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Punjab Crime: गैंगस्टरों के पास चीन, रूस, तुर्की के घातक हथियार, कैसे करेगी पंजाब पुलिस मुकाबला

Thu, 02 Jun 2022 04:42 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला ब्यूरो, जालंधर।
अमर उजाला ब्यूरो, जालंधर। Published by: विजय पुंडीर Updated Thu, 02 Jun 2022 04:42 AM IST
सार

केंद्रीय एजेंसियों के मुताबिक, पंजाब में हथियारों की खेप इतनी आ चुकी है कि पुलिस का इन हथियारों का मुकाबला करना आसान नहीं है। बता दें कि 29 वर्षीय मूसेवाला की रविवार को दिनदहाड़े मानसा जिले में उनके पैतृक गांव के पास गैंगस्टरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

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Gangsters have lethal weapons of China Russia Turkey how will Punjab Police compete
punjab police officers - फोटो : amar ujala

विस्तार

गायक और पंजाब कांग्रेस के नेता सिद्धू सिंह मूसेवाला की हत्या की सनसनीखेज वारदात में एएन-94 रूसी असॉल्ट राइफल से लेकर एके-47 व सी-30 पिस्तौल के इस्तेमाल ने पंजाब से लेकर केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को चिंता में डाल दिया है। मूसेवाला की हत्या में 1994 के एक एवोमैट निकोनोवा मॉडल का इस्तेमाल किया गया था।

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29 वर्षीय मूसेवाला की रविवार को दिनदहाड़े मानसा जिले में उनके पैतृक गांव के पास गैंगस्टरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पहले कहा गया था कि अपराध में एके-47 राइफल का इस्तेमाल किया गया। केंद्रीय एजेंसियों के मुताबिक, पंजाब में हथियारों की खेप इतनी आ चुकी है कि पुलिस का इन हथियारों का मुकाबला करना आसान नहीं है।
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एएन-94 असॉल्ट राइफल
एएन-94 रूसी असॉल्ट राइफल का नाम इसके मुख्य डिजाइनर गेनाडी नकोनोव के नाम पर रखा गया है। गेनाडी ने पहले इसी नाम से एक मशीनगन को भी तैयार किया था। इस राइफल को बनाने का काम 1980 में शुरू हुआ और 1994 में पूरा हुआ। मूसेवाला और उसके दो साथियों पर 2 मिनट 30 सेकेंड तक लगातार फायरिंग की गई। एनएन-94 राइफल टू राउंड बर्स्ट मोड में प्रति मिनट 600 राउंड और फुल आटो मोड में 1800 गोलियां प्रति मिनट फायर करती है।
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एएन-94 रूसी असॉल्ट राइफल 900 मीटर या फिर 3000 फीट प्रति सेकेंड की रफ्तार से गोलियां चलाती है। वहीं एके-47 715 मीटर यानी करीब 2000 फीट प्रति सेंकेड की रफ्तार से फायर करती है। एएन-94 रूसी असॉल्ट राइफल में 30 से 45 कारतूस की एक बार में भरी जा सकती है जो एके-47 के समान होती है। इसका वजन 3.85 किलोग्राम है। सूत्रों की मानें तो सीधी फायरिंग से बुलेट प्रूफ गाड़ी का शीशा भी यह हथियार क्रास कर सकता है। यह रूस में बनी है और इसको रशियन आर्मी इस्तेमाल करती है। रूस से यह ऑसल्ट पाकिस्तान और वहां से पंजाब आई है।

सी-30 पिस्तौल
30 बोर की ऐसी पिस्तौल चीन की बनी होती है, जो पंजाब में गैंगस्टरों की पहली पसंद बनी हुई है। पंजाब में जितने भी बडे़ गैंगवार के मामले सामने आए हैं, उनमें गैंगस्टरों ने ज्यादातर 30 बोर की पिस्तौल का ही प्रयोग किया था। इसकी खासियत यह है कि एक बार लोड करने के बाद उसका ट्रिगर दबा दिया तो फायर मिस नहीं होता, इसी कारण गैंगस्टर ऐसी पिस्तौल को पसंद करते हैं। महंगा होने के कारण इसे लाने के लिए गैंगस्टर हमेशा विदेशों से फंडिंग प्राप्त करते हैं। यह पिस्तौल गैंगस्टरों तक भारी संख्या में पहुंच चुकी है। पंजाब पुलिस के एसपी मनप्रीत सिंह ढिल्लों का कहना है कि पुलिस भारी संख्या में पिस्तौल बरामद भी कर चुकी है फिर भी गैंगस्टरों के पास सी-30 पिस्तौल काफी है।
 
तुर्की की 9 एमएम पिस्तौल
तुर्की की 9 एमएम पिस्तौल भी गैंगस्टरों के पास है। तुर्की निर्मित 9 एमएम पिस्तौल 5 से 10 लाख रुपये में मिलती है और गैंगस्टर इसका इस्तेमाल करते हैं। जिगाना एक स्वचालित पिस्तौल है जो तुर्की में तैयार की गई थी। जिगाना पिस्तौल में संशोधित ब्राउनिंग-प्रकार के लॉकिंग सिस्टम के साथ एक लॉक-स्लाइड शॉर्ट रीकॉइल ऑपरेटिंग तंत्र है। इसके अलावा इन पिस्टल में ऑटोमैटिक फायरिंग पिन ब्लॉक भी होता है। पंजाब में यह गैंगस्टरों के पास पाक से भेजा जा रहा है।

बैरेटा पिस्तौल
बैरेटा (छोटी पिस्तौल) मूल रूप से यूएसए में बनी 20 कैलिबर की सबसे छोटी पिस्तौल है। आसानी से मनुष्य की हथेली में आ जाने वाली यह पिस्तौल जेब में भी आराम से रखी जा सकती थी। एक के बाद एक लगातार आठ फायर इस पिस्तौल से किए जा सकते हैं। इसमें फायर करते समय झटका बिल्कुल नहीं लगता और निशाना ठीक बैठता है। इसे चलाते समय निशानेबाज को अपना सिर बचाकर रखना होता है अन्यथा पीतल का खोखा चोट पहुंचा सकता है। इसकी कीमत 10 लाख के करीब है लेकिन एजेंसियों के मुताबिक यह पिस्तौल गैंगस्टरों की पहली पसंद है क्योंकि यह आसानी से हाथ व जेब में आ जाती है।

ग्लोक 17
ग्लोक 17 नाम की पिस्तौल 9 एमएम की गोलियों पर चलती है, इसलिए इसकी एक मैगजीन में 17 गोलियां स्टोर हो जाती हैं। गोलियों के मामले में इससे बढ़िया पिस्टल कोई और नहीं हो सकती। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें 9 एमएम की कोई भी गोली लग सकती है। इससे फर्क नहीं पड़ता है कि वह गोली किस बंदूक के लिए बनाई गई है। गोली अगर 9 एमएम की है, तो ग्लोक 17 उसे बड़े ही आराम से चला सकती है। वक्त के साथ इस पिस्तौल में बहुत से बदलाव आए। अब इसमें लेजर, स्कोप, फ्लैशलाइट जैसी कई चीजें लगाईं जाती हैं। ग्लोक भी पंजाब के गैंगस्टरों के पास देखी गई है और ऐसी आशंका है कि सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में ग्लोक 17 पिस्टल इस्तेमाल की गई है।

आरपीजी
आरपीजी या रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड कंधे से दागे जाने वाले मिसाइल हथियार को कहते हैं। वैसे इसका इस्तेमाल अक्सर टैंक विरोधी हथियारों के रूप में किया जाता है लेकिन पंजाब में इस तरह के हथियार का पहुंचना काफी चौंकाने वाला है। कंधे से दागा गया मिसाइल हथियार एक रॉकेट-चालित ग्रेनेड विस्फोटक वारहेड से लैस रॉकेट लांच करता है। इसकी रेंज आमतौर पर 700 मीटर होती है। इस तरह के हथियार अफगानिस्तान जैसे संकटग्रस्त देश में पाए गए हैं। अब भारत में इनका इस्तेमाल कई सवाल खड़े करता है। इसका इस्तेमाल मोहाली इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर पर किया गया था।

वहीं, पंजाब पुलिस के पास भी कुछ आधुनिक हथियार हैं लेकिन उतनी संख्या में नहीं कि हर पुलिस मुलाजिम को उपलब्ध करवाया जा सके। पंजाब पुलिस के पास एके-47, थ्री नाट थ्री, एएलआर, एलएमजी के अलावा अमेरिका का बना हुआ रॉगर 38 बोर है। वहीं पंजाब पुलिस के पास कुल 82 हजार की नफरी पर 1.25 लाख हथियार हैं, जिनमें कोई खास बदलाव नहीं है। 

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