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गुरमेहर को लेकर चल रहे विवाद पर पहली बार खुलकर बोले दादा, कह गए बड़ी बात
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
Updated Wed, 01 Mar 2017 04:38 PM IST
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जालंधर के शहीद कैप्टन मंदीप की 19 साल की बेटी का वीडियो वायरल
- फोटो : amarujala
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कैप्टन मंदीप हैरी की बेटी गुरमेहर कौर को लेकर चल रहे विवाद पर उनके दादा कमलजीत सिंह पहली बार खुलकर बोले। उनका कहना है कि नेताओं को यह तमाशा बंद कर देना चाहिए। इंस्टीट्यूट स्टडी के लिए होते हैं न कि राजनीति के लिए। उन्होंने कहा बेटी गुरमोहर समझदार है, उसके बयान पर नेता तो हो हल्ला मचा रहे हैं, लेकिन मेरे बेटे ने शहादत दी थी।
उसकी शहादत के बाद मेरे को बूथ नंबर 200 अलाट हुआ था, जिसको कैंसिल कर बोली पर लगा दिया गया। बूथ को बहाल करवाने के लिए हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी, तब सारे नेताओं ने हल्ला क्यों नहीं मचाया। अब तो सिर्फ ड्रामा किया जा रहा है। गुरमेहर कौर के मुंह से अगर कुछ निकला है तो उस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
गुरमेहर कौर के दादा कमलजीत सिंह स्थानीय तहसील कांप्लेक्स में बूथ चलाते हैं और वहां पर फोटोस्टेट के अलावा छोेटे मोटे काम करते हैं। इस बूथ को कैप्टन मंदीप हैरी की शहादत के बाद सरकार ने उनके पिता को अलाट किया था। बूथ नंबर 200 को बाद में बोली में डाल दिया गया यानी इस बूथ के लिए पिता कमलजीत सिंह को आम नागरिक की तरह बोली देकर लेना था।
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बोली देकर उन्होंने बूथ लेने से बेहतर कोर्ट में केस दायर किया और हाईकोर्ट से आदेश लेकर आए कि शहीद के पिता को अलाट बूथ की बोली नहीं करवाई जा सकती। कमलजीत सिंह का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मेरा किसी नेता ने तो साथ नहीं दिया, मुझे अपने दम पर जंग लड़नी पड़ी।
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उसकी शहादत के बाद मेरे को बूथ नंबर 200 अलाट हुआ था, जिसको कैंसिल कर बोली पर लगा दिया गया। बूथ को बहाल करवाने के लिए हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी, तब सारे नेताओं ने हल्ला क्यों नहीं मचाया। अब तो सिर्फ ड्रामा किया जा रहा है। गुरमेहर कौर के मुंह से अगर कुछ निकला है तो उस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
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गुरमेहर कौर के दादा कमलजीत सिंह स्थानीय तहसील कांप्लेक्स में बूथ चलाते हैं और वहां पर फोटोस्टेट के अलावा छोेटे मोटे काम करते हैं। इस बूथ को कैप्टन मंदीप हैरी की शहादत के बाद सरकार ने उनके पिता को अलाट किया था। बूथ नंबर 200 को बाद में बोली में डाल दिया गया यानी इस बूथ के लिए पिता कमलजीत सिंह को आम नागरिक की तरह बोली देकर लेना था।
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बोली देकर उन्होंने बूथ लेने से बेहतर कोर्ट में केस दायर किया और हाईकोर्ट से आदेश लेकर आए कि शहीद के पिता को अलाट बूथ की बोली नहीं करवाई जा सकती। कमलजीत सिंह का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मेरा किसी नेता ने तो साथ नहीं दिया, मुझे अपने दम पर जंग लड़नी पड़ी।