{"_id":"6a8af2b9c4dca78dff0a777f","slug":"khanna-expressed-anger-over-the-protest-against-vande-mataram-hoshiarpur-news-c-70-1-spkl1012-105303-2026-08-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jalandhar News: वंदे मातरम के विरोध पर खन्ना ने जताया रोष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jalandhar News: वंदे मातरम के विरोध पर खन्ना ने जताया रोष
Sun, 23 Aug 2026 06:46 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
Updated Sun, 23 Aug 2026 06:46 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
होशियारपुर। पूर्व सांसद अविनाश खन्ना ने वंदे मातरम के विरोध पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय चेतना और स्वाधीनता की भावना का प्रतीक था।
खन्ना ने बताया कि वंदे मातरम का सरल अर्थ मां की वंदना है, जिसमें राष्ट्रप्रेम की भावना निहित है। इसकी रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह त्याग, शौर्य व समर्पण का प्रतीक है। वर्ष 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे कोलकाता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार गाया था। 1950 में संविधान सभा ने इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया। खन्ना के अनुसार, इस गीत का सर्वोच्च उद्देश्य प्रत्येक भारतीय के हृदय में देशभक्ति जगाना है। उन्होंने कहा कि बिना वजह इसका विरोध करना राष्ट्रभावना और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को आहत करता है।
विज्ञापन
होशियारपुर। पूर्व सांसद अविनाश खन्ना ने वंदे मातरम के विरोध पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय चेतना और स्वाधीनता की भावना का प्रतीक था।
खन्ना ने बताया कि वंदे मातरम का सरल अर्थ मां की वंदना है, जिसमें राष्ट्रप्रेम की भावना निहित है। इसकी रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह त्याग, शौर्य व समर्पण का प्रतीक है। वर्ष 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे कोलकाता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार गाया था। 1950 में संविधान सभा ने इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया। खन्ना के अनुसार, इस गीत का सर्वोच्च उद्देश्य प्रत्येक भारतीय के हृदय में देशभक्ति जगाना है। उन्होंने कहा कि बिना वजह इसका विरोध करना राष्ट्रभावना और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को आहत करता है।
विज्ञापन