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कथलौर वन्यजीव अभ्यारण्य में शिकार करने वालों के करीब पहुंची पुलिस
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पठानकोट। कथलौर वन्यजीव अभ्यारण्य में गोलियां दागने के आरोपियों के पुलिस काफी करीब पहुंच चुकी है। अभ्यारण्य में मिली बाइक को आधार बनाकर पुलिस ने तफ्तीश को बढ़ाया और आरोपियों की पहचान कर ली। पुलिस ने आरोपियों के घर पर दबिश दी, लेकिन आरोपी फरार हो चुके थे। वहीं, पुलिस को घटनास्थल से खून पड़ा मिला, जिसके नमूने लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। संदेह जताया जा रहा है कि आरोपियों ने जानवर का शिकार किया और वन गार्ड के पहुंचने पर उसे लेकर भाग निकले।
बता दें, 30 अप्रैल की रात 2 अज्ञात लोग कथलौर वन्य जीव अभ्यारण्य में शिकार के लिए पहुंचे थे। जब उन्होंने फायरिंग की तो वहां मौजूद वन गार्ड भी अपने सहयोगी के साथ वहां पहुंच गया। वन गार्ड को देख आरोपियों ने गार्ड को डराने के लिए हवा में गोली दागी और भागने का प्रयास किया। हालांकि, उनकी बाइक स्लिप कर गई और वह गिर गए। इसके बाद उक्त आरोपी बाइक वहीं छोड़ भाग खड़े हुए। वन गार्ड के मुताबिक आरोपियों के हाथ में राइफल भी थी। पुलिस ने अज्ञात लोगों पर पहले वाइल्ड लाइफ एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। अब उनमें आर्म्स एक्ट की धाराओं को जोड़ा गया है।
बाइक के जरिये आरोपियों तक पहुंची पुलिस
कथलौर वन्यजीव अभ्यारण्य में मिली बाइक के आधार पर पुलिस आरटीओ दफ्तर से जानकारी लेकर बाइक मालिक तक पहुंची। उसने कहा कि वह यह बाइक कुछ दिन पहले ही बेच चुका है। उसने पुलिस को एफिडेविट भी दिखाया। पुलिस अब उन लोगों के पीछे है, जिन्होंने वह बाइक खरीदी थी। बुधवार को पुलिस ने उक्त लोगों के घर पर दबिश दी पर वह वहां से फरार हो गए।
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खून मिलने से शिकार का शक यकीन में बदला
बता दें, घटनास्थल से झाड़ियों और जमीन पर खून और गोलियों के खोल मिले हैं। इस पर पुलिस को संदेह है कि आरोपियों ने किसी जानवर को मारा है। हालांकि, घटनास्थल से किसी जानवर का शव नहीं मिला। सूत्रों का कहना है कि उक्त राइफल किसी पूर्व सैनिक की है। उसमें जिस कारतूस का इस्तेमाल किया गया है, वह बड़े जानवर को मारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सूत्रों ने आशंका जताई कि शिकारियों ने जंगली सुअर का शिकार किया था।
वन्य जीव विभाग ने गठित की थी टीमें
वन्य जीव विभाग के डिवीजनल फारेस्ट अफसर राजेश महाजन ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ गुज्जर रात के समय कथलौर वन्यजीव अभ्यारण्य में अपने मवेशियों को छोड़ते हैं। इस कारण उन्होंने टीमों का गठन किया था। उन्हीं में से एक टीम में शामिल वन गार्ड अभ्यास सैनी ने उक्त लोगों को पकड़ने का प्रयास भी किया। डीएफओ ने बताया कि अब पूरे मामले को जिला पुलिस देख रही है।
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बता दें, 30 अप्रैल की रात 2 अज्ञात लोग कथलौर वन्य जीव अभ्यारण्य में शिकार के लिए पहुंचे थे। जब उन्होंने फायरिंग की तो वहां मौजूद वन गार्ड भी अपने सहयोगी के साथ वहां पहुंच गया। वन गार्ड को देख आरोपियों ने गार्ड को डराने के लिए हवा में गोली दागी और भागने का प्रयास किया। हालांकि, उनकी बाइक स्लिप कर गई और वह गिर गए। इसके बाद उक्त आरोपी बाइक वहीं छोड़ भाग खड़े हुए। वन गार्ड के मुताबिक आरोपियों के हाथ में राइफल भी थी। पुलिस ने अज्ञात लोगों पर पहले वाइल्ड लाइफ एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। अब उनमें आर्म्स एक्ट की धाराओं को जोड़ा गया है।
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बाइक के जरिये आरोपियों तक पहुंची पुलिस
कथलौर वन्यजीव अभ्यारण्य में मिली बाइक के आधार पर पुलिस आरटीओ दफ्तर से जानकारी लेकर बाइक मालिक तक पहुंची। उसने कहा कि वह यह बाइक कुछ दिन पहले ही बेच चुका है। उसने पुलिस को एफिडेविट भी दिखाया। पुलिस अब उन लोगों के पीछे है, जिन्होंने वह बाइक खरीदी थी। बुधवार को पुलिस ने उक्त लोगों के घर पर दबिश दी पर वह वहां से फरार हो गए।
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खून मिलने से शिकार का शक यकीन में बदला
बता दें, घटनास्थल से झाड़ियों और जमीन पर खून और गोलियों के खोल मिले हैं। इस पर पुलिस को संदेह है कि आरोपियों ने किसी जानवर को मारा है। हालांकि, घटनास्थल से किसी जानवर का शव नहीं मिला। सूत्रों का कहना है कि उक्त राइफल किसी पूर्व सैनिक की है। उसमें जिस कारतूस का इस्तेमाल किया गया है, वह बड़े जानवर को मारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सूत्रों ने आशंका जताई कि शिकारियों ने जंगली सुअर का शिकार किया था।
वन्य जीव विभाग ने गठित की थी टीमें
वन्य जीव विभाग के डिवीजनल फारेस्ट अफसर राजेश महाजन ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ गुज्जर रात के समय कथलौर वन्यजीव अभ्यारण्य में अपने मवेशियों को छोड़ते हैं। इस कारण उन्होंने टीमों का गठन किया था। उन्हीं में से एक टीम में शामिल वन गार्ड अभ्यास सैनी ने उक्त लोगों को पकड़ने का प्रयास भी किया। डीएफओ ने बताया कि अब पूरे मामले को जिला पुलिस देख रही है।