाने की व्यवस्था नहीं की जाती। इस धरने के अगले चरण में किसानों को साथ लेकर बडे़ संघर्ष की रूप रेखा बनाई जाएगी जिसके लिए संघर्ष समिति का गठन किया जा रहा है। यह समिति सभी गांवों में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हस्ताक्षर अभियान चलाएगी ताकि बादल सरकार को किसानों की दुर्दशा से अवगत करवाया जा सके।