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ईरान–इजराइल जंग: आंच में सूख रही लीची, खाड़ी का सफर थमा; मुनाफे की आस में उत्पादन बढ़ाने वाले किसानों को झटका

Wed, 04 Mar 2026 08:46 AM IST
Nivedita सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर Published by: Nivedita Updated Wed, 04 Mar 2026 08:46 AM IST
सार

पठानकोट प्रीमियम गुणवत्ता की लीची के लिए तेजी से उभर रहा था, लेकिन 2026 में खाड़ी संकट ने इसकी रफ्तार थाम दी है। अब बागवानों की निगाहें घरेलू बाजार और क्षेत्र में शांति बहाली पर टिकी हैं, ताकि अगले सीजन में फिर से खाड़ी का सफर शुरू हो सके।

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Iran-Israel war Lychees wither in heat Gulf travel halted
ईरान: कुछ लोग कभी खुश नहीं हो सकते - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी ईरान–इजराइल जंग की आंच अब पंजाब के बागानों तक पहुंच गई है। पठानकोट की मशहूर गुलाब की खुशबू वाली लीची, जिसने पिछले वर्ष खाड़ी बाजारों में मिठास बिखेरी थी, इस बार अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण निर्यात संकट में फंस गई है। वर्ष 2026 में दुबई और कतर के लिए लीची की खेप रवाना होने को लेकर अनिश्चितता गहरा गई है।
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वर्ष 2025 में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से पहली बार पठानकोट से 1 मीट्रिक टन लीची कतर की राजधानी दोहा और 0.5 मीट्रिक टन दुबई भेजी गई थी। बेहतर दाम मिलने से किसानों का उत्साह बढ़ा और कई बागवानों ने उत्पादन व रकबा बढ़ाने के साथ निर्यात के लिए अतिरिक्त निवेश किया।
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मगर मौजूदा हालात ने उम्मीदों पर ब्रेक लगा दिया है। खाड़ी क्षेत्र में सैन्य तनाव के चलते एयर-कार्गो रूट प्रभावित हुए हैं और समुद्री शिपमेंट भी महंगा पड़ रहा है। बीमा प्रीमियम व लॉजिस्टिक्स लागत में भारी इजाफा हुआ है। ‘गुलाब’ लीची अत्यंत नाजुक फल है, जो लंबी ट्रांजिट अवधि में जल्दी खराब हो जाता है। निर्यातकों का कहना है कि समय पर डिलीवरी और गुणवत्ता बनाए रखना जोखिम भरा हो गया है। खाड़ी के आयातकों ने भी फिलहाल नए ऑर्डर रोक दिए हैं।
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मंडी में इस समय लीची का थोक भाव करीब 7000 रुपये प्रति क्विंटल (70 रुपये प्रति किलो) है, जबकि दिल्ली सहित अन्य शहरों में यही लीची 150 से 200 रुपये प्रति किलो फुटकर बिक रही है। यह फल केवल एक महीने तक बाजार में उपलब्ध रहता है और नमी की कमी से तेजी से सूखने लगता है। निर्यात ठप रहने पर अतिरिक्त माल घरेलू बाजार में आएगा, जिससे दामों पर दबाव बढ़ सकता है।

देश के कुल उत्पादन का 12% पंजाब में

राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 में पंजाब का लीची उत्पादन 71,490 मीट्रिक टन रहा, जो देश के कुल उत्पादन का 12.39 प्रतिशत है। राज्य में 4,327 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती हुई और औसत उपज 16,523 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। इसी अवधि में भारत ने 639.53 मीट्रिक टन लीची का निर्यात किया था।


पठानकोट प्रीमियम गुणवत्ता की लीची के लिए तेजी से उभर रहा था, लेकिन 2026 में खाड़ी संकट ने इसकी रफ्तार थाम दी है। अब बागवानों की निगाहें घरेलू बाजार और क्षेत्र में शांति बहाली पर टिकी हैं, ताकि अगले सीजन में फिर से खाड़ी का सफर शुरू हो सके।
 
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