मौत का तांडव: एक-एक कर जली चार नाबालिग दोस्तों की चिताएं... परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, जालंधर में हादसा
पंजाब के जालंधर में भयानक हादसे में 13 से 15 साल के चार नाबलिग दोस्तों की मौत हो गई। दो किशोरों ने मौके पर ही दम तोड़ा था और दो की इलाज के दौरान मौत हो गई।
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पंजाब के जालंधर में तेज रफ्तार के कहर ने शहर वासियों को झकझोर कर रख दिया जब दो दोस्तों की चिता एक साथ जली। दो मांताओं के आंसू रुके ही नहीं थे कि तीसरा किशोर ने भी दम तोड़ दिया और चौथा जो अमृतसर में भर्ती था वो भी बच नहीं पाया। ये वही चार दोस्त जशनदीप (15), कृष (15), एकम उर्फ लक्की (13) और सूरज (14) हैं, जो बिना हेलमेट और यातायात नियमों का पालन किए शहर से नकोदर एक एक्टिवा पर सवार हो धार्मिक स्थल पर जा रहे थे।
वैसे शहर के बस्तियां इलाके में हर चौक-रास्ते में नाकाबंदी होती है पर इन चारों को किसी ने नहीं रोका और ये बाबा खेल-राजनगर से निकल कर गांव सिंघा तक पहुंच गए। कुछ ही क्षण में 9वीं कक्षा के छात्र सदा के लिए अलविदा कह गए। जितनी गलती परिजनों की है उतनी ही पुलिस की, एक ने घर पर नहीं रोका और दूसरे ने सड़क पर और भयावह हादसा हो गया। तीन बच्चे जालंधर में और चौथे की अमृतसर में मौत हुई।
अभिभावक कह रहे उन्हें यह नहीं पता था कि एक एक्टिवा पर चार बच्चे साथ में जा रहे हैं लेकिन यह तो पता था कि सभी नाबालिग हैं और किसी ने हेलमेट भी नहीं पहना था। दूसरी तरफ पुलिस अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि चालान काट रहे हैं पर कोई जुर्माना या केस दर्ज नहीं किया ताकि अभिभावक-बच्चे संभलें। ऐसे हादसे परिवार ही नहीं पीढ़ी को भी खत्म कर देते हैं।
बच्चों को वाहन देना परिजनों की गलती
सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल बस्ती नौ के प्रिंसिपल स्वतंत्र पठानिया का कहना है कि शहर में हादसों की संख्या बढ़ने का कारण है रफ्तार का अंधा क्रेज, जिसमें ज्यादातर बच्चे शामिल होते हैं उन्हें पता ही नहीं होता कि यातायात नियम क्या हैं। स्कूल प्रबंधन के कहने वावजूद बच्चे दोपहिया वाहनों से आएंगे और बाहर पार्क करेंगे क्योंकि स्कूल ने 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ तो अभिभावक करते हैं जो जानबूझ नाबालिगों के हाथ में वाहन सौंप देते हैं जिन्हें सिर्फ रफ्तार से मतलब है परिणाम और नियमों से कोई लेना-देना नहीं। प्रतिदिन प्रार्थना सभा के साथ स्कूल में सांझ केंद्र द्वारा सेमिनार में सबकुछ बताते हैं पर कुछ नहीं बदलता, 99 फीसदी नाबालिग बच्चे वाहन चला रहे हैं और रफ्तार 100 से अधिक होती है, रफ्तार का ऐसा क्रेज रखने वाले बच्चों को हेलमेट भी नहीं बचा पाएगा लेकिन वह पहनना ही नहीं चाहते।
सेमिनार के साथ दी जाती से जानकारी
प्राइमरी स्कूल हेलरां के प्रिंसिपल मनविंदर सिंह का कहना है कि ऐसे हादसे तब तक नहीं रुकेंगे जब तक अभिभावक नहीं सोचेंगे। स्कूल में कही बात को अगर घर में परिजन भी बच्चों को सख्ती से पालन करवाएं तो सुधार हो सकता है लेकिन वह तो खुद ही वाहन देते हैं। पुलिस प्रशासन की नाकामी से ज्यादा अभिभावकों की लापरवाही युवाओं की जिंदगियां लील रही है। प्राइमरी स्कूल में ही बच्चों को प्राथमिक जानकारी देना शुरू कर देते हैं और परिजन छोटे-छोटे काम के लिए बच्चों को वाहन देना शुरू कर देते हैं। ये लापरवाही कब बड़े हादसे में बदल जाती है पता ही नहीं चलता। सरकार और शिक्षा विभाग ने कुछ नियम बनाए लेकिन लागू करवाने में स्कूल ने अपनी भूमिका निभाई, पुलिस और अभिभावक भी अपना काम करते तो ऐसे हादसे नहीं होते।
पुलिस चालान काट रही है, ऐसे हादसों में जुर्माने का प्रावधान नहीं केस दर्ज करते हैं
एसीपी ट्रैफिक जालंधर महेश सैनी ने कहा कि बच्चों के साथ जो हुआ ऐसे हादसों को रोकने के लिए लगातार पुलिस चालान काट रही है। स्कूलों में जाकर अभिभावकों को नाबालिग बच्चों को वाहन न देने की बात भी होती है पर मानने वाला वही है जिसके पास वाहन नहीं। ऐसे मामलों में जुर्माने का प्रावधान नहीं पर अभिभावक के साथ बच्चों पर केस दर्ज कर लेते हैं। यह पहला केस है जिसमें अभिभावक और बच्चों पर केस दर्ज हुआ है। ट्रैफिक पुलिस अपना काम बखूबी कर रही है ऐसे हादसे कभी-कभार होते हैं जिन्हें सिर्फ अभिभावक रोक सकते हैं। नाबालिग बच्चों के हाथों में वाहन न सौंपे।
नियम और जुर्माना
- नाबालिग के वाहन चलाने पर अभिभावक-बच्चों के खिलाफ केस दर्ज करने का प्रावधान लेकिन पुलिस चालान काट छोड़ रही।
- नाबालिग बच्चों के कारण सड़क दुर्घटना होने पर परिजनों को तीन साल तक की सजा, किसी केस में ऐसा नहीं हुआ।
- स्कूल प्रबंधन ने नाबालिग को वाहन लाने पर 25 हजार और अलग-अलग जुर्माना लगाया, नतीजा बच्चे वाहन बाहर ही पार्क कर रहे।
- पुलिस ने नाबालिग को दोबारा दोपहिया वाहन चलाते समय जब्त करने का नियम बनाया लेकिन कार्रवाई एक बार भी नहीं हुई।