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पराली जलाने के खिलाफ आगे आईं 277 ग्राम पंचायते, प्रस्ताव किया गया पारित
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फसलों के अवशेषों को जलाने से कोविड-19 का खतरा बढ़ने की स्थिति को देखते हुए कपूरथला की 277 पंचायतें जिला प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए आगे आई हैं। उन्होंने अपने गांवों में पराली न जलाने का प्रस्ताव पास किया है।
इस प्रस्ताव में लिखा गया है कि धान की कटाई सिर्फ सुपर एसएमएस से लैस कंबाइन से ही की जाए। कोई आदेश का उल्लंघन करता पाया गया तो तुरंत पुलिस व प्रशासन को सूचित किया जाएगा। डीसी दीप्ति उप्पल ने कहा कि प्रशासन इन मुश्किल हालात में कड़ी मेहनत कर रहा है जिससे कोरोना को हराया जा सके। जानें बचाईं जा सकें।
उन्होंने कहा कि पराली जलाने से हानिकारक गैसें पैदा होती हैं जिससे सांस की समस्याएं बढ़ सकती हैं। पंचायतों का फर्ज बनता है कि वह अपने गांवों में किसानों को पराली जलाने से रोकने को यकीनी बनाएं। धान की पराली जलाने से 70,000 एमजी प्रदूषण कण पैदा होते हैं जो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं। मिट्टी के 17 पौष्टिक तत्वों सहित कई अन्य सूक्ष्म पौष्टिक तत्वों को नष्ट कर देते हैं। प्रशासन की तरफ से पराली जलाने की 24 घंटे निगरानी व तुरंत कार्रवाई के लिए पहले ही जिले में कलस्टर और नोडल अधिकारी तैनात कर दिए गए हैं।
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डीसी ने पंचायतों से अपील की कि वह किसानों की तरफ से फसलों के अवशेष के प्रबंधन के लिए नवीनतम तकनीक के माध्यम से प्रभावशाली ढंग अपनाएं। जिला विकास व पंचायत अधिकारी ने बताया कि जिले में कुल 546 पंचायतें हैं। इनमें से कपूरथला ब्लॉक में 85, फगवाड़ा में 45, नडाला में 36, ढिलवां में 39 और सुल्तानपुर लोधी में 72 पंचायतों ने प्रस्ताव पारित किए हैं।
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इस प्रस्ताव में लिखा गया है कि धान की कटाई सिर्फ सुपर एसएमएस से लैस कंबाइन से ही की जाए। कोई आदेश का उल्लंघन करता पाया गया तो तुरंत पुलिस व प्रशासन को सूचित किया जाएगा। डीसी दीप्ति उप्पल ने कहा कि प्रशासन इन मुश्किल हालात में कड़ी मेहनत कर रहा है जिससे कोरोना को हराया जा सके। जानें बचाईं जा सकें।
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उन्होंने कहा कि पराली जलाने से हानिकारक गैसें पैदा होती हैं जिससे सांस की समस्याएं बढ़ सकती हैं। पंचायतों का फर्ज बनता है कि वह अपने गांवों में किसानों को पराली जलाने से रोकने को यकीनी बनाएं। धान की पराली जलाने से 70,000 एमजी प्रदूषण कण पैदा होते हैं जो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं। मिट्टी के 17 पौष्टिक तत्वों सहित कई अन्य सूक्ष्म पौष्टिक तत्वों को नष्ट कर देते हैं। प्रशासन की तरफ से पराली जलाने की 24 घंटे निगरानी व तुरंत कार्रवाई के लिए पहले ही जिले में कलस्टर और नोडल अधिकारी तैनात कर दिए गए हैं।
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डीसी ने पंचायतों से अपील की कि वह किसानों की तरफ से फसलों के अवशेष के प्रबंधन के लिए नवीनतम तकनीक के माध्यम से प्रभावशाली ढंग अपनाएं। जिला विकास व पंचायत अधिकारी ने बताया कि जिले में कुल 546 पंचायतें हैं। इनमें से कपूरथला ब्लॉक में 85, फगवाड़ा में 45, नडाला में 36, ढिलवां में 39 और सुल्तानपुर लोधी में 72 पंचायतों ने प्रस्ताव पारित किए हैं।