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हॉकी इंडिया नहीं चाहती कि पंजाब हॉकी की प्रमोशन हो: परगट सिंह
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हॉकी एक ऐसा खेल है, जो जोश से भरा हुआ है। पंजाबी लोग तो वैसे ही जोश के लिए मशहूर हैं। हॉकी में चोट व दुर्घटना का भी खतरा होता है, खिलाड़ी की कोशिश हॉकी की बाल छीनने की होती है, इसलिए खिलाड़ी स्टिक लेकर मैदान में भिड़ जाता है। पंजाबी खिलाड़ी पूरा रिस्क लेने के लिए हर समय तैयार रहते हैं, खतरे व दुर्घटना की परवाह नहीं होती। पंजाब के लोग फौज में भी इसलिए जाते हैं क्योंकि बहादुर कौम है। गर्व की बात है कि पंजाब की धरती ने हॉकी खिलाड़ियों की जन्मभूमि रही है लेकिन इस बात का मलाल भी है कि कभी पंजाब को हॉकी हीरो का दर्जा नहीं दिया गया। यह कहना है पद्मश्री और हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह का।
परगट सिंह का कहना है कि पंजाब हॉकी एसोसिएशन के प्रधान नितिन कोहली हैं और वे सचिव हैं। उनका 50 लाख रुपये सालाना बजट है। यह पैसा वे अपने हॉकी प्रेमियों से एकत्रित करते हैं ताकि पंजाब में हॉकी को बुलंदियों पर रखा जाए। हॉकी इंडिया की तरफ से कभी पंजाब को तवज्जो नहीं दी गई। कभी फंड नहीं दिया गया, कभी अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय मैच की मेजबानी नहीं की गई।
लेकिन भारत सरकार खेल पर काफी कम खर्च करती है। एक हजार रुपये के पीछे करीब सात पैसे खर्च किये जा रहे हैं। यह कुछ भी नहीं है। इसमें खिलाड़ियों का क्या होगा? चीन ने हर 1-15 किलोमीटर के फासले पर स्पोर्ट्स सेंटर खोल रखे हैं, जहां पर कोच बेहतरीन शिक्षा देते हैं। यकीन मानिए 9 लाख के करीब युवा हर साल चीन में जिम्नास्टिक के तैयार होते हैं। यह भी एक स्टडी है कि चीन में अब 2 ईंच के करीब सब का कद बढ़ गया है, यह सिर्फ खेल की देन है।
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पंजाब हॉकी की जन्मभूमि है और अब ओलंपिक में 10 खिलाड़ी पंजाबी थे और दो ऐसे खिलाड़ी भी थे, जो ओलंपिक क्वालीफाई करते थे लेकिन सारी टीम पंजाब से नहीं जा सकती थी। अब वक्त है कि हॉकी को उभारने की। इसमें एक ही फोकस होना चाहिए कि देश के लिए खेलना है। लेकिन दर्द तब होता है जब हॉकी इंडिया की तरफ से पंजाब को नजरअंदाज किया जाता है। खैर, वक्त तो जश्न मनाने का है, भारतीय हॉकी टीम को मुबारकबाद।
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परगट सिंह का कहना है कि पंजाब हॉकी एसोसिएशन के प्रधान नितिन कोहली हैं और वे सचिव हैं। उनका 50 लाख रुपये सालाना बजट है। यह पैसा वे अपने हॉकी प्रेमियों से एकत्रित करते हैं ताकि पंजाब में हॉकी को बुलंदियों पर रखा जाए। हॉकी इंडिया की तरफ से कभी पंजाब को तवज्जो नहीं दी गई। कभी फंड नहीं दिया गया, कभी अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय मैच की मेजबानी नहीं की गई।
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लेकिन भारत सरकार खेल पर काफी कम खर्च करती है। एक हजार रुपये के पीछे करीब सात पैसे खर्च किये जा रहे हैं। यह कुछ भी नहीं है। इसमें खिलाड़ियों का क्या होगा? चीन ने हर 1-15 किलोमीटर के फासले पर स्पोर्ट्स सेंटर खोल रखे हैं, जहां पर कोच बेहतरीन शिक्षा देते हैं। यकीन मानिए 9 लाख के करीब युवा हर साल चीन में जिम्नास्टिक के तैयार होते हैं। यह भी एक स्टडी है कि चीन में अब 2 ईंच के करीब सब का कद बढ़ गया है, यह सिर्फ खेल की देन है।
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पंजाब हॉकी की जन्मभूमि है और अब ओलंपिक में 10 खिलाड़ी पंजाबी थे और दो ऐसे खिलाड़ी भी थे, जो ओलंपिक क्वालीफाई करते थे लेकिन सारी टीम पंजाब से नहीं जा सकती थी। अब वक्त है कि हॉकी को उभारने की। इसमें एक ही फोकस होना चाहिए कि देश के लिए खेलना है। लेकिन दर्द तब होता है जब हॉकी इंडिया की तरफ से पंजाब को नजरअंदाज किया जाता है। खैर, वक्त तो जश्न मनाने का है, भारतीय हॉकी टीम को मुबारकबाद।