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15 सितंबर को पंजाब के लोगों को मिलेगा नया पर्यटन स्थल
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पठानकोट। पंजाब के लोगों को 15 सितंबर को पठानकोट में नया पर्यटन स्थल मिल जाएगा। भारत-पाक सीमा से सटे और शहर से महज 25 किमी. दूर स्थित कथलौर अभ्यारण्य (सेंक्चुरी) पर वन्य जीव विभाग ने 1.2 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसे सैलानियों के लिए विकसित किया गया है।
1837 एकड़ में फैले अभ्यारण्य में पर्यटकों के लिए 5 किमी. लंबी नेचर ट्रेल, ऑक्सीजन वॉक, आइलैंड, वॉच टावर, रेन शेल्टर, तालाब, स्मृति वन, बांस की हट और कैफेटेरिया बनवाए हैं। इसके अलावा अभ्यारण्य का भ्रमण करने के लिए पर्यटकों को 10 सीटर गोल्फ कार्ट (साउंडलेस) और 10 साइकिल की सुविधा भी दी जाएगी। बच्चों के खेलने के लिए एक्टिविटी प्वाइंट्स होंगे, जिसमें कमांडो नेट और बर्मा ब्रिज बनेंगे। 15 सितंबर को डीसी संयम अग्रवाल अभ्यारण्य को लोगों के लिए खोलने की आधिकारिक घोषणा करेंगे।
अभ्यारण्य में एक बड़ा जलाशय (पौंड) बनाया गया है। इसमें एक 800 बाई 100 फीट का आइलैंड बनाकर पास में ही कैफेटेरिया बनाया गया है। आइलैंड में बांस की हट्स बनाई गई हैं, जहां बैठकर लोग खाने का लुत्फ उठा पाएंगे। जलाशय में मछलियों के अलावा बतख और हंस भी होंगे।
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नेचर ट्रेल में होंगे पक्षियों और जानवरों के दीदार
वन्य जीव विभाग के डिवीजनल फॉरेस्ट अफसर राजेश महाजन का कहना है कि नेचर ट्रेल में लोग ट्रैकिंग कर पाएंगे। यहां साइन बोर्ड पर हर पक्षी या जानवर की जानकारी दी गई है। नेचर ट्रेल में सैलानी ऑक्सीजन की कमी पूरी कर पाएंगे। इसके अलावा ट्रैकिंग के दौरान बारिश से बचने के लिए रेन शेल्टर भी बनाए गए हैं। डीएफओ राजेश महाजन ने बताया कि मौजूदा समय में कथलौर अभ्यारण्य में हजारों की संख्या में मोर भी हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में जंगली जीव मौजूद हैं। इनमें जंगली बिल्ले, रसल वाइपर स्नेक, पायथन, बार्किंग डीयर, हॉग डीयर, सांभर, जैकाल, पार्कयूपाईन, पैंगोलियन, मॉनिटर लिजर्ड, जंगली खरगोश, ग्रेट कोकुल, स्पॉटर्ड आउलेट, जंगली सुअर और जंगली मुर्गों के दीदार कर पाएंगे।
30 मीटर ऊंचे वॉच टावरों से दिखेंगे मनमोहक दृश्य
डीएफओ राजेश महाजन ने बताया कि कथलौर अभ्यारण्य में 30-30 मीटर ऊंचे वॉच टावर बनाए गए हैं। इनसे सैलानी पूरे जंगल और रावी दरिया के मनमोहक दृश्य देख पाएंगे। अभ्यारण्य को तीन जोन में बांटा है। इनमें सबसे पहले ईको सेंसटिव जोन और फिर बफर जोन होंगे। यहां पर्यटकों को जाने की इजाजत मिलेगी। अभ्यारण्य के बीचोंबीच कोर जोन बनाया गया है। जहां पर्यटकों के जाने पर प्रतिबंध होगा। ईको सेंसटिव और बफर जोन में पर्यटकों को नियंत्रित तरीके से भ्रमण करने की आजादी होगी।
कोट्...
सैलानियों की सहूलियत के लिए हर प्रबंध किया गया है। सैलानियों से अपील है कि वह इस धरोहर को बचाने में वन्य जीव विभाग का सहयोग करें। अभ्यारण्य में प्लास्टिक की चीजें और खाने-पीने की वस्तुएं न लेकर जाएं। किसी भी जानवर को खाना खिलाने या उसे तंग परेशान करने की कोशिश न करें। यात्रा के दौरान अनुशासन का पालन करें। -राजेश महाजन, डीएफओ, वन्य जीव विभाग
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1837 एकड़ में फैले अभ्यारण्य में पर्यटकों के लिए 5 किमी. लंबी नेचर ट्रेल, ऑक्सीजन वॉक, आइलैंड, वॉच टावर, रेन शेल्टर, तालाब, स्मृति वन, बांस की हट और कैफेटेरिया बनवाए हैं। इसके अलावा अभ्यारण्य का भ्रमण करने के लिए पर्यटकों को 10 सीटर गोल्फ कार्ट (साउंडलेस) और 10 साइकिल की सुविधा भी दी जाएगी। बच्चों के खेलने के लिए एक्टिविटी प्वाइंट्स होंगे, जिसमें कमांडो नेट और बर्मा ब्रिज बनेंगे। 15 सितंबर को डीसी संयम अग्रवाल अभ्यारण्य को लोगों के लिए खोलने की आधिकारिक घोषणा करेंगे।
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अभ्यारण्य में एक बड़ा जलाशय (पौंड) बनाया गया है। इसमें एक 800 बाई 100 फीट का आइलैंड बनाकर पास में ही कैफेटेरिया बनाया गया है। आइलैंड में बांस की हट्स बनाई गई हैं, जहां बैठकर लोग खाने का लुत्फ उठा पाएंगे। जलाशय में मछलियों के अलावा बतख और हंस भी होंगे।
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नेचर ट्रेल में होंगे पक्षियों और जानवरों के दीदार
वन्य जीव विभाग के डिवीजनल फॉरेस्ट अफसर राजेश महाजन का कहना है कि नेचर ट्रेल में लोग ट्रैकिंग कर पाएंगे। यहां साइन बोर्ड पर हर पक्षी या जानवर की जानकारी दी गई है। नेचर ट्रेल में सैलानी ऑक्सीजन की कमी पूरी कर पाएंगे। इसके अलावा ट्रैकिंग के दौरान बारिश से बचने के लिए रेन शेल्टर भी बनाए गए हैं। डीएफओ राजेश महाजन ने बताया कि मौजूदा समय में कथलौर अभ्यारण्य में हजारों की संख्या में मोर भी हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में जंगली जीव मौजूद हैं। इनमें जंगली बिल्ले, रसल वाइपर स्नेक, पायथन, बार्किंग डीयर, हॉग डीयर, सांभर, जैकाल, पार्कयूपाईन, पैंगोलियन, मॉनिटर लिजर्ड, जंगली खरगोश, ग्रेट कोकुल, स्पॉटर्ड आउलेट, जंगली सुअर और जंगली मुर्गों के दीदार कर पाएंगे।
30 मीटर ऊंचे वॉच टावरों से दिखेंगे मनमोहक दृश्य
डीएफओ राजेश महाजन ने बताया कि कथलौर अभ्यारण्य में 30-30 मीटर ऊंचे वॉच टावर बनाए गए हैं। इनसे सैलानी पूरे जंगल और रावी दरिया के मनमोहक दृश्य देख पाएंगे। अभ्यारण्य को तीन जोन में बांटा है। इनमें सबसे पहले ईको सेंसटिव जोन और फिर बफर जोन होंगे। यहां पर्यटकों को जाने की इजाजत मिलेगी। अभ्यारण्य के बीचोंबीच कोर जोन बनाया गया है। जहां पर्यटकों के जाने पर प्रतिबंध होगा। ईको सेंसटिव और बफर जोन में पर्यटकों को नियंत्रित तरीके से भ्रमण करने की आजादी होगी।
कोट्...
सैलानियों की सहूलियत के लिए हर प्रबंध किया गया है। सैलानियों से अपील है कि वह इस धरोहर को बचाने में वन्य जीव विभाग का सहयोग करें। अभ्यारण्य में प्लास्टिक की चीजें और खाने-पीने की वस्तुएं न लेकर जाएं। किसी भी जानवर को खाना खिलाने या उसे तंग परेशान करने की कोशिश न करें। यात्रा के दौरान अनुशासन का पालन करें। -राजेश महाजन, डीएफओ, वन्य जीव विभाग